
नई दिल्ली। सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार अब नए डिजिटल प्लेटफॉर्म की जरूरत पर जोर दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Government e-Marketplace यानी GeM के 10वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी खरीद व्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाने के लिए एक नए, उपयोगकर्ता-अनुकूल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से सक्षम प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है।
दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सरकारी खरीद की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों की भूमिका पर बात की। उनका जोर इस बात पर रहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि खरीदारों और विक्रेताओं को बेहतर निर्णय लेने में भी मदद करे।
GeM ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर
Government e-Marketplace यानी GeM को सरकारी विभागों और संस्थानों के लिए ऑनलाइन खरीदारी का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसके जरिए विभिन्न सरकारी संस्थाएं अपनी जरूरत के सामान और सेवाओं की खरीद डिजिटल माध्यम से कर सकती हैं। वहीं, विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को सरकारी बाजार तक पहुंचने के लिए एक संगठित डिजिटल मंच मिलता है।
पिछले वर्षों में सरकारी खरीद व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में सुविधा के साथ-साथ पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होने के कारण खरीद से जुड़ी प्रक्रियाओं को एक डिजिटल व्यवस्था में लाने में मदद मिलती है।
GeM के 10वें स्थापना दिवस के मौके पर सामने आया संदेश इसी डिजिटल बदलाव को अगले चरण तक ले जाने से जुड़ा है।
AI से बदल सकता है सरकारी खरीद का तरीका
केंद्रीय मंत्री की ओर से AI-सक्षम प्लेटफॉर्म की जरूरत पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि भविष्य में सरकारी खरीद प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका बढ़ सकती है।
AI आधारित व्यवस्था खरीदारों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध विकल्पों को समझने, उत्पादों और सेवाओं की तुलना करने तथा खरीद प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों में सहायता देने में उपयोगी हो सकती है। इसी तरह विक्रेताओं के लिए भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक सहज बनाया जा सकता है।
हालांकि, AI को सरकारी खरीद में लागू करते समय पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा, निष्पक्षता और मानवीय निगरानी जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा। किसी भी तकनीकी प्रणाली का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि जवाबदेही को कम करना।
खरीदारों के लिए आसान होगी प्रक्रिया
सरकारी विभागों और संस्थानों में अलग-अलग तरह की वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया जितनी सरल और व्यवस्थित होगी, उतना ही समय और संसाधन बचाने में मदद मिल सकती है।
नए और user-friendly प्लेटफॉर्म का उद्देश्य यही हो सकता है कि सरकारी खरीदारों को आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो। बेहतर सर्च सुविधा, स्पष्ट जानकारी, तुलना के विकल्प और डिजिटल सहायता जैसी सुविधाएं खरीद प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकती हैं।
इससे खासतौर पर उन अधिकारियों और कर्मचारियों को सुविधा मिल सकती है जो नियमित रूप से सरकारी खरीद प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं।
छोटे कारोबारियों और विक्रेताओं के लिए भी अवसर
सरकारी खरीद बाजार में विक्रेताओं की भागीदारी बढ़ाना भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। यदि प्लेटफॉर्म पर उत्पादों और सेवाओं को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आसान होती है, तो अधिक कारोबारी सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ने में रुचि ले सकते हैं।
छोटे उद्यम, स्टार्टअप और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले सेवा प्रदाता डिजिटल माध्यम से सरकारी खरीदारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना रहती है और सरकारी संस्थानों को भी अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि प्लेटफॉर्म पर नियम कितने स्पष्ट हैं, विक्रेताओं के लिए प्रक्रिया कितनी आसान है और छोटे कारोबारियों को किस तरह की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
पारदर्शिता पर रहेगा विशेष ध्यान
सरकारी खरीद में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण विषय है। सार्वजनिक धन से होने वाली खरीद में यह जरूरी है कि प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत हो और संबंधित पक्षों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो।
डिजिटल प्लेटफॉर्म इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड, डिजिटल प्रक्रिया और निर्धारित प्रक्रियाओं के कारण खरीद से जुड़े चरणों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकता है।
AI आधारित नया प्लेटफॉर्म तैयार होने की स्थिति में पारदर्शिता को उसकी मूल संरचना का हिस्सा बनाना जरूरी होगा। तकनीक द्वारा दिए गए सुझाव या विश्लेषण किस आधार पर तैयार हुए, इसकी पर्याप्त समझ और जांच की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
प्रतिस्पर्धा से बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद
सरकारी खरीद में प्रतिस्पर्धा का सीधा संबंध उपलब्ध विकल्पों से है। यदि अलग-अलग विक्रेता और सेवा प्रदाता प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं, तो सरकारी खरीदारों के सामने अधिक विकल्प आ सकते हैं।
एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म इन विकल्पों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने में मदद कर सकता है। इससे खरीदार कीमत के साथ-साथ गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, सेवा शर्तों और अन्य जरूरी मानकों को ध्यान में रखकर निर्णय ले सकते हैं।
यही वजह है कि नए प्लेटफॉर्म की चर्चा को केवल तकनीकी बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सरकारी खरीद व्यवस्था के व्यापक आधुनिकीकरण से जोड़कर देखा जा सकता है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम
भारत में सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकारी खरीद भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
GeM जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार डिजिटल प्रशासन की उस सोच से जुड़ा है जिसमें सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक और डेटा आधारित बनाने का प्रयास किया जाता है। अब AI जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से यह व्यवस्था और अधिक स्मार्ट बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसका असर केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी खरीद से जुड़े हजारों विक्रेता और सेवा प्रदाता भी ऐसी व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। इसलिए प्लेटफॉर्म में होने वाला कोई बड़ा बदलाव खरीद श्रृंखला के कई स्तरों को प्रभावित कर सकता है।
तकनीक के साथ जवाबदेही भी जरूरी
AI और डिजिटल तकनीक सरकारी खरीद को तेज और सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी रहेंगी। गलत डेटा, तकनीकी गड़बड़ी, साइबर सुरक्षा और एल्गोरिदम से जुड़े पक्षपात जैसी संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसलिए भविष्य का प्लेटफॉर्म बनाते समय मजबूत साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, ऑडिट व्यवस्था और मानवीय निगरानी जरूरी होगी। खासकर सरकारी धन से जुड़े फैसलों में अंतिम जवाबदेही स्पष्ट रहनी चाहिए।
GeM के अगले दशक की दिशा
GeM के 10वें स्थापना दिवस पर सामने आया यह विजन सरकारी खरीद को नई तकनीकी दिशा देने की ओर संकेत करता है। आने वाले समय में यदि AI आधारित सुविधाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के लिए डिजिटल अनुभव में बदलाव देखने को मिल सकता है।
सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिखाई दे रही है जो आसान, लागत प्रभावी, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी हो। इसका वास्तविक मूल्यांकन हालांकि इसके क्रियान्वयन, उपयोगकर्ताओं के अनुभव और पारदर्शिता के स्तर से ही होगा।
कुल मिलाकर, GeM के अगले चरण की चर्चा सरकारी खरीद को सिर्फ ऑनलाइन करने से आगे ले जाकर उसे स्मार्ट, डेटा आधारित और AI-सक्षम व्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि तकनीक के साथ पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही का संतुलन कायम रखा जाता है, तो यह बदलाव सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
