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GeM ने MSME और स्टार्टअप्स को दिया बड़ा बाजार, वित्त वर्ष 2025-26 में 2.37 लाख करोड़ रुपये की खरीद

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नई दिल्ली। सरकारी खरीद की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए Government e-Marketplace (GeM) ने छोटे कारोबारियों और नए उद्यमों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, GeM के माध्यम से वित्त वर्ष 2025-26 में MSMEs से होने वाली खरीद 2.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई

यह आंकड़ा केवल सरकारी खरीद के विस्तार को नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी बताता है कि छोटे और मध्यम कारोबार अब सरकारी संस्थानों तक डिजिटल माध्यम से अपनी पहुंच बना रहे हैं। GeM ने विशेष रूप से MSMEs, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकारी खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका

सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों को बड़ी संख्या में वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। पहले सरकारी खरीद की प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर कागजी कार्रवाई और प्रक्रियागत औपचारिकताएं शामिल होती थीं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने इस व्यवस्था को काफी हद तक ऑनलाइन रूप दिया है।

GeM इसी बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके माध्यम से सरकारी खरीदार और विक्रेता एक डिजिटल मंच पर जुड़ सकते हैं। इससे कारोबारियों को सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है और सरकारी संस्थानों को विभिन्न विक्रेताओं के उत्पादों तथा सेवाओं की तुलना करने में सुविधा होती है।

इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण लाभ छोटे कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ना है।

MSMEs के लिए बढ़ा अवसर

भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSMEs की महत्वपूर्ण भूमिका है। देशभर में बड़ी संख्या में छोटे व्यवसाय उत्पादन और सेवाओं से जुड़े हुए हैं। हालांकि छोटे कारोबारियों के सामने अपने उत्पादों को बड़े खरीदारों तक पहुंचाने की चुनौती बनी रहती है।

GeM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस समस्या को कम करने का अवसर दिया है। छोटे व्यवसाय अपने उत्पाद और सेवाएं सरकारी खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं और विभिन्न सरकारी संस्थानों की खरीद आवश्यकताओं में भाग ले सकते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में MSMEs से 2.37 लाख करोड़ रुपये तक की खरीद का आंकड़ा इस बढ़ती भागीदारी की ओर संकेत करता है।

स्टार्टअप्स को भी मिला प्लेटफॉर्म

सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ना भी डिजिटल खरीद व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। नए उद्यम अक्सर नवीन तकनीक, उत्पाद या सेवाएं लेकर बाजार में आते हैं। उनके लिए शुरुआती दौर में बड़े संस्थागत खरीदारों तक पहुंच बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

GeM ने ऐसे उद्यमों को सरकारी बाजार से जोड़ने का एक माध्यम उपलब्ध कराया है। यदि किसी स्टार्टअप का उत्पाद या सेवा सरकारी संस्थानों की आवश्यकता के अनुरूप है, तो वह डिजिटल माध्यम से संभावित खरीदारों तक पहुंच सकता है।

इससे सरकारी संस्थानों को भी नई तकनीक और नए व्यावसायिक समाधानों तक पहुंचने का अवसर मिलता है।

महिला उद्यमियों की भागीदारी

सरकारी खरीद व्यवस्था में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना भी समावेशी आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। डिजिटल प्लेटफॉर्म भौगोलिक दूरी को कम करते हैं और कारोबारियों को अपने स्थान से ही बाजार तक पहुंचने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

महिला संचालित व्यवसायों के लिए सरकारी खरीद में भागीदारी बढ़ने का मतलब नए ग्राहक, अतिरिक्त कारोबार और भविष्य में विस्तार के अवसर हो सकते हैं।

हालांकि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। महिला उद्यमियों को उत्पाद गुणवत्ता, डिजिटल कारोबार, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी खरीद नियमों से जुड़ी जानकारी भी आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है।

स्वयं सहायता समूहों के लिए नई संभावनाएं

GeM ने स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को भी व्यापक बाजार से जुड़ने का अवसर दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्वयं सहायता समूह स्थानीय स्तर पर कई प्रकार के उत्पाद तैयार करते हैं।

यदि इन उत्पादों को सरकारी संस्थानों तक पहुंचने का अवसर मिलता है तो छोटे समूहों की आय बढ़ाने और स्थानीय उद्यमिता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन समूहों के लिए उपयोगी हो सकती है जो स्थानीय स्तर पर उत्पादन करते हैं लेकिन बड़े बाजार तक पहुंच बनाने में कठिनाई महसूस करते हैं।

2.37 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण?

वित्त वर्ष 2025-26 में MSMEs से GeM के जरिए 2.37 लाख करोड़ रुपये की खरीद का आंकड़ा सरकारी खरीद में छोटे कारोबारियों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकारी बाजार केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रह जाता। यदि छोटे व्यवसाय भी प्रतिस्पर्धी तरीके से सरकारी संस्थानों को उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध करा सकें, तो इससे बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा सरकारी खरीद में छोटे कारोबारियों की भागीदारी बढ़ने से उन्हें अपने उत्पादन को बढ़ाने, नए कर्मचारियों को जोड़ने और कारोबार के विस्तार की संभावनाएं मिल सकती हैं।

पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर जोर

डिजिटल सरकारी खरीद व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। जब खरीद प्रक्रिया ऑनलाइन होती है तो खरीदारों और विक्रेताओं के बीच लेनदेन से जुड़े कई चरण डिजिटल रूप से दर्ज किए जा सकते हैं।

प्रतिस्पर्धी वातावरण में अलग-अलग विक्रेता अपनी वस्तुओं और सेवाओं को सरकारी खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे खरीद प्रक्रिया में विकल्प बढ़ते हैं और संस्थानों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त विक्रेता चुनने का अवसर मिलता है।

हालांकि किसी भी डिजिटल खरीद प्रणाली की सफलता के लिए नियमों का प्रभावी पालन, डेटा की सुरक्षा और विक्रेताओं के लिए सरल प्रक्रियाएं भी आवश्यक हैं।

छोटे शहरों और ग्रामीण कारोबारियों के लिए महत्व

GeM की डिजिटल प्रकृति का एक बड़ा लाभ यह हो सकता है कि सरकारी खरीद में भागीदारी केवल बड़े महानगरों के कारोबारियों तक सीमित न रहे। इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने के साथ छोटे शहरों और अन्य क्षेत्रों के कारोबारी भी राष्ट्रीय स्तर के खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले छोटे उद्यमों के लिए यह अवसर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बड़े संस्थागत बाजार से जोड़ने की संभावना बढ़ती है।

चुनौतियां भी बनी हुई हैं

GeM के विस्तार के बावजूद छोटे कारोबारियों के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इनमें डिजिटल प्रक्रियाओं की जानकारी, दस्तावेज तैयार करना, उत्पाद मानकों को पूरा करना, प्रतिस्पर्धी कीमत तय करना और समय पर आपूर्ति करना शामिल है।

कई छोटे उद्यमों के लिए सरकारी खरीद की तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को समझना आसान नहीं होता। इसलिए प्रशिक्षण, जागरूकता और सहायता तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि छोटे विक्रेताओं को भुगतान समय पर मिले और उन्हें सरकारी खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक कदम

GeM की बढ़ती भूमिका भारत में सरकारी खरीद के डिजिटल परिवर्तन को भी दर्शाती है। ऑनलाइन खरीद प्रणाली सरकारी संस्थानों और कारोबारियों के बीच संपर्क को अधिक व्यवस्थित बनाने की क्षमता रखती है।

इसका प्रभाव केवल खरीद तक सीमित नहीं है। डिजिटल सरकारी बाजार में भागीदारी से छोटे कारोबारियों को अपने उत्पादों की मांग समझने, नए ग्राहकों से जुड़ने और कारोबार को विस्तार देने के अवसर मिल सकते हैं।

आगे की राह

आने वाले समय में GeM की सफलता का आकलन केवल खरीद के कुल मूल्य से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जाएगा कि कितने छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप, महिला उद्यमी और स्वयं सहायता समूह लगातार सरकारी बाजार से जुड़ पा रहे हैं।

इसके लिए डिजिटल साक्षरता, विक्रेताओं का प्रशिक्षण, आसान पंजीकरण प्रक्रिया, समयबद्ध भुगतान और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के लिए बेहतर बाजार अवसर महत्वपूर्ण होंगे।

यदि इन पहलुओं पर लगातार काम किया जाता है, तो सरकारी खरीद छोटे कारोबारियों के लिए स्थायी बाजार का माध्यम बन सकती है।

निष्कर्ष

GeM ने सरकारी खरीद के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के साथ MSMEs, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ाने का अवसर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में MSMEs से GeM के माध्यम से 2.37 लाख करोड़ रुपये तक की खरीद इस बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण संकेत है।

आगे चुनौती इस उपलब्धि को और व्यापक बनाने की है। छोटे कारोबारियों के लिए आसान प्रक्रियाएं, पारदर्शी खरीद, समय पर भुगतान और डिजिटल प्रशिक्षण मजबूत किए जाते हैं, तो GeM भारत के छोटे उद्यमों को सरकारी बाजार से जोड़ने में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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