प्रतापगढ़ में काली मां के चबूतरे की जमीन को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने महेशगंज थाने का किया घेराव
अंशुमान द्विवेदी
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता प्रतापगढ़
बाबागंज / प्रतापगढ़।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में जमीन के विवाद को लेकर एक नया मामला सामने आया है। महेशगंज थाना क्षेत्र के गुजवर भीटा गांव में काली मां के पुराने चबूतरे की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद गहरा गया है। मामले को लेकर रविवार को गांव के दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर महेशगंज थाने पहुंच गए और पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए थाने का घेराव किया। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और धार्मिक स्थल से जुड़ी जमीन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई।

मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। एक पक्ष जहां काली मां के पुराने चबूतरे की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि ग्रामीण उसकी निजी खेत की जमीन पर जबरन अधिकार जमाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनने की बात सामने आई है।
वर्षों पुराने काली मां के चबूतरे को लेकर विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक, गुजवर भीटा गांव के किनारे काफी समय से काली मां का एक पुराना चबूतरा स्थापित है। इस स्थान के आसपास पीपल का पेड़ भी मौजूद है। इसके अलावा यहां दुर्गा पूजा से संबंधित धार्मिक गतिविधियां भी होती रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जिस स्थान पर चबूतरा बना हुआ है, वह आबादी की जमीन है और इसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक एवं सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नसीब उर्फ सोनू नाम के व्यक्ति द्वारा चबूतरे से संबंधित जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस जमीन को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता, मारपीट और धमकी देने जैसी घटनाएं भी हुई हैं।
इसी मुद्दे को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी बढ़ती गई और रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर महेशगंज थाने पहुंच गए।
दूसरे पक्ष ने निजी खेत पर कब्जे का लगाया आरोप
वहीं, इस पूरे मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी अपनी बात रखी गई है। नसीब उर्फ सोनू का कहना है कि उन्होंने काली मां का चबूतरा बनवाने के लिए अपनी सहमति से जमीन उपलब्ध कराई थी। उनका दावा है कि चबूतरे के आसपास स्थित खेत की कुछ जमीन उनकी निजी संपत्ति है।
नसीब उर्फ सोनू के अनुसार, अब ग्रामीण उनकी निजी खेत की जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर बिना सहमति चारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई।
दूसरे पक्ष का कहना है कि चबूतरे के लिए दी गई जमीन और उनके निजी खेत की जमीन को अलग-अलग समझना जरूरी है। उनका आरोप है कि निजी संपत्ति पर हस्तक्षेप के कारण ही विवाद बढ़ा है।
थाने पहुंचकर ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
रविवार को गुजवर भीटा गांव के दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर महेशगंज थाने पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि काली मां के पुराने चबूतरे की जमीन से जुड़े मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने पुलिस से यह भी मांग की कि धार्मिक स्थल के आसपास की जमीन की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए और किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति न दी जाए। उनका कहना था कि जमीन के विवाद के कारण गांव का माहौल खराब नहीं होना चाहिए और मामले का समाधान प्रशासनिक स्तर पर कराया जाना चाहिए।
जमीन के दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट होगी स्थिति
इस विवाद में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित भूमि की पैमाइश महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पता लगाना जरूरी है कि चबूतरा किस प्रकार की भूमि पर स्थित है और उसके आसपास की जमीन का स्वामित्व किसके नाम दर्ज है।
यदि संबंधित जमीन आबादी या सार्वजनिक उपयोग की भूमि है तो उसके संबंध में उपलब्ध सरकारी अभिलेखों की जांच आवश्यक होगी। वहीं, यदि किसी हिस्से पर निजी स्वामित्व का दावा किया जा रहा है तो उसके समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच होने से विवाद की असली वजह सामने आएगी और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकेगी।
थानाध्यक्ष ने दिया जांच और कार्रवाई का भरोसा
थाने पहुंचे ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद महेशगंज थानाध्यक्ष भूपेश नाथ सिंह ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस जांच और जमीन से संबंधित राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गांव में शांति बनाए रखने की जरूरत
गुजवर भीटा गांव में काली मां के पुराने चबूतरे को लेकर उठा विवाद अब थाने तक पहुंच चुका है। एक ओर ग्रामीण धार्मिक स्थल की जमीन को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर दूसरा पक्ष अपनी निजी खेत की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगा रहा है।
ऐसे मामलों में प्रशासन के लिए जरूरी है कि दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष जांच कराई जाए और जमीन की वास्तविक स्थिति के आधार पर विवाद का समाधान निकाला जाए। साथ ही गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को कानून का पालन करने और किसी भी तरह के टकराव से बचने की आवश्यकता है।
अब ग्रामीणों और संबंधित पक्षों की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। आने वाले समय में जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि चबूतरे और उसके आसपास की जमीन को लेकर किस पक्ष का दावा अभिलेखों के अनुसार सही है।
स्थान: बाबागंज, जनपद प्रतापगढ़।
