
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में AYUSH PG की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से अभ्यर्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षा केंद्र पर अचानक बिजली चले जाने के बाद कंप्यूटर बंद हो गए और बड़ी संख्या में परीक्षार्थी अपना पेपर पूरा नहीं कर सके। घटना को लेकर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।
बताया गया कि परीक्षा जयपुर स्थित सत्या साईं कॉलेज परीक्षा केंद्र पर आयोजित की जा रही थी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होनी थी। हालांकि परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही बिजली चली गई। अभ्यर्थियों के अनुसार, अधिकांश छात्र करीब 20 से 25 मिनट ही परीक्षा दे पाए थे, जिसके बाद कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए।
जनरेटर में डीजल नहीं होने का आरोप
बिजली गुल होने के बाद परीक्षा केंद्र पर बैकअप के लिए जनरेटर मौजूद होने की बात सामने आई, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि उसमें डीजल नहीं था। इसके कारण बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी और ऑनलाइन परीक्षा आगे नहीं बढ़ पाई।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा केंद्र पर पहले से वैकल्पिक बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, क्योंकि ऑनलाइन परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर और बिजली की उपलब्धता पर निर्भर रहती है।
‘पांच मिनट में आ जाएगी बिजली’ का मिलता रहा आश्वासन
बिजली जाने के बाद अभ्यर्थियों को कथित तौर पर बार-बार कुछ मिनट में बिजली आने का भरोसा दिया गया। लेकिन इंतजार बढ़ता गया और निर्धारित परीक्षा अवधि समाप्त हो गई। छात्रों का कहना है कि उन्हें स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि परीक्षा दोबारा शुरू होगी या उसे रद्द किया जाएगा।
समय बीतने के साथ परीक्षा केंद्र के बाहर अभ्यर्थियों की बेचैनी और नाराजगी बढ़ती गई। कई छात्रों ने प्रशासन से स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
दूर-दराज से पहुंचे थे अभ्यर्थी
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कई अभ्यर्थी दूसरे शहरों और कस्बों से जयपुर पहुंचे थे। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी में लंबे समय तक मेहनत की थी और इस तरह परीक्षा बाधित होने से उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में तकनीकी या प्रशासनिक खामी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। वे पूरे मामले की जांच के साथ प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर भी उठे सवाल
लंबे समय तक परीक्षा प्रक्रिया स्पष्ट न होने के कारण कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों की चिंता थी कि यदि कुछ उम्मीदवारों ने पेपर देखा है और अन्य उम्मीदवारों को लंबे इंतजार के बाद अलग परिस्थितियों में परीक्षा देनी पड़े, तो समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, पेपर लीक या किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। ये सवाल फिलहाल अभ्यर्थियों द्वारा उठाई गई आशंकाओं के रूप में सामने आए हैं।
केंद्र प्रशासन के रवैये पर नाराजगी
अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने परीक्षा केंद्र प्रशासन पर पर्याप्त जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने स्थिति को लेकर जवाब मांगने की कोशिश की तो उन्हें केंद्र के बाहर इंतजार करना पड़ा और गेट को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी।
इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं और आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NTA की निगरानी पर भी सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल परीक्षा आयोजन और केंद्रों की व्यवस्था की निगरानी को लेकर उठ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर बिजली और बैकअप व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, तो परीक्षा शुरू होने से पहले इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
छात्र अब संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने और प्रभावित अभ्यर्थियों के हित में उचित निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल इस घटना से जुड़े आरोपों और व्यवस्थागत कमियों की आधिकारिक जांच या संबंधित एजेंसियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। प्रभावित अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उनकी मेहनत और परीक्षा के अवसर को देखते हुए उन्हें निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाए।
