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भारत के प्रमुख पठार: भू-आकृतिक विशेषताएँ, प्रकार और महत्व

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प्रस्तावना

भारत अपनी विविध भौगोलिक संरचना के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यहाँ हिमालय जैसे ऊँचे पर्वत, विशाल मैदान, लंबी तटीय पट्टियाँ और विस्तृत पठार पाए जाते हैं। इनमें पठार भारत की भौगोलिक, आर्थिक और प्राकृतिक संपदा का महत्वपूर्ण आधार हैं। देश का अधिकांश दक्षिणी भाग प्रायद्वीपीय पठार से घिरा हुआ है, जो विश्व के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक माना जाता है। भारत के प्रमुख पठार न केवल खनिज संपदा से समृद्ध हैं, बल्कि कृषि, जलविद्युत उत्पादन, उद्योग और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

पठार क्या होता है?

पठार (Plateau) पृथ्वी की वह ऊँची एवं अपेक्षाकृत समतल भूमि होती है, जिसकी सतह आसपास के क्षेत्रों से ऊँची होती है। पठारों का निर्माण ज्वालामुखीय गतिविधियों, भू-पर्पटी के उत्थान तथा अपरदन जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं से होता है।

भारत के प्रमुख पठार

1. दक्कन का पठार

दक्कन का पठार भारत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण पठार है। इसका विस्तार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक फैला हुआ है। इसका अधिकांश भाग बेसाल्ट चट्टानों से बना है, जिन्हें “डेक्कन ट्रैप” कहा जाता है।

विशेषताएँ:

2. मालवा का पठार

मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में फैला मालवा का पठार ज्वालामुखीय चट्टानों से निर्मित है।

विशेषताएँ:

3. छोटानागपुर का पठार

झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में फैला यह पठार भारत का सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्र माना जाता है।

विशेषताएँ:

4. बुंदेलखंड का पठार

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित यह पठार ग्रेनाइट चट्टानों से निर्मित है।

विशेषताएँ:

5. बघेलखंड का पठार

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में स्थित यह पठार विंध्य पर्वतमाला के निकट फैला हुआ है।

विशेषताएँ:

6. मेघालय का पठार

मेघालय राज्य में स्थित यह पठार गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियों से मिलकर बना है।

विशेषताएँ:

7. कर्नाटक का पठार

दक्षिण भारत में स्थित यह पठार दक्कन पठार का हिस्सा है।

विशेषताएँ:

भारत के पठारों का महत्व

पठारों से जुड़ी चुनौतियाँ

निष्कर्ष

भारत के प्रमुख पठार देश की प्राकृतिक और आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। दक्कन, छोटानागपुर, मालवा, बुंदेलखंड, बघेलखंड, कर्नाटक और मेघालय के पठार अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना, खनिज संपदा और कृषि क्षमता के कारण विशेष महत्व रखते हैं। इन पठारों का संतुलित विकास और पर्यावरण संरक्षण भारत की सतत प्रगति के लिए आवश्यक है।

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