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भारत के जेम्स और ज्वेलरी निर्यात में तेजी, अप्रैल-जुलाई में 2.44% बढ़कर 9.17 अरब डॉलर पहुंचा कारोबार

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नई दिल्ली। भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीने सकारात्मक संकेत लेकर आए हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच देश का सकल जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात अमेरिकी डॉलर के लिहाज से 2.44 प्रतिशत बढ़कर 9.17 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान सोने के जड़ाऊ आभूषणों यानी स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। इस श्रेणी का निर्यात 21.09 प्रतिशत बढ़ा है।

जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के आंकड़ों के मुताबिक, निर्यात क्षेत्र में वृद्धि केवल सोने के आभूषणों तक सीमित नहीं रही। चांदी के आभूषणों, प्लैटिनम ज्वेलरी और पॉलिश्ड लैब-ग्रोwn डायमंड जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों ने भी निर्यात प्रदर्शन को मजबूती दी है। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों और उपभोक्ता मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, भारतीय आभूषण उद्योग का यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चार महीने में चांदी के आभूषणों ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार

अप्रैल-जुलाई अवधि के दौरान चांदी के आभूषणों का निर्यात सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली श्रेणियों में शामिल रहा। इस अवधि में सिल्वर ज्वेलरी शिपमेंट में 72.19 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी से बने आभूषणों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

चांदी के आभूषणों का निर्यात इस अवधि में करीब 508.18 मिलियन डॉलर रहा। वहीं प्लैटिनम ज्वेलरी का निर्यात 77.82 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। प्लैटिनम आभूषणों के निर्यात में भी लगभग 17.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इस प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि भारतीय निर्यातक पारंपरिक सोने के बाजार के साथ-साथ दूसरे कीमती धातुओं से बने उत्पादों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।

स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी बनी प्रमुख ताकत

सोने के आभूषणों की कुल श्रेणी में भी वृद्धि देखने को मिली। अप्रैल-जुलाई के दौरान प्लेन और स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी समेत सोने के आभूषणों का निर्यात 5.87 प्रतिशत बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया।

इनमें स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का प्रदर्शन विशेष रूप से मजबूत रहा। इसका निर्यात लगभग 2.24 अरब डॉलर रहा। आभूषणों में हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के इस्तेमाल वाले उत्पादों की मांग भारत के प्रमुख विदेशी बाजारों में बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग और सिंगापुर जैसे बाजारों से स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी की मांग में मजबूती आई है। इन बाजारों का भारतीय ज्वेलरी निर्यात में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

लैब-ग्रोwn डायमंड को भी मिला सहारा

हीरा क्षेत्र में भी कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान पॉलिश्ड लैब-ग्रोwn डायमंड का निर्यात 7.47 प्रतिशत बढ़ा। इस अवधि में पॉलिश्ड लैब-ग्रोwn डायमंड का निर्यात करीब 408.50 मिलियन डॉलर रहा।

लैब-ग्रोwn डायमंड ने पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आभूषण बाजार में अपनी अलग जगह बनाई है। भारतीय कंपनियां कटिंग, पॉलिशिंग और डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के कारण इस बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हालांकि जुलाई में इस श्रेणी के प्रदर्शन में कमजोरी भी देखने को मिली।

जुलाई में कुल निर्यात लगभग स्थिर

अप्रैल-जुलाई की संचयी तस्वीर सकारात्मक रहने के बावजूद केवल जुलाई महीने के आंकड़े अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दिखाते हैं। जुलाई 2026 में भारत का कुल जेम्स और ज्वेलरी निर्यात करीब 2.35 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने के 2.34 अरब डॉलर की तुलना में सिर्फ 0.38 प्रतिशत अधिक है।

इससे स्पष्ट है कि उद्योग के सामने वैश्विक बाजार में मांग को लेकर कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। हालांकि सोने के आभूषणों ने जुलाई में बेहतर प्रदर्शन किया। इस महीने गोल्ड ज्वेलरी निर्यात में 8.73 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का निर्यात जुलाई में 21.36 प्रतिशत बढ़ा। इससे पता चलता है कि आभूषणों की ऐसी श्रेणियां जिनमें डिजाइन और वैल्यू एडिशन अधिक है, वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए बेहतर अवसर पैदा कर रही हैं।

सोने की कीमतों में गिरावट का भी असर

जुलाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत जुलाई में 3.88 प्रतिशत घटकर 4,073.92 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रही, जबकि जून में यह 4,238.32 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस थी।

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का आभूषण उद्योग पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कीमतें बढ़ने पर उपभोक्ता खरीदारी को टाल सकते हैं, जबकि कीमतों में कमी मांग को सहारा दे सकती है। हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग बाजारों और उत्पाद श्रेणियों में अलग हो सकता है।

IIJS Bharat Premiere से बढ़ी उम्मीदें

GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली ने उद्योग के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। उन्होंने IIJS Bharat Premiere 2026 की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोजन में 61,000 से अधिक लोग पहुंचे, जिनमें 80 देशों से आए 5,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय आगंतुक भी शामिल थे।

इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भारतीय जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों में खरीदारों, निर्यातकों, डिजाइनरों और निर्माताओं के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ता है। इससे भविष्य में नए ऑर्डर मिलने और निर्यात शिपमेंट बढ़ने की संभावना बनती है।

उद्योग को उम्मीद है कि प्रदर्शनी के दौरान हुए कारोबारी समझौते और संपर्क आने वाले महीनों में वास्तविक निर्यात ऑर्डर में बदल सकते हैं।

हीरा कारोबार में मिश्रित तस्वीर

जहां गोल्ड ज्वेलरी और चांदी के आभूषणों ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं जुलाई में कुछ अन्य प्रमुख श्रेणियों में कमजोरी दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार, पॉलिश्ड डायमंड का निर्यात जुलाई में 18.23 प्रतिशत घटा। इसी तरह पॉलिश्ड लैब-ग्रोwn डायमंड के निर्यात में भी करीब 8.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

यह स्थिति बताती है कि भारतीय ज्वेलरी निर्यात की तस्वीर एक समान नहीं है। कुछ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक डायमंड सेगमेंट को वैश्विक मांग, कीमत और उपभोक्ता प्राथमिकताओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय उद्योग के लिए आगे की राह

जेम्स एवं ज्वेलरी सेक्टर भारत के निर्यात और रोजगार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस उद्योग से जुड़े कारीगरों, डिजाइनरों, पॉलिशिंग इकाइयों, निर्माताओं और निर्यातकों की बड़ी संख्या देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देती है।

अप्रैल-जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कंपनियों के लिए वैल्यू-एडेड ज्वेलरी, चांदी के उत्पाद, प्लैटिनम और स्टडेड गोल्ड जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में डिजाइन, गुणवत्ता, प्रमाणन, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरत के अनुरूप उत्पाद तैयार करना निर्यात वृद्धि की कुंजी बन सकता है।

कुल मिलाकर, अप्रैल-जुलाई 2026 में 9.17 अरब डॉलर का सकल जेम्स एवं ज्वेलरी निर्यात भारतीय आभूषण उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत है। हालांकि जुलाई में कुल वृद्धि सीमित रही और डायमंड सेगमेंट में दबाव दिखाई दिया, लेकिन गोल्ड, सिल्वर और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की मजबूत मांग ने उद्योग को उम्मीद दी है। यदि अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार जारी रहता है और भारतीय निर्यातक नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाते हैं, तो आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के प्रदर्शन में और मजबूती देखने को मिल सकती है।

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