दिव्यांग बच्चों के चेहरों पर बिखरी दीपावली की खुशियां, तीज त्यौहार सखी ग्रुप ने उपहार देकर मनाया दीपोत्सव

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महिपाल सिंह संवाददाता

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर

बिलासपुर (रामपुर)। दीपावली का पर्व केवल घरों को रोशन करने और दीप जलाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने और आपसी प्रेम, अपनत्व एवं सहयोग की भावना को मजबूत करने का भी संदेश देता है। इसी भावना को साकार करते हुए बिलासपुर के तीज त्यौहार सखी ग्रुप की महिलाओं ने डाम कॉलोनी स्थित दिव्यांग बच्चों के विशेष विद्यालय अथर्व डे केयर एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में बच्चों के साथ दीपोत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर महिलाओं ने बच्चों के साथ दीपावली मनाकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी और उपहार भेंट कर त्योहार की खुशियों को दोगुना कर दिया।

कार्यक्रम का पूरा वातावरण उत्साह, उमंग, स्नेह और खुशियों से सराबोर रहा। दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचीं तीज त्यौहार सखी ग्रुप की महिलाओं ने उनके साथ समय बिताया और उन्हें यह एहसास कराया कि समाज का प्रत्येक बच्चा प्रेम, सम्मान और समान अवसर का अधिकारी है। कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को और भी खास बना दिया।

मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

दीपोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के चित्र पर माल्यार्पण करके की गई। इसके बाद विधि-विधान से आरती उतारी गई और सभी ने मिलकर सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद तीज त्यौहार सखी ग्रुप की महिलाओं ने दिव्यांग बच्चों के साथ मिलकर दीप प्रज्वलित किए।

दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा। बच्चों के उत्साह और महिलाओं के स्नेहपूर्ण व्यवहार ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इस दौरान बच्चों ने भी दीपावली के पर्व को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। सभी ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और त्योहार की खुशियों को साझा किया।

बच्चों के साथ मनाया दीपावली का उत्सव

कार्यक्रम के दौरान तीज त्यौहार सखी ग्रुप की बहनों ने बच्चों के साथ दीप जलाने के साथ पटाखे छोड़कर भी दीपावली का उत्सव मनाया। बच्चों के लिए यह अवसर बेहद खास रहा। उनके साथ हंसी-मजाक, बातचीत और उत्सव की गतिविधियों में शामिल होकर महिलाओं ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

समूह की महिलाओं ने बच्चों को उपहार भी भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। इस पहल का उद्देश्य केवल त्योहार मनाना नहीं, बल्कि उन बच्चों के जीवन में खुशियों के कुछ विशेष पल जोड़ना भी था, जिन्हें समाज के सहयोग और प्रोत्साहन की निरंतर आवश्यकता रहती है।

बच्चों की कलाकारी ने जीता सभी का दिल

इस दीपोत्सव की सबसे आकर्षक बात यह रही कि दिव्यांग बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी के दीपकों को सुंदर ढंग से सजाया था। बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और मेहनत से तैयार किए गए इन आकर्षक दीपकों को तीज त्यौहार सखी ग्रुप की बहनों को उपहार स्वरूप भेंट किया।

बच्चों द्वारा बनाए गए इन दीपकों को देखकर महिलाएं काफी प्रसन्न हुईं। उनके लिए यह केवल मिट्टी का दीपक नहीं, बल्कि बच्चों के स्नेह, मेहनत और प्रतिभा का प्रतीक था। बच्चों की इस सुंदर पहल ने यह संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष क्षमता और हुनर छिपा होता है। जरूरत केवल उसे पहचानने, प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ने का अवसर देने की है।

महिलाओं ने बच्चों की कलाकारी की सराहना की और उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया। इस दौरान बच्चों और समूह की बहनों के बीच आत्मीयता और अपनापन देखने को मिला।

किसी के चेहरे पर खुशी लाना ही असली दीपावली : सुशील कुमार पाण्डेय

अथर्व डे केयर एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के संस्थापक सुशील कुमार पाण्डेय ने कार्यक्रम के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए तीज त्यौहार सखी ग्रुप की सभी महिलाओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल अपने घरों में रोशनी करना नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों और विशेष बच्चों के जीवन में भी खुशियों का उजाला फैलाना है।

उन्होंने कहा कि किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना और किसी के जीवन में खुशी के पल जोड़ना ही सच्चे अर्थों में दीपावली मनाना है। जब समाज के लोग आगे आकर बच्चों के साथ त्योहार मनाते हैं, तो इससे उन्हें अपनत्व और प्रोत्साहन मिलता है। ऐसे आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें समाज से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

संस्थापक ने कहा कि तीज त्यौहार सखी ग्रुप की बहनों ने बच्चों के बीच पहुंचकर जिस प्रेम और सहयोग का परिचय दिया है, वह सराहनीय है। सभी के सहयोग और सहभागिता से बच्चों का दीपोत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास एवं समारोहपूर्वक संपन्न हो सका। उन्होंने समूह की महिलाओं के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक गतिविधियों में सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

सामाजिक सहभागिता का दिया प्रेरणादायक संदेश

तीज त्यौहार सखी ग्रुप की इस पहल ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी बढ़ती है, जब उसे दूसरों के साथ साझा किया जाए। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ दीपावली मनाना सामाजिक संवेदनशीलता, समानता और मानवीय मूल्यों का सुंदर उदाहरण है।

आज के व्यस्त जीवन में अक्सर त्योहार व्यक्तिगत खुशियों और पारिवारिक आयोजनों तक सीमित रह जाते हैं। ऐसे में सामाजिक समूहों द्वारा विशेष बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचकर उत्सव मनाना समाज में सहयोग और सद्भाव की भावना को मजबूत करता है।

इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी खुशियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, ऐसे आयोजनों से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां लाने का प्रयास करें।

यादगार बना दीपोत्सव का आयोजन

अथर्व डे केयर एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में आयोजित यह दीपोत्सव बच्चों और तीज त्यौहार सखी ग्रुप की महिलाओं के लिए यादगार अवसर बन गया। दीपों की रोशनी, बच्चों के हाथों से तैयार आकर्षक मिट्टी के दीपक, उपहारों की खुशी और सभी के बीच स्नेहपूर्ण माहौल ने दीपावली के पर्व को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम ने यह साबित किया कि त्योहारों की सुंदरता महंगे उपहारों और भव्य सजावट में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सहयोग और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने में छिपी होती है। तीज त्यौहार सखी ग्रुप की इस सराहनीय पहल ने दीपावली के संदेश को सार्थक करते हुए समाज में सेवा, संवेदना और अपनत्व की रोशनी फैलाने का काम किया।

संदेश: जब दीप किसी दूसरे के जीवन में खुशी का उजाला बन जाए, तभी दीपावली का पर्व अपने वास्तविक अर्थों में सफल होता है।

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