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भारत की मेजबानी में आज होगी 12वीं BRICS संचार मंत्रियों की बैठक, डिजिटल सहयोग पर रहेगा जोर

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नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026। भारत अपनी वर्ष 2026 की BRICS अध्यक्षता के तहत आज, 21 अगस्त को 12वीं BRICS Communications Ministers Meeting की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक डिजिटल तकनीक, संचार व्यवस्था और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में BRICS सदस्य देशों के संचार मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), डिजिटल परिवर्तन, नवाचार तथा मजबूत और टिकाऊ डिजिटल बुनियादी ढांचे को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रही इस बैठक का उद्देश्य केवल तकनीकी विषयों पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करना भी है। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में इंटरनेट कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और नई पीढ़ी के संचार नेटवर्क जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में BRICS मंच पर इन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश अहम मानी जा रही है।

पुणे में हुआ BRICS ICT ट्रैक का आयोजन

12वीं संचार मंत्रियों की बैठक से पहले भारत ने पुणे में 17 से 21 अगस्त तक BRICS ICT Track का आयोजन किया। इसका नेतृत्व दूरसंचार विभाग ने किया। पांच दिवसीय कार्यक्रम में BRICS देशों के सरकारी प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों ने डिजिटल तकनीक और संचार क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

इस पूरे ICT Track की थीम “Innovate, Cooperate and Transform (ICT) for a Resilient Future” रखी गई है। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसा डिजिटल वातावरण विकसित करना है, जो सुरक्षित, समावेशी, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के प्रति मजबूत हो।

बैठक से पहले 17 से 19 अगस्त तक BRICS Working Group for Cooperation in ICTs की बैठक हुई। इसमें डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल कौशल, नवाचार, स्टार्टअप, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे सहित कई विषयों पर विचार हुआ।

डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान

आज की अर्थव्यवस्था में डिजिटल बुनियादी ढांचा विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, व्यापार और संचार से लेकर उद्योग तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट और डिजिटल प्रणालियों पर निर्भर है।

BRICS देशों के बीच डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर सहयोग से उन देशों को भी लाभ मिल सकता है जहां अभी उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सेवाओं की पहुंच पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। बैठक में भरोसेमंद, सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर विचार होने की उम्मीद है।

भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे यानी Digital Public Infrastructure (DPI) के क्षेत्र में अपने अनुभव को भी BRICS साझेदारों के साथ साझा किया है। पुणे में हुई ICT Working Group की चर्चा के दौरान भारत ने अपने DPI मॉडल से जुड़े अनुभव प्रस्तुत किए और BRICS Digital Public Infrastructure Repository तथा संभावित पायलट परियोजनाओं से संबंधित विचार भी सामने रखे।

साइबर सुरक्षा बनेगी अहम मुद्दा

डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है। सरकारी संस्थानों, कंपनियों और आम नागरिकों से जुड़े डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा लगातार मौजूद रहता है। ऐसे में सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल वातावरण तैयार करना BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गया है।

बैठक में Cybersecurity and Trustworthy ICT से संबंधित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। सदस्य देशों के बीच अनुभव और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने से साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

साइबर सुरक्षा का मुद्दा केवल तकनीकी नहीं बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। डिजिटल भुगतान, दूरसंचार नेटवर्क, सरकारी डेटाबेस और महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता जा रहा है।

नई तकनीकों पर बढ़ेगा सहयोग

बैठक में उभरती तकनीकों पर भी विशेष ध्यान रहेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अगली पीढ़ी के संचार नेटवर्क और डिजिटल अनुप्रयोगों जैसी तकनीकों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।

BRICS देशों के बीच इन तकनीकों को लेकर सहयोग बढ़ने से शोध, नवाचार और तकनीकी क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए भी साझा पहल की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। ICT Track में innovation, startups और entrepreneurship को सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

भारत के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सेवाओं, डिजिटल भुगतान और सार्वजनिक डिजिटल प्रणालियों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। BRICS मंच पर इन अनुभवों को साझा करने से अन्य विकासशील देशों के साथ तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।

डिजिटल कौशल और क्षमता निर्माण भी एजेंडे में

तकनीक का विकास तभी व्यापक लाभ पहुंचा सकता है जब लोगों के पास उसका इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक डिजिटल कौशल हो। इसी वजह से BRICS ICT Track में digital skilling और capacity building को भी प्रमुख क्षेत्र बनाया गया है।

विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने डिजिटल क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की चुनौती है। यदि BRICS देश प्रशिक्षण, ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो युवाओं और तकनीकी पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

बैठक में भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से संबंधित सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

डिजिटल BRICS फोरम और एक्सपो ने बनाया माहौल

संचार मंत्रियों की बैठक से पहले 20 अगस्त को पुणे में Digital BRICS Forum and Expo का आयोजन किया गया। इसमें सरकार, उद्योग, अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप और शोध संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एक्सपो में उभरती डिजिटल तकनीकों और मजबूत ICT इकोसिस्टम से संबंधित समाधानों को प्रदर्शित किया गया।

इस आयोजन ने सदस्य देशों के बीच तकनीकी अनुभव साझा करने और संभावित सहयोग के लिए एक मंच उपलब्ध कराया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि BRICS के डिजिटल सहयोग को केवल सरकारी बैठकों तक सीमित रखने के बजाय उद्योग और नवाचार के क्षेत्र से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बैठक?

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता की व्यापक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। ICT Track की थीम भी इसी दृष्टिकोण को डिजिटल क्षेत्र से जोड़ती है।

भारत इस बैठक के माध्यम से डिजिटल तकनीक को आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है। खासतौर पर Global South के देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और किफायती कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग उपयोगी साबित हो सकता है।

पिछली 11वीं BRICS Communications Ministers Meeting 2025 में ब्राजील की अध्यक्षता के दौरान हुई थी। उस बैठक में ICT, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक डिजिटल शासन के क्षेत्र में निरंतर सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया था। भारत की मौजूदा बैठक उन प्रयासों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही है।

भविष्य की डिजिटल साझेदारी की दिशा तय करने का अवसर

21 अगस्त की बैठक से निकलने वाले विचार और संभावित फैसले BRICS देशों के बीच डिजिटल सहयोग की भविष्य की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। मजबूत डिजिटल नेटवर्क, सुरक्षित ICT व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कौशल, नई तकनीकों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर सहयोग आने वाले वर्षों में सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, भारत में आयोजित 12वीं BRICS Communications Ministers Meeting को डिजिटल क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को नई गति देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। बदलती तकनीकी परिस्थितियों के बीच BRICS देशों के लिए साझा अनुभव, विशेषज्ञता और नवाचार को एक मंच पर लाना महत्वपूर्ण है। भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक एक ऐसे डिजिटल भविष्य की दिशा में सहयोग बढ़ाने का प्रयास है, जो सुरक्षित, समावेशी, टिकाऊ, नवाचारी और मजबूत हो।

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