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GeM के एक दशक की उपलब्धियां: सरकारी खरीद में डिजिटल क्रांति, ₹20 लाख करोड़ से अधिक पहुंचा कारोबार

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नई दिल्ली। भारत में सरकारी खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में Government e-Marketplace (GeM) ने पिछले एक दशक में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए हैं। सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों की खरीद प्रक्रिया को डिजिटल मंच उपलब्ध कराने वाला GeM आज छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और विभिन्न श्रेणियों के विक्रेताओं के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है।

पीआईबी हिंदी की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, GeM ने अपनी दस साल की यात्रा में ₹20 लाख करोड़ से अधिक का संचयी सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) पार किया है। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर 3.78 करोड़ से अधिक ऑर्डर दर्ज किए गए हैं। वहीं, 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (MSEs) GeM से जुड़े हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल माध्यम से सरकारी खरीद का दायरा लगातार व्यापक हुआ है।

हालांकि, अलग-अलग समय पर जारी सरकारी आंकड़ों में उपलब्धियां अलग-अलग तारीखों के आधार पर दी गई हैं। जून 2026 की एक PIB विज्ञप्ति में GeM के माध्यम से ₹18.4 लाख करोड़ का संचयी GMV दर्ज होने की जानकारी दी गई थी, जबकि अन्य आधिकारिक अपडेट में बाद के आंकड़े सामने आए हैं।

सरकारी खरीद में आया बड़ा डिजिटल बदलाव

GeM की शुरुआत का मूल उद्देश्य सरकारी खरीद प्रक्रिया को एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदलना था, जहां खरीदार और विक्रेता एक व्यवस्थित, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी व्यवस्था के तहत जुड़ सकें। अगस्त 2016 में शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक खरीद प्रक्रियाओं के मुकाबले तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।

सरकारी विभागों को विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए अलग-अलग बाजारों या विक्रेताओं पर निर्भर रहने के बजाय एक डिजिटल marketplace उपलब्ध हुआ। इससे खरीद की प्रक्रिया में रिकॉर्ड रखने, तुलना करने, बोली लगाने और ऑर्डर पूरा करने जैसे कई चरणों को ऑनलाइन संचालित करने में मदद मिली।

PIB के अनुसार, GeM अब केवल सामान खरीदने का मंच नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी खरीद के लिए एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुआ है। प्लेटफॉर्म पर उत्पादों के साथ बड़ी संख्या में सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

₹20 लाख करोड़ का GMV बना बड़ा मील का पत्थर

GeM की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में इसका संचयी GMV ₹20 लाख करोड़ से अधिक पहुंचना है। GMV यानी Gross Merchandise Value उस कुल मूल्य को दर्शाता है, जितने मूल्य के लेन-देन प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुए हैं।

इस आंकड़े को केवल आर्थिक उपलब्धि के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसका एक बड़ा महत्व सरकारी खरीद के डिजिटल रूपांतरण से भी जुड़ा है। करोड़ों ऑर्डर का डिजिटल माध्यम से पूरा होना इस बात का संकेत है कि सरकारी संस्थानों में ऑनलाइन खरीद की स्वीकार्यता बढ़ी है।

नवंबर 2025 तक GeM पर करीब 3.27 करोड़ ऑर्डर और ₹16.41 लाख करोड़ से अधिक का संचयी GMV दर्ज था। उस समय प्लेटफॉर्म पर 10,894 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 348 सेवा श्रेणियां उपलब्ध थीं।

MSEs के लिए खुला सरकारी बाजार

GeM की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका Micro and Small Enterprises (MSEs) को सरकारी खरीद से जोड़ना है। छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी संस्थानों तक पहुंच बनाना पारंपरिक व्यवस्था में चुनौतीपूर्ण रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का अवसर दिया।

पीआईबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के अंत तक GeM पर 11 लाख से अधिक MSEs पंजीकृत थे और इन उद्यमों को ₹7.35 लाख करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिल चुके थे। संचयी ऑर्डर मूल्य में MSEs की हिस्सेदारी 44.8 प्रतिशत से अधिक बताई गई थी।

2026 के एक आधिकारिक अपडेट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 11 लाख से अधिक MSEs को 51 लाख से ज्यादा ऑर्डर मिले, जिनका मूल्य ₹2.36 लाख करोड़ से अधिक था।

इससे छोटे उद्यमों को बड़े सरकारी बाजार में अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

महिला उद्यमियों की भागीदारी भी बढ़ी

GeM के विस्तार में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं के नेतृत्व वाले MSEs को सरकारी खरीद से जोड़ने के लिए Womaniya जैसी पहल शुरू की गई।

जनवरी 2026 तक दो लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले MSEs GeM पर पंजीकृत होने की जानकारी दी गई थी। इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से ₹80,000 करोड़ से अधिक के सरकारी खरीद ऑर्डर हासिल किए।

इस तरह GeM का प्रभाव केवल सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला उद्यमिता और छोटे कारोबारों को औपचारिक बाजार से जोड़ने में भी भूमिका निभा रहा है।

स्टार्टअप और स्थानीय कारोबार को मिला अवसर

डिजिटल सरकारी खरीद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू स्टार्टअप और नए व्यवसायों को अवसर देना है। GeM पर स्टार्टअप के लिए अलग व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जिससे नए उत्पाद और तकनीकी समाधान सरकारी खरीदारों तक पहुंच सकें।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, GeM पर हजारों स्टार्टअप जुड़े हैं और उन्होंने सरकारी खरीद में उल्लेखनीय कारोबार किया है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास नवीन उत्पाद या सेवाएं तो हैं, लेकिन बड़े पारंपरिक बाजारों तक पहुंच सीमित है।

पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर जोर

GeM की पूरी व्यवस्था डिजिटल होने के कारण खरीद प्रक्रिया में रिकॉर्ड और डेटा उपलब्ध रहता है। खरीदार विभिन्न विकल्पों की तुलना कर सकते हैं और विक्रेता निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत सरकारी मांग तक पहुंच सकते हैं।

सरकार ने GeM में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करना है।

आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ से जुड़ाव

GeM को आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे व्यापक आर्थिक उद्देश्यों के साथ भी जोड़ा गया है। स्थानीय निर्माता और छोटे व्यवसाय सरकारी संस्थानों की मांग से सीधे जुड़ सकते हैं।

यह व्यवस्था खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां स्थानीय स्तर पर उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें बड़े खरीदारों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म इस दूरी को कम करने का माध्यम बन सकता है।

आगे की राह

GeM के सामने अब चुनौती केवल कारोबार का आकार बढ़ाना नहीं, बल्कि डिजिटल सरकारी खरीद की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाना है। जैसे-जैसे सरकारी खरीद में नई तकनीकों, सेवाओं और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, प्लेटफॉर्म को भी अधिक सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाना होगा।

भविष्य में AI आधारित विश्लेषण, बेहतर विक्रेता मूल्यांकन, तेज विवाद समाधान, मजबूत डेटा सुरक्षा और अधिक छोटे कारोबारियों को जोड़ना GeM की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।

निष्कर्ष

GeM के एक दशक की यात्रा भारतीय सरकारी खरीद व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण कहानी प्रस्तुत करती है। ₹20 लाख करोड़ से अधिक के संचयी GMV, करोड़ों ऑर्डर और लाखों MSEs की भागीदारी ने इसे एक बड़े डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में स्थापित किया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि GeM ने सरकारी खरीद को केवल विभागों और बड़े आपूर्तिकर्ताओं के बीच होने वाली प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय छोटे उद्यमों, महिला कारोबारियों, स्टार्टअप और स्थानीय व्यवसायों के लिए भी अवसरों का विस्तार किया है।

आने वाले वर्षों में GeM की सफलता इस बात से तय होगी कि वह कितनी प्रभावी तरीके से पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा, समावेशन और तकनीकी नवाचार को साथ लेकर आगे बढ़ता है। भारत के डिजिटल शासन और विकसित अर्थव्यवस्था की दिशा में यह प्लेटफॉर्म आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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