
भारत और मोरक्को के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में 24-25 अगस्त 2026 की केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की मोरक्को यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के दौरान भारत-मोरक्को संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों ने व्यापार और निवेश के साथ-साथ कृषि, उर्वरक, औषधि, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, मोरक्को अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहकर व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी का आधार बन सकता है।
संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा
भारत-मोरक्को संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक 24 और 25 अगस्त को मोरक्को में आयोजित हुई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया, जबकि मोरक्को की ओर से विदेश व्यापार के प्रभारी मंत्री ओमर हिज़ीरा ने प्रतिनिधित्व किया।
बैठक का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाना, नए बाजारों की तलाश करना और निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना रहा। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक व्यापारिक क्षेत्रों के अलावा आधुनिक तकनीक, हरित ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भी साझेदारी का विस्तार किया जाना चाहिए।
उर्वरक क्षेत्र में भारत-मोरक्को की साझेदारी अहम
भारत और मोरक्को के आर्थिक संबंधों में उर्वरक क्षेत्र का विशेष महत्व है। मोरक्को फॉस्फेट संसाधनों के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है, जबकि भारत अपनी कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करता है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच उर्वरक क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। आपूर्ति श्रृंखला को अधिक स्थिर बनाने और किसानों के लिए आवश्यक कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने में इस साझेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत के लिए मोरक्को के साथ संबंध केवल व्यापारिक लाभ का विषय नहीं हैं, बल्कि खाद्य एवं कृषि सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं।
भारतीय दवा उद्योग के लिए मोरक्को में अवसर
औषधि और स्वास्थ्य सेवा भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहे। भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग दुनिया के कई देशों में किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति करता है। मोरक्को में भारतीय दवा कंपनियों के लिए बाजार विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं।
दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दवाओं के साथ-साथ चिकित्सा तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित उद्योगों में भी साझेदारी विकसित हो सकती है। इससे भारतीय कंपनियों को उत्तरी अफ्रीकी बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा में साझेदारी की संभावना
जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के बीच भारत और मोरक्को के लिए अक्षय ऊर्जा सहयोग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। दोनों देशों में सौर ऊर्जा के विकास की अच्छी संभावनाएं हैं और पवन ऊर्जा भी भविष्य की ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।
सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं, तकनीकी ज्ञान, निवेश और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है। भारत अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है, वहीं मोरक्को भी स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रहा है।
डिजिटल तकनीक और नवाचार पर भी जोर
आर्थिक सहयोग का स्वरूप अब केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकी नवाचार वैश्विक व्यापार के प्रमुख आधार बन चुके हैं।
भारत की मजबूत आईटी क्षमता और डिजिटल समाधान विकसित करने का अनुभव मोरक्को के लिए उपयोगी हो सकता है। दोनों देशों के बीच डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप, तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग भविष्य में नई व्यावसायिक संभावनाएं पैदा कर सकता है।
कृषि और खाद्य सुरक्षा में सहयोग
भारत और मोरक्को के बीच कृषि क्षेत्र भी व्यापक सहयोग की संभावनाएं रखता है। बैठक में खाद्य सुरक्षा से जुड़े समझौते और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई। इसके तहत परीक्षण प्रयोगशालाओं, गुणवत्ता नियंत्रण तथा संबंधित तकनीकी जानकारी को साझा करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में इस प्रकार का सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच कृषि उत्पादों के व्यापार को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
2025 में करीब 4 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार
भारत और मोरक्को के बीच आर्थिक संबंधों का आधार पहले से मजबूत है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास रहा।
भारत की ओर से मोरक्को को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, औषधियां, वाहन, कपड़ा, खाद्य सामग्री और मसाले सहित कई उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। दूसरी ओर, मोरक्को से भारत को मुख्य रूप से फॉस्फेट और उर्वरक प्राप्त होते हैं।
भविष्य में व्यापारिक संबंधों को और संतुलित एवं विविध बनाने के लिए नए उत्पादों और सेवाओं को द्विपक्षीय व्यापार में शामिल करना महत्वपूर्ण होगा।
मोरक्को भारतीय कंपनियों के लिए रणनीतिक बाजार
मोरक्को की भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। यह देश अफ्रीकी बाजारों के साथ-साथ यूरोपीय बाजारों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए मोरक्को में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियां व्यापक क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने की संभावनाएं तलाश सकती हैं।
ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, ऊर्जा, आईटी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसी तरह मोरक्को की कंपनियों के लिए भी भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार आकर्षक है।
सांस्कृतिक संबंधों को भी मिली नई गति
आर्थिक साझेदारी के साथ दोनों देशों ने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया। वर्ष 2026 से 2030 तक सांस्कृतिक सहयोग के लिए कार्यक्रमों की दिशा में कलाकारों के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक उत्सवों में सहभागिता और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं।
सांस्कृतिक संपर्क किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते को दीर्घकालिक आधार प्रदान करते हैं। लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से दोनों देशों के समाज एक-दूसरे की परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
अफ्रीका नीति के संदर्भ में भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को व्यापक बनाने पर विशेष जोर दे रहा है। मोरक्को के साथ बढ़ता सहयोग इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
मोरक्को उत्तरी अफ्रीका में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। व्यापार, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीक में सहयोग बढ़ाकर भारत अफ्रीकी महाद्वीप के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।
वहीं, मोरक्को के लिए भारत एक बड़ा बाजार, तकनीकी साझेदार और निवेश का संभावित स्रोत है। इस तरह दोनों देशों के हित कई क्षेत्रों में एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई देते हैं।
2027 की वर्षगांठ से पहले बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
भारत और मोरक्को वर्ष 2027 में अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में उच्चस्तरीय बातचीत और संयुक्त आयोग की बैठक द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने का अवसर प्रदान करती है।
आने वाले समय में यदि व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर ठोस प्रगति होती है, तो दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते मौजूदा स्तर से काफी आगे जा सकते हैं।
निष्कर्ष
जितिन प्रसाद की मोरक्को यात्रा भारत और मोरक्को के बीच बढ़ते बहुआयामी संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक ने स्पष्ट किया कि दोनों देश अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर निवेश, कृषि, उर्वरक, स्वास्थ्य, अक्षय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
भारत के लिए मोरक्को अफ्रीकी और यूरोपीय बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपर्क बिंदु बन सकता है, जबकि मोरक्को के लिए भारत तकनीक, निवेश, दवा, उद्योग और बड़े उपभोक्ता बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार है।
यदि प्रस्तावित सहयोग को व्यावहारिक परियोजनाओं और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी में बदला जाता है, तो आने वाले वर्षों में भारत-मोरक्को संबंध केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी का रूप ले सकते हैं।
