
गोंडा: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योगगुरु बाबा रामदेव पर तीखा हमला बोला है। गोंडा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रामदेव के स्वदेशी अभियान, उनके कारोबारी विस्तार और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठाए। बृजभूषण के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
बृजभूषण शरण सिंह ने आरोप लगाया कि स्वदेशी के नाम से शुरू हुआ अभियान अब कई तरह के उत्पादों के कारोबार तक पहुंच चुका है। उन्होंने रामदेव को मिलावटी खाद्य पदार्थों के मुद्दे पर आंदोलन करने की चुनौती भी दी और कहा कि यदि वह आंदोलन करते हैं तो इस बार उन्हें मजबूती से मैदान में टिकना चाहिए। उनके बयान में रामदेव के पुराने आंदोलन का संदर्भ लेते हुए व्यक्तिगत तंज भी शामिल था।
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर चिंता
बृजभूषण ने अपने संबोधन में नकली घी, तेल, मावा, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की समस्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश में मिलावट के खिलाफ व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जाए तो इसके बड़े प्रभाव सामने आ सकते हैं।
उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे केवल सरकारी कार्रवाई पर निर्भर न रहें, बल्कि यह समझने की कोशिश करें कि उनके घरों में किस प्रकार के खाद्य पदार्थ पहुंच रहे हैं। इस तरह उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता को भी इस मुद्दे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
रामदेव के स्वदेशी अभियान पर निशाना
बृजभूषण ने कहा कि रामदेव ने शुरुआत में स्वदेशी को केंद्र में रखकर अभियान चलाया था, लेकिन अब उनका कारोबारी दायरा काफी व्यापक हो चुका है। उन्होंने इसी संदर्भ में रामदेव के उत्पादों और कारोबारी गतिविधियों पर तंज कसा।
उनका कहना था कि रामदेव अब केवल आध्यात्मिक या योग गुरु की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक बड़े कारोबारी के रूप में भी स्थापित हो चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें रामदेव के साधु या बाबा के रूप में रहने वाले पहनावे से व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है।
आंदोलन को लेकर भी कसा तंज
बृजभूषण ने रामदेव के पुराने आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह मिलावट के खिलाफ आंदोलन शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें इस बार मजबूती से संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने आंदोलन के दौरान रामदेव के भेष बदलकर निकलने की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की।
इस टिप्पणी का राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों तरह का असर दिखाई दे रहा है, क्योंकि बृजभूषण ने रामदेव की आंदोलन क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं।
कैंसर को लेकर गंभीर दावा
बृजभूषण ने मिलावटी खाद्य पदार्थों और स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि गांव-गांव में कैंसर के मरीज दिखाई दे रहे हैं और खाद्य मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
हालांकि, रामदेव के उत्पादों को सीधे तौर पर कैंसर या मौतों का कारण बताने वाले ऐसे आरोपों को बृजभूषण शरण सिंह का दावा ही माना जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र चिकित्सकीय या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं दिखाई गई है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। इससे पहले भी वह नकली पनीर, मावा और अन्य डेयरी उत्पादों के खिलाफ अभियान की मांग कर चुके हैं।
दूध की उपलब्धता और मिलावट का मुद्दा
बृजभूषण ने देश में दूध की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाया। उनका तर्क था कि वास्तविक दूध की उपलब्धता और बाजार में मौजूद दूध तथा दूध से बने उत्पादों की मात्रा के बीच अंतर को समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि नकली या एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना होगा। सरकार की ओर से एनालॉग डेयरी उत्पादों और खाद्य मिलावट पर उठाए जा रहे कदमों की चर्चा भी इस संदर्भ में हुई।
सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल
बृजभूषण ने कहा कि खाद्य मिलावट जैसी समस्या से निपटने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं हो सकती। उनके मुताबिक उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतनी होगी और यह देखना होगा कि वे क्या खरीद और खा रहे हैं।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा से जुड़े दावों को प्रमाणित करने के लिए सरकारी जांच और वैज्ञानिक परीक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।
उमाशंकर सिंह के निधन पर जताया दुख
बृजभूषण शरण सिंह ने बसपा के वरिष्ठ नेता और रसड़ा से विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त 2026 को लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ था। वह 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद बसपा के इकलौते विधायक बने थे।
बृजभूषण ने उमाशंकर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए उन्हें मेहनती और जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन अच्छे व्यक्तिगत संबंध और सार्वजनिक जीवन की यादें बनी रहती हैं।
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के कई राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया से रहे दूर
कार्यक्रम के दौरान जब बृजभूषण से अखिलेश यादव के जयंत चौधरी को लेकर दिए गए बयान और मायावती की टिप्पणी जैसे राजनीतिक विषयों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने इन मुद्दों पर विस्तार से टिप्पणी करने से दूरी बनाए रखी।
इस तरह उनका ताजा संबोधन मुख्य रूप से खाद्य मिलावट, रामदेव के आंदोलन और उमाशंकर सिंह की यादों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा।
बयान से बढ़ी सियासी हलचल
बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं। इस बार बाबा रामदेव पर उनकी टिप्पणियों ने खाद्य मिलावट, स्वदेशी अभियान और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे मुद्दों को एक बार फिर सार्वजनिक बहस में ला दिया है।
हालांकि, रामदेव और उनके उत्पादों पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच, प्रमाणित परीक्षण और संबंधित संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकता है। फिलहाल बृजभूषण का बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और खाद्य सुरक्षा को लेकर जारी बहस का हिस्सा है।
