कांगो में एडीएफ के नरसंहार पर संयुक्त राष्ट्र की सख्त प्रतिक्रिया: गुटेरेस ने कहा—“मानवता शर्मसार”

मार्च 2023 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के अशांत पूर्वी इलाके में हुए निर्मम हमलों ने एक बार फिर क्षेत्र की नाजुक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। इन हमलों में कम से कम 89 नागरिकों की जान जाने की पुष्टि के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे मानवता पर सीधा हमला बताते हुए तीखी निंदा की।
एडीएफ: क्षेत्र का खूनी साया
एडीएफ (Allied Democratic Forces) लंबे समय से मध्य अफ्रीका में आतंक और हिंसा का प्रतीक बना हुआ है।
- संगठन की उत्पत्ति युगांडा में हुई,
- लेकिन बीते वर्षों में यह पूर्वी कांगो में अपने पैर मजबूत कर चुका है।
खुफिया रिपोर्टें बताती हैं कि एडीएफ का संबंध इस्लामिक स्टेट (ISIS) से भी जुड़ चुका है, जिसके बाद इसकी हिंसा और हमलों की प्रकृति और भी घातक हो गई है। मार्च 2023 की घटना में हमला इतना योजनाबद्ध था कि कई परिवारों को उनके ही घरों में मौत के हवाले कर दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र का कठोर संदेश
गुटेरेस ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट कहा कि संयुक्त राष्ट्र का कर्तव्य है कि वह कांगो सरकार के साथ मिलकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
उन्होंने यह भी कहा कि “MONUSCO क्षेत्र में मानवाधिकारों की रक्षा और हमलों के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करता रहेगा।”
MONUSCO, जो वर्षों से कांगो में शांति मिशन चला रहा है, लगातार बढ़ते हमलों के बावजूद स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शांति बहाली की कोशिशों में जुटा है।
बेघर होते नागरिक और बढ़ता मानवीय संकट
पूर्वी कांगो पहले ही दशकों से हिंसा से जूझ रहा है, और एडीएफ के बढ़ते हमलों ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
- हजारों लोगों को अपने गाँव और घर छोड़ने पड़े हैं।
- राहत एजेंसियों तक पहुँचना मुश्किल हो गया है।
- स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और रोज़मर्रा की सुविधाएँ महीनों से प्रभावित हैं।
मानवीय संगठनों के अनुसार, यह संकट केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल बन चुका है।
स्थायी शांति की राह—चुनौतियाँ और उम्मीदें
कांगो सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों के सामने अब यह सबसे बड़ी चुनौती है कि वे हिंसा की जड़ को खत्म करें।
इसके लिए ज़रूरी है:
- आतंकियों के खिलाफ समन्वित सैन्य अभियान
- प्रभावित लोगों के पुनर्वास की ठोस योजना
- युवाओं को हिंसा के रास्ते से दूर रखने के लिए सामाजिक और आर्थिक अवसर
- स्थानीय स्तर पर संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करना
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हथियारों के दम पर शांति कायम करना संभव नहीं—सुरक्षा, विकास और कूटनीति तीनों ही एक साथ चलने चाहिए।
निष्कर्ष
मार्च 2023 के एडीएफ हमलों ने स्पष्ट कर दिया कि पूर्वी कांगो की स्थिति अब भी बेहद संवेदनशील और विस्फोटक है। संयुक्त राष्ट्र की सक्रिय भागीदारी और वैश्विक सहयोग ही इस भयावह संकट से निकलने की उम्मीद जगा रहे हैं।
जब तक हिंसा पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक शांति की राह लंबी और चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी।
