मध्य प्रदेश में मूंग उत्पादक किसानों ने राज्य सरकार से मूंग खरीद के लक्ष्य को बढ़ाकर 8.06 लाख टन करने और खरीदी गई उपज का भुगतान शीघ्र करने की मांग तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि बेहतर उत्पादन के बावजूद सीमित खरीद लक्ष्य के कारण बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज उचित मूल्य पर बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार से तत्काल प्रभाव से खरीद व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की जा रही है।
🌱 मूंग खरीद लक्ष्य बढ़ाने की प्रमुख मांग
किसानों का कहना है कि इस वर्ष मूंग का उत्पादन अपेक्षा से अधिक हुआ है। वर्तमान खरीद लक्ष्य सभी किसानों की उपज को समाहित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए राज्य सरकार से मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 8.06 लाख टन निर्धारित करने की मांग की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को सरकारी खरीद योजना का लाभ मिल सके।
💰 भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील
मूंग बेच चुके किसानों ने भुगतान प्रक्रिया को तेज करने की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से वे आगामी कृषि कार्यों के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था आसानी से कर सकेंगे। भुगतान में देरी से किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
🚜 किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर जोर
किसान संगठनों का मानना है कि यदि खरीद लक्ष्य बढ़ाया जाता है और भुगतान समय पर किया जाता है, तो किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा। इससे कृषि क्षेत्र में विश्वास बढ़ेगा और सरकारी खरीद व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।
📈 कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती
मूंग खरीद के लक्ष्य में वृद्धि न केवल किसानों के हित में होगी, बल्कि इससे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अधिक सरकारी खरीद से बाजार में मूल्य संतुलन बना रहेगा और किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
🏛️ सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
किसानों और किसान संगठनों की ओर से लगातार मांग उठाए जाने के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार खरीद लक्ष्य में वृद्धि और भुगतान प्रक्रिया में सुधार करती है, तो इससे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 8.06 लाख टन करने और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने की मांग किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। किसानों को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए सरकारी खरीद व्यवस्था को और अधिक किसान हितैषी बनाएगी।

