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अमित शाह का बड़ा ऐलान: 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान, 2029 से पहले सभी NDA राज्यों में UCC लागू करने का दावा

नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है। उनके अनुसार यह अभियान 17 सितंबर से एक महीने तक चलेगा और इसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, विकास तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है। अभियान की मूल भावना ‘जन सेवा ही प्रभु की सेवा’ के संदेश पर आधारित होगी।

अमित शाह ने इस पहल को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों को सार्वजनिक सेवा और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने वाला अभियान बताया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को सफल बनाने के लिए सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

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17 सितंबर से शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान

अमित शाह के मुताबिक 17 सितंबर से शुरू होने वाला सेवा संकल्प अभियान पूरे देश में एक महीने तक चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के साथ-साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर को ध्यान में रखते हुए इस अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है।

अभियान का संदेश ‘जन सेवा ही प्रभु की सेवा’ रखा गया है। इसके जरिए लोगों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।

इस पहल में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिए जाने की बात कही गई है। इसका व्यापक उद्देश्य नागरिकों को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना और उन्हें यह एहसास कराना है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की साझा भूमिका है।

विकसित भारत 2047 पर जोर

अमित शाह ने अपने संबोधन में विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार लगातार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में विभिन्न योजनाओं और नीतियों को आगे बढ़ाने की बात करती रही है।

सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इसी व्यापक लक्ष्य को सामाजिक भागीदारी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अभियान में सेवा कार्यों के जरिए लोगों को राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा।

शाह के बयान के मुताबिक, विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं है। समाज के कमजोर वर्गों तक सुविधाओं की पहुंच, नागरिकों की भागीदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2029 से पहले UCC लागू करने का दावा

अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर भी बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 से पहले भाजपा-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी।

UCC का विषय लंबे समय से भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से संबंधित कुछ मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है।

अमित शाह के बयान से संकेत मिलता है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल आने वाले वर्षों में UCC को अपने प्रमुख राजनीतिक एवं नीतिगत मुद्दों में बनाए रख सकते हैं। हालांकि किसी भी राज्य में कानून लागू करने की प्रक्रिया वहां की विधायी प्रक्रिया, कानूनी प्रावधानों और संबंधित सरकार के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

राजनीतिक दौर को लेकर विपक्ष पर निशाना

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 2014 से पहले के राजनीतिक दौर की आलोचना भी की। उन्होंने उस समय की राजनीति को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और जातिवाद जैसी समस्याओं से जोड़ते हुए मौजूदा राजनीति को ‘परफॉर्मेंस की राजनीति’ के रूप में प्रस्तुत किया।

शाह का तर्क था कि राजनीति में सरकार के कामकाज और उसके प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार जनता अब सरकारों का मूल्यांकन उनके काम, योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास के परिणामों के आधार पर करती है।

उन्होंने परिवारवाद और जातीय राजनीति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती के तौर पर पेश किया और दावा किया कि मौजूदा दौर में राजनीतिक विमर्श का केंद्र विकास और प्रदर्शन की ओर बढ़ा है।

सेवा और राजनीति के बीच नया संदेश

सेवा संकल्प अभियान की घोषणा को भाजपा के राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रमों की व्यापक पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पार्टी और उससे जुड़े संगठनों की ओर से विभिन्न सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं।

इस बार अभियान को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है। इसके जरिए जनता के बीच सेवा कार्यों और राष्ट्र निर्माण के विचार को प्रमुखता देने का प्रयास किया जाएगा।

अभियान का संदेश धार्मिक और सामाजिक भावना से जुड़ी भाषा के माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंचाने की कोशिश करता है। ‘जन सेवा ही प्रभु की सेवा’ का विचार लोगों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और जरूरतमंदों के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है।

UCC पर आगे की राह होगी अहम

UCC को लेकर अमित शाह का 2029 से पहले 21 भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में इसे लागू करने का भरोसा आने वाले राजनीतिक वर्षों के लिए महत्वपूर्ण बयान माना जा सकता है। इस घोषणा के बाद संबंधित राज्यों में कानून और नीतिगत प्रक्रियाओं को लेकर भी चर्चा तेज होने की संभावना है।

समान नागरिक संहिता का मुद्दा संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके क्रियान्वयन में विधायी प्रक्रिया के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों की चिंताओं और न्यायिक पहलुओं का भी महत्व रहेगा।

2047 के लक्ष्य के साथ राजनीतिक संदेश

अमित शाह के पूरे संबोधन में दो प्रमुख संदेश दिखाई देते हैं। पहला, सेवा संकल्प अभियान के जरिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से नागरिकों को जोड़ना। दूसरा, UCC को लेकर भाजपा-एनडीए सरकारों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को सामने रखना।

इसके साथ ही 2014 से पहले और बाद की राजनीति की तुलना करते हुए शाह ने भाजपा की राजनीति को विकास और प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया। उनका बयान पार्टी के उस राजनीतिक संदेश को मजबूत करता है जिसमें शासन के कामकाज और नीतिगत उपलब्धियों को चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया जाता है।

कुल मिलाकर, 17 सितंबर से प्रस्तावित सेवा संकल्प अभियान और UCC को लेकर 2029 से पहले का लक्ष्य अमित शाह के संबोधन के दो प्रमुख बिंदु रहे। एक ओर सेवा और जनभागीदारी के जरिए विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर समान नागरिक संहिता को लेकर भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में आने वाले वर्षों की संभावित नीति दिशा का संकेत मिला। अब इस अभियान की जमीनी गतिविधियों और UCC को लेकर राज्यों में होने वाली विधायी कार्रवाई पर देश की राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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