
गुवाहाटी: असम और मेघालय के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और दोनों राज्यों के बीच सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए गुवाहाटी में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। शिलॉन्ग में 19 अगस्त को खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की बाइक रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद दोनों राज्यों के बीच आवाजाही और आपसी संबंधों पर असर पड़ा है। अब सरकारें हालात को और बिगड़ने से रोकने तथा शांति कायम करने के प्रयास में जुटी हैं।
शिलॉन्ग की घटना के बाद बढ़ा तनाव
19 अगस्त को शिलॉन्ग में KSU की ब्लैक-फ्लैग बाइक रैली के दौरान हिंसा भड़क गई थी। पुलिस के अनुसार, घटना में कम से कम 31 वाहनों को नुकसान पहुंचा, कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई और दो वाहनों को आग के हवाले किया गया। प्रभावित वाहनों में असम नंबर वाले वाहन भी शामिल थे।
घटना के बाद असम में नाराजगी बढ़ी और गुवाहाटी के वाहन संचालकों तथा परिवहन संगठनों ने मेघालय जाने वाले मार्गों पर विरोध शुरू कर दिया। जॉराबाट और खानापारा के आसपास नाकेबंदी से दोनों राज्यों के बीच यातायात प्रभावित हुआ।
दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने की बातचीत
हिंसा के बाद मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के बीच बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
मेघालय के मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के नामित कैबिनेट मंत्री आगे की बातचीत करेंगे और शांति, विश्वास तथा सामान्य स्थिति बहाल करने के रास्तों पर विचार करेंगे। असम के मुख्यमंत्री ने भी मेघालय में असम-पंजीकृत वाहनों को निशाना बनाए जाने को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
सीमा पर आवाजाही प्रभावित
तनाव का सीधा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ा है। गुवाहाटी से शिलॉन्ग जाने वाले मार्ग पर वाहनों को रोके जाने से यात्रियों, पर्यटकों और सामान ले जाने वाले वाहनों को परेशानी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ यात्रियों को सीमा क्षेत्र में वाहन बदलने पड़े, जबकि कई मालवाहक वाहन भी प्रभावित हुए।
हालांकि, आवश्यक सेवाओं और एंबुलेंस जैसे वाहनों को रास्ता देने की व्यवस्था की गई है। असम पुलिस ने मेघालय में फंसे लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन भी सक्रिय की है।
हिंसा के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने मेघालय में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की पांच कंपनियां तैनात करने को मंजूरी दी है। इनमें CRPF की चार कंपनियां और रैपिड एक्शन फोर्स की एक कंपनी शामिल है। यह तैनाती कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आगे की हिंसा रोकने के उद्देश्य से की गई है।
मेघालय पुलिस ने शिलॉन्ग हिंसा के मामले में कई FIR दर्ज की हैं और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। KSU के कुछ प्रमुख नेताओं को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ताजा घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
शिलॉन्ग की मूल घटना के बाद भी मेघालय के कुछ हिस्सों में सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने और पेट्रोल बम फेंके जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इससे राज्य में तनाव और बढ़ गया है।
ऐसे माहौल में दोनों राज्यों के प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंसा की किसी नई घटना को रोकना और आम लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम करना है।
शांति और संयम की अपील
असम और मेघालय दोनों सरकारों ने लोगों से संयम बनाए रखने और किसी भी अफवाह या उकसावे पर प्रतिक्रिया नहीं देने की अपील की है। दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, रोजगार, कारोबार और पर्यटन के लिए एक-दूसरे के राज्यों में आते-जाते हैं।
ऐसे में गुवाहाटी में होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत का उद्देश्य केवल तत्काल तनाव कम करना ही नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच भरोसा मजबूत करना भी है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सीमा पर यातायात सामान्य करने, हिंसा पर रोक लगाने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा तनाव को स्थायी रूप से कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
