
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई फेम इंडिया योजना चरण-2 (FAME India Scheme Phase-II) ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना का उद्देश्य देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था।
सरकार ने फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण को 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक पांच वर्षों के लिए लागू किया। इसके लिए कुल 11,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया था। योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों को प्रोत्साहन देने के अलावा इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई गई।
फेम इंडिया योजना क्या है?
भारत में परिवहन क्षेत्र को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने फेम यानी Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India पहल शुरू की थी। इसका मूल उद्देश्य इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देना तथा पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करने की दिशा में काम करना था।
योजना के दूसरे चरण में केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीद को प्रोत्साहन देना ही लक्ष्य नहीं था। इसके साथ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया।
किसी भी देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए केवल वाहन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। चार्जिंग की सुविधा, सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी और विनिर्माण क्षमता भी जरूरी होती है। फेम इंडिया चरण-2 में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया।
11,500 करोड़ रुपये का बजट
फेम इंडिया योजना चरण-2 के लिए सरकार ने 11,500 करोड़ रुपये का कुल बजटीय प्रावधान किया था। पांच साल की अवधि वाली इस योजना के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अलग-अलग हिस्सों को समर्थन देने की कोशिश की गई।
योजना का एक प्रमुख हिस्सा मांग को प्रोत्साहित करना था। इसके तहत पात्र इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की लागत को कम करने और उपभोक्ताओं को पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के विकल्प की ओर आकर्षित करना था।
ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू और ई-4डब्ल्यू पर जोर
फेम इंडिया चरण-2 के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की अलग-अलग श्रेणियों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई। इसमें ई-2डब्ल्यू यानी इलेक्ट्रिक दोपहिया, ई-3डब्ल्यू यानी इलेक्ट्रिक तिपहिया और ई-4डब्ल्यू यानी इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन शामिल रहे।
भारत जैसे बड़े और विविध बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का महत्व खास है। शहरों में रोजाना आने-जाने के लिए दोपहिया वाहनों का व्यापक इस्तेमाल होता है। इसलिए इलेक्ट्रिक स्कूटर और अन्य इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ने से व्यक्तिगत परिवहन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।
इसी तरह तिपहिया वाहन भी शहरी और अर्ध-शहरी परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन और अंतिम छोर की कनेक्टिविटी में उपयोगी हो सकता है।
इलेक्ट्रिक बसों को भी मिला समर्थन
योजना के तहत ई-बसों के लिए भी प्रोत्साहन और सहायता का प्रावधान किया गया। सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में बसों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक इलेक्ट्रिक बस बड़ी संख्या में यात्रियों को परिवहन सेवा दे सकती है।
शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण से ईंधन की खपत कम करने और परिवहन व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है।
फेम इंडिया चरण-2 में इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करना इस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा था, जिसमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रखा गया।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान
इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता के लिए चार्जिंग नेटवर्क का विकास सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। यदि किसी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहन तो उपलब्ध हों, लेकिन पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन न हों, तो उपभोक्ताओं के लिए उनका इस्तेमाल मुश्किल हो सकता है।
इसी जरूरत को देखते हुए फेम इंडिया चरण-2 के तहत EV Public Charging Stations यानी सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए भी सहायता दी गई।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं का भरोसा बढ़ सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से लंबी दूरी की यात्रा और दैनिक आवागमन दोनों में सुविधा बढ़ती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने की कोशिश
नई तकनीक को बाजार में स्थापित करने के शुरुआती चरण में मांग सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है। इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तुलना में अलग तकनीक पर आधारित होते हैं और उपभोक्ताओं को उनकी कीमत, रेंज, चार्जिंग समय तथा रखरखाव जैसी बातों को लेकर कई सवाल हो सकते हैं।
फेम इंडिया चरण-2 के तहत मांग आधारित प्रोत्साहन देकर इस शुरुआती बाधा को कम करने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य लोगों और संस्थागत खरीदारों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करना था।
जैसे-जैसे बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ती है, निर्माताओं के लिए उत्पादन बढ़ाने और नई तकनीक में निवेश करने के अवसर भी पैदा होते हैं।
विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण
फेम इंडिया योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्साहित करना था। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार केवल वाहनों की बिक्री पर निर्भर नहीं करता, बल्कि मजबूत घरेलू विनिर्माण व्यवस्था भी जरूरी है।
इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में वाहन के अलावा बैटरी, मोटर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, चार्जिंग उपकरण और अन्य तकनीकी घटकों की भी जरूरत होती है। इस पूरे इकोसिस्टम का विकास देश में रोजगार, निवेश और तकनीकी क्षमता के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्व
परिवहन क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ना ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम माना जाता है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार होने पर पेट्रोल और डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम करने की संभावना बनती है। साथ ही, यदि बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ती है, तो इलेक्ट्रिक परिवहन के पर्यावरणीय लाभ और व्यापक हो सकते हैं।
इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति को केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की नीति के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा, परिवहन और पर्यावरण से जुड़ी व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
आगे की चुनौती क्या है?
फेम इंडिया चरण-2 ने इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए आधार तैयार करने में भूमिका निभाई, लेकिन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार एक लंबी प्रक्रिया है। आगे भी चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता, बैटरी तकनीक, वाहन की कीमत, रेंज, बैटरी पुनर्चक्रण और उपभोक्ता भरोसे जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
साथ ही, अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में चार्जिंग सुविधाओं का समान विस्तार जरूरी होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ बिजली वितरण नेटवर्क पर पड़ने वाले प्रभाव और चार्जिंग व्यवस्था की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
फेम इंडिया योजना चरण-2 भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों में शामिल रही। 2019 से 2024 तक चली इस योजना के लिए 11,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया था।
योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक बसों तथा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी सहायता दी गई।
इस पहल का व्यापक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को भारतीय परिवहन व्यवस्था में अधिक स्वीकार्य बनाना और उनके लिए जरूरी इकोसिस्टम तैयार करना था। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार किस गति से होता है, यह वाहन तकनीक, चार्जिंग नेटवर्क, कीमत, उपभोक्ता मांग और सरकारी नीतियों के संयुक्त प्रभाव पर निर्भर करेगा।
फेम इंडिया चरण-2 ने जिस दिशा में आधार तैयार किया है, उसके आगे भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा अब अधिक व्यापक बाजार, बेहतर बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण क्षमता के विकास पर केंद्रित हो सकती है।
