नई दिल्ली, 29 जुलाई: दिल्ली हाई कोर्ट ने संसद मार्ग थाना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दायर याचिका का निस्तारण कर दिया। यह याचिका इस आरोप के साथ दायर की गई थी कि संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ने एक लिखित शिकायत प्राप्त होने के बावजूद उसकी आधिकारिक रसीद (Acknowledgement) जारी नहीं की। अदालत में दिल्ली पुलिस की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद कि शिकायतकर्ता को डेली डायरी (DD) नंबर सहित रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी, न्यायालय ने मामले को समाप्त मानते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 20 जुलाई को आयोजित सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित रूप से जरूरत से अधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया था। इस घटना के संबंध में शिकायतकर्ता ने 23 जुलाई को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि शिकायत जमा करने के बावजूद पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की कोई आधिकारिक रसीद या डीडी नंबर उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा।
अदालत में दिल्ली पुलिस का पक्ष
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एकल पीठ के समक्ष हुई। दिल्ली पुलिस की ओर से केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिकायत की रसीद जारी न हो पाने का कारण तकनीकी समस्या थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायतकर्ता को उसी दिन डेली डायरी नंबर सहित आधिकारिक रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी और वह इसे संसद मार्ग पुलिस स्टेशन से प्राप्त कर सकता है।
पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
याचिका में कहा गया था कि पुलिस ने शिकायत स्वीकार करने के बावजूद उसकी विधिवत रसीद जारी नहीं की, जबकि शिकायत संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) से संबंधित थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि उसने पुलिस हेल्पलाइन और संबंधित थाना प्रभारी (SHO) से भी संपर्क किया, लेकिन इसके बावजूद उसे डीडी नंबर सहित कोई आधिकारिक पावती नहीं मिली।
याचिका में यह भी कहा गया कि शिकायत की रसीद न मिलने से नागरिकों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होती है और न्याय पाने का अधिकार कमजोर पड़ता है।
अदालत से क्या मांग की गई थी?
याचिका में केवल शिकायत की रसीद जारी कराने की मांग ही नहीं की गई थी, बल्कि व्यापक स्तर पर पुलिस व्यवस्था में सुधार की भी मांग उठाई गई थी। इसमें अदालत से अनुरोध किया गया था कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि—
- हर लिखित शिकायत पर अनिवार्य रूप से डीडी नंबर सहित रसीद जारी की जाए।
- चाहे एफआईआर तुरंत दर्ज हो या प्रारंभिक जांच की जाए, शिकायतकर्ता को लिखित पावती अवश्य मिले।
- सभी पुलिस थानों के लिए एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और सिटिजन चार्टर तैयार किया जाए ताकि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि किसी शिकायत में संज्ञेय अपराध की जानकारी दी जाती है तो पुलिस का कर्तव्य है कि वह कानून के अनुसार कार्रवाई करे। शिकायत स्वीकार करने की पुष्टि न देना नागरिकों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के विपरीत माना जा सकता है।
शिकायत की रसीद क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी लिखित शिकायत की आधिकारिक रसीद केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं होती, बल्कि यह इस बात का प्रमाण होती है कि शिकायत संबंधित पुलिस स्टेशन में प्राप्त हो चुकी है। डीडी नंबर के माध्यम से शिकायत की स्थिति का पता लगाया जा सकता है और यदि आगे कोई कार्रवाई नहीं होती तो शिकायतकर्ता अदालत या उच्च अधिकारियों के समक्ष अपने अधिकारों का दावा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायत प्राप्त होने की लिखित पुष्टि नागरिकों और पुलिस प्रशासन के बीच विश्वास बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में संकेत
हालांकि इस मामले में अदालत ने पुलिस के आश्वासन के बाद याचिका का निस्तारण कर दिया, लेकिन इसने पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया है। यदि सभी पुलिस थानों में शिकायतों की डिजिटल और लिखित पावती की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।
निष्कर्ष
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले ने यह स्पष्ट किया कि नागरिकों की शिकायतों के उचित रिकॉर्ड और उनकी आधिकारिक पावती का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने पुलिस के आश्वासन के आधार पर याचिका समाप्त कर दी, लेकिन यह मामला पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों को भी उजागर करता है। भविष्य में यदि शिकायतों की रसीद जारी करने की प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इससे आम लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में अधिक भरोसा और सुविधा मिल सकेगी।

