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वंदे मातरम् को लेकर BJP का बड़ा प्रस्ताव, कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले पर जताई आपत्ति

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नई दिल्ली: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा ने शनिवार को पार्टी की बैठक में राष्ट्रीय गीत के पूर्ण स्वरूप और उसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने कांग्रेस के उस फैसले की आलोचना की, जिसके तहत उसके कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाने की बात कही गई है।

भाजपा ने अपने प्रस्ताव में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे देश की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़े हुए हैं। पार्टी ने इस गीत के ऐतिहासिक महत्व और सम्मान की रक्षा करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

नितिन नवीन की अध्यक्षता में बैठक

यह प्रस्ताव भाजपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान पारित किया गया। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की। बैठक में शामिल नेताओं ने सभी छह अंतरों का सामूहिक रूप से गायन भी किया।

भाजपा का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को प्रेरित करने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय भावना का प्रतीक रहा है।

कांग्रेस के फैसले पर भाजपा का विरोध

भाजपा ने कांग्रेस के दो अंतरे गाने के निर्णय को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत को सीमित करने का प्रयास उसके ऐतिहासिक महत्व को प्रभावित करता है।

भाजपा के प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ‘वंदे मातरम्’ को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या वोट बैंक की राजनीति के आधार पर देखने का विरोध किया जाएगा।

देशभर में अभियान चलाने की तैयारी

भाजपा ने ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने की घोषणा भी की है। पार्टी का विशेष जोर युवा पीढ़ी को इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विरासत से परिचित कराने पर रहेगा।

इस अभियान के जरिए भाजपा ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश में व्यापक जनजागरूकता पैदा करने की कोशिश करेगी।

राजनीतिक बहस का नया केंद्र बना राष्ट्रीय गीत

‘वंदे मातरम्’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद नया नहीं है। दोनों दल इसके ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों को अलग-अलग तरीके से देखते रहे हैं। हाल के दिनों में भी कांग्रेस के कार्यक्रमों में गीत के शुरुआती दो अंतरों के इस्तेमाल को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से इसके पीछे ऐतिहासिक और परंपरागत कारण बताए जाते रहे हैं।

‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी भावना का प्रमुख प्रतीक बना। भारत में ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।

युवाओं तक इतिहास पहुंचाने पर जोर

भाजपा के प्रस्ताव में युवा पीढ़ी के बीच ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास और महत्व को पहुंचाने पर खास जोर दिया गया है। पार्टी का मानना है कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय प्रतीकों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों की जानकारी होना जरूरी है।

देशव्यापी अभियान के जरिए भाजपा स्कूलों, युवाओं और आम नागरिकों के बीच इस विषय को चर्चा का हिस्सा बनाने की तैयारी में है।

आगे और बढ़ सकती है सियासी गर्मी

भाजपा के प्रस्ताव के बाद ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। एक ओर भाजपा पूर्ण स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत को लेकर अभियान की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस पहले दो अंतरों के इस्तेमाल को लेकर अपने ऐतिहासिक तर्क सामने रखती रही है।

ऐसे में राष्ट्रीय गीत को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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