नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: राजधानी दिल्ली के मौजपुर इलाके में एक निजी प्ले स्कूल में करीब साढ़े तीन साल के बच्चे के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि स्कूल में बच्चे के साथ कई दिनों तक मारपीट की गई और उसे लंबे समय तक कुर्सी से बांधकर रखा गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब बच्चे के माता-पिता ने उसके व्यवहार और शरीर पर चोट के निशान देखकर स्कूल से CCTV फुटेज मांगी। फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और एक महिला कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल परिसर को सील करने के निर्देश दिए हैं।
बच्चे के व्यवहार में आया अचानक बदलाव
मामला सामने आने से पहले बच्चे के माता-पिता ने उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किए। रिपोर्टों के अनुसार बच्चा स्कूल जाने के नाम से घबराने लगा था और रात में परेशान होकर रोता था। परिवार को उसके शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दिए। इसके बाद माता-पिता ने चिकित्सकीय जांच कराई। रिपोर्टों में कान के आसपास सूजन और चेहरे तथा हाथों पर चोट के निशान का उल्लेख किया गया है।
बच्चे की स्थिति को देखते हुए परिवार को संदेह हुआ कि स्कूल में उसके साथ कुछ गलत हुआ हो सकता है। इसके बाद बच्चे के पिता ने स्कूल प्रशासन से CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की। यही फुटेज आगे चलकर पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन गई।
CCTV फुटेज से सामने आई कथित ज्यादती
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल से प्राप्त CCTV रिकॉर्डिंग में बच्चे के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार के दृश्य दिखाई दिए। आरोप है कि बच्चे को कुर्सी से बांधा गया और उसके साथ शारीरिक हिंसा की गई। कुछ रिपोर्टों में बच्चे के कान खींचने और उसे मारने की बात भी सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार CCTV में 16, 17 और 18 अगस्त की रिकॉर्डिंग की जांच की गई। आरोप है कि कुछ मौकों पर बच्चे को काफी देर तक कुर्सी से बांधकर रखा गया। एक रिपोर्ट के अनुसार 18 अगस्त को बच्चे को सुबह करीब 9:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कुर्सी से बांधे जाने का आरोप है। इन दावों की पुष्टि और घटना की पूरी परिस्थितियों का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि प्ले स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बहुत कम उम्र के होते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन तथा कर्मचारियों पर होती है।
माता-पिता की शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई
बच्चे के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। रिपोर्टों के मुताबिक FIR में स्कूल के कर्मचारी, शिक्षक, प्रिंसिपल और निदेशक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने एक 35 वर्षीय महिला अटेंडेंट को गिरफ्तार किया है, जबकि एक शिक्षिका से पूछताछ और जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। पुलिस CCTV रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे के साथ वास्तव में क्या हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
दिल्ली सरकार ने लिया सख्त कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री की ओर से स्कूल परिसर को सील करने के निर्देश दिए गए। सरकार ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों ने स्कूल परिसर का निरीक्षण भी किया। इस निरीक्षण में कथित तौर पर बच्चों की सुरक्षा और भवन संबंधी कई कमियां सामने आईं।
स्कूल में सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप
मामले की जांच के दौरान सामने आई एक अन्य महत्वपूर्ण बात स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। अधिकारियों के निरीक्षण में कथित तौर पर आपातकालीन निकास मार्गों के अवरुद्ध होने और अग्निशमन उपकरणों के ठीक स्थिति में न होने जैसी कमियां पाई गईं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और भवन से संबंधित कुछ जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
एक छोटे बच्चे के लिए संचालित संस्थान में इस तरह की सुरक्षा संबंधी कमियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बच्चों के स्कूल और डे-केयर केंद्रों में केवल शिक्षण व्यवस्था ही नहीं, बल्कि भवन की सुरक्षा, आपातकालीन निकास, अग्निशमन व्यवस्था और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल
इस घटना ने स्कूल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि CCTV में कथित घटनाएं कई दिनों तक दर्ज हुईं, तो यह जांच का विषय है कि स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और बच्चों की निगरानी से जुड़े नियमों का पालन किस स्तर तक किया गया था।
मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और निदेशक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह निर्धारित करेगी कि कथित घटना में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जिम्मेदारी थी या नहीं। फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
छोटे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ी चिंता
मौजपुर की घटना ने दिल्ली समेत पूरे देश में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल और डे-केयर केंद्रों में इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वहां उनकी देखभाल सुरक्षित वातावरण में होगी। इतनी कम उम्र के बच्चे अक्सर अपने साथ हुई किसी घटना को स्पष्ट रूप से बता भी नहीं पाते। ऐसे में उनके व्यवहार में अचानक बदलाव, स्कूल जाने से डरना, लगातार रोना या शारीरिक चोट जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
स्कूलों में बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर शारीरिक हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को संवेदनशील व्यवहार और बाल सुरक्षा के मानकों के बारे में उचित प्रशिक्षण मिलना भी जरूरी है।
जांच से सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, अभिभावकों के बयान और स्कूल कर्मचारियों से पूछताछ जैसे साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
दिल्ली सरकार द्वारा स्कूल को सील किए जाने और सुरक्षा संबंधी कमियों की जांच से यह संकेत मिलता है कि मामला केवल कथित मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान की समग्र सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
मौजपुर का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अभिभावकों, प्रशासन और संबंधित नियामक संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। किसी भी शिक्षण या डे-केयर संस्थान में बच्चों की सुरक्षा से समझौता होने पर समय रहते कार्रवाई आवश्यक है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले में जिम्मेदार कौन-कौन लोग थे और बच्चे को कथित रूप से किस परिस्थिति का सामना करना पड़ा।
