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चित्रकूट के रामनगर में दिव्यांग बच्चों के शिविर में अव्यवस्था का आरोप, समय से पहले कुछ जिम्मेदार लोगों के चले जाने से परेशान हुए अभिभावक

चित्रकूट, 18 अगस्त 2026। लवलेश कुमार रिपोर्टर चित्रकूट

चित्रकूट जिले के रामनगर ब्लॉक स्थित संसाधन केंद्र (बी.आर. सी. केंद्र) में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आयोजित विशेष पंजीकरण एवं परीक्षण शिविर में अव्यवस्थाओं का मामला सामने आया है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से अपने दिव्यांग बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिविर के निर्धारित समय के दौरान ही कुछ जिम्मेदार लोग वहां से चले गए। इसके चलते कई बच्चों और उनके परिजनों की आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

बताया गया कि शिविर का आयोजन दिव्यांग विद्यार्थियों से संबंधित पंजीकरण, परीक्षण, दस्तावेजों के सत्यापन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में सहायता के उद्देश्य से किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए ऐसे शिविर इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि उन्हें इन कार्यों के लिए बार-बार दूर स्थित सरकारी कार्यालयों तक जाना पड़ता है।

निर्धारित समय से पहले कुछ लोगों के चले जाने का आरोप

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शिविर का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बताया गया था। अभिभावकों का आरोप है कि दोपहर करीब 2 बजे के बाद कुछ जिम्मेदार लोग वहां से चले गए, जबकि कई परिवार अपने बच्चों के साथ अपनी बारी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे।

लोगों का कहना है कि वे निर्धारित समय को ध्यान में रखते हुए काफी दूरी से रामनगर पहुंचे थे। कुछ अभिभावकों ने यात्रा में समय और पैसा खर्च किया था तथा बच्चों के जरूरी दस्तावेज भी साथ लेकर आए थे। ऐसे में संबंधित लोगों के उपलब्ध नहीं रहने के कारण उनका काम अधूरा रह गया।

दूर-दराज से बच्चों को लेकर पहुंचे थे अभिभावक

ग्रामीण क्षेत्रों से कई अभिभावक अपने दिव्यांग बच्चों को लेकर संसाधन केंद्र पहुंचे थे। कुछ परिवारों के लिए रामनगर तक पहुंचना ही काफी कठिन था। इसके बावजूद उन्होंने सरकारी शिविर में निर्धारित प्रक्रिया पूरी कराने की उम्मीद में यात्रा की।

अभिभावकों के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि शिविर में पहुंचने के बाद पंजीकरण, दस्तावेज सत्यापन और परीक्षण जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं एक ही स्थान पर पूरी हो जाएंगी। लेकिन कुछ जिम्मेदार लोगों के समय से पहले चले जाने की शिकायत के बाद कई परिवारों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल सकी।

ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नहीं हुआ काम

शिविर में पहुंचे एक दिव्यांग विद्यार्थी ने बताया कि उसने संबंधित प्रक्रिया पहले ही ऑनलाइन पूरी कर ली थी। आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और आगे की प्रक्रिया के लिए वह संसाधन केंद्र पहुंचा था।

काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी संबंधित अधिकारी अथवा आवश्यक विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका काम पूरा नहीं हो सका। आखिरकार उसे बिना प्रक्रिया पूरी कराए वापस लौटना पड़ा।

परिवारों का कहना है कि जब ऑनलाइन प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी हो और केवल निर्धारित केंद्र पर आवश्यक सत्यापन या परीक्षण होना बाकी हो, तब इस तरह की स्थिति से बच्चों और अभिभावकों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर भी सवाल

अभिभावकों ने शिविर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों से संबंधित परीक्षण और प्रमाण-पत्र प्रक्रिया में विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

लोगों का आरोप है कि जिस समय वे अपने बच्चों को लेकर प्रक्रिया पूरी कराने पहुंचे, उस समय आवश्यक लोगों की उपलब्धता नहीं रही। इसके कारण कई बच्चों का काम आगे नहीं बढ़ सका।

हालांकि, विशेषज्ञों या संबंधित कर्मचारियों की अनुपस्थिति के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

भीषण गर्मी में घंटों इंतजार से बढ़ी परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले परिवारों ने बताया कि वे बच्चों को लेकर काफी समय से शिविर में मौजूद थे। गर्मी और आने-जाने की कठिनाइयों के बीच छोटे तथा दिव्यांग बच्चों के साथ घंटों इंतजार करना उनके लिए परेशानी भरा रहा।

अभिभावकों का कहना है कि सरकारी शिविर का उद्देश्य लोगों को उनके क्षेत्र के नजदीक सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि निर्धारित समय में संबंधित कर्मचारी या विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं रहते हैं तो दूर से आने वाले परिवारों को दोबारा यात्रा करनी पड़ सकती है।

अभिभावकों में नाराजगी

मामले को लेकर कई अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दी। उनका कहना है कि दिव्यांग बच्चों के लिए सरकारी स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाते हैं, ताकि उन्हें प्रमाण-पत्र, पंजीकरण और विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में आसानी हो।

लेकिन यदि शिविर में जिम्मेदार लोगों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाती तो इसका सबसे अधिक नुकसान उन्हीं परिवारों को उठाना पड़ता है, जिन्हें सरकारी सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और यह पता लगाया जाए कि निर्धारित समय के दौरान कुछ जिम्मेदार लोग वहां से क्यों चले गए तथा जिन बच्चों का काम अधूरा रह गया, उनकी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।

जिला प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित अभिभावकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिविर संचालन में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

साथ ही, जिन दिव्यांग बच्चों और विद्यार्थियों की प्रक्रिया अधूरी रह गई है, उनके लिए जल्द ही दोबारा अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि परिवारों को फिर से लंबी दूरी तय करके परेशानी न उठानी पड़े।

सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचना जरूरी

दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित पंजीकरण और परीक्षण शिविरों का उद्देश्य सरकारी सुविधाओं को जरूरतमंद परिवारों तक आसानी से पहुंचाना है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए ऐसे शिविर काफी उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि शिविर के निर्धारित समय में संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और विशेषज्ञ अपनी जिम्मेदारी के अनुसार उपलब्ध रहें। यदि किसी कारण से किसी अधिकारी या विशेषज्ञ की उपलब्धता संभव नहीं है, तो परिवारों को समय रहते जानकारी देना भी जरूरी है।

इससे लोगों का समय और पैसा बच सकता है तथा उन्हें अनावश्यक रूप से दोबारा यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

अब प्रशासन के स्पष्टीकरण का इंतजार

रामनगर के संसाधन केंद्र में आयोजित शिविर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन दिव्यांग बच्चों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, उनके लिए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

साथ ही, भविष्य में आयोजित होने वाले ऐसे शिविरों में निर्धारित समय तक संबंधित कर्मचारियों और विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी मजबूत की जाए।

दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर समय से मिलना सबसे महत्वपूर्ण है। रामनगर की इस शिकायत के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा और जरूरतमंद परिवारों की लंबित प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने की दिशा में कदम उठाएगा।


स्थान: चित्रकूट, उत्तर प्रदेश

नोट: इस खबर में शिविर की व्यवस्थाओं, कुछ जिम्मेदार लोगों के निर्धारित समय से पहले चले जाने और विशेषज्ञों की उपलब्धता से संबंधित बातें अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग या जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर खबर को उसके अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए।

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