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इंदौर में साइबर ठगी का नया जाल, तमिलनाडु सीएम विजय के नाम पर लोन और आर्थिक मदद का झांसा

इंदौर, 31 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर अपराधियों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। इस बार ठगों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता सी. जोसेफ विजय, जिन्हें थलपति विजय के नाम से भी जाना जाता है, के नाम और कथित फाउंडेशन का सहारा लेकर लोगों को आर्थिक सहायता, कारोबार के लिए लोन और पढ़ाई से जुड़ी मदद दिलाने का भरोसा दिया। मामला सामने आने के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच और साइबर सेल सतर्क हो गए हैं।

पुलिस के पास इस तरह की करीब आधा दर्जन शिकायतें पहुंचने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें फोन करके एक संस्था से जुड़े होने का दावा किया गया और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई। इसके बाद रजिस्ट्रेशन तथा अलग-अलग शुल्क के नाम पर ऑनलाइन रकम जमा कराने के लिए कहा गया। पुलिस अब संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, लिंक और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है।

Crime AI Generated photo

फोन कॉल से शुरू होती है पूरी कहानी

शिकायतों के मुताबिक, साइबर ठग सबसे पहले लोगों को फोन करते हैं। बातचीत के दौरान वे खुद को मुख्यमंत्री विजय के कथित फाउंडेशन से जुड़ा कर्मचारी या प्रतिनिधि बताते हैं। इसके बाद सामने वाले को बताया जाता है कि संस्था जरूरतमंद लोगों की सहायता कर रही है।

किसी व्यक्ति को कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देने की बात कही जाती है तो किसी को एजुकेशन लोन, स्टार्टअप लोन या विदेश में पढ़ाई के लिए सहायता मिलने का भरोसा दिया जाता है। इस तरह ठग सामने वाले की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग तरह के आकर्षक प्रस्ताव रखते हैं।

ऐसे प्रस्ताव खास तौर पर उन लोगों को प्रभावित कर सकते हैं जिन्हें वास्तव में कारोबार, पढ़ाई या आर्थिक जरूरत के लिए मदद की तलाश होती है। ठग इसी भरोसे का फायदा उठाकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।

रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजा जाता है लिंक

पुलिस के अनुसार, फोन पर बातचीत के बाद लोगों को मोबाइल पर एक लिंक भेजा जाता है। उनसे कहा जाता है कि आर्थिक सहायता या लोन प्राप्त करने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है।

लिंक खोलने के बाद फॉर्म भरने या ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद ठगी का अगला चरण शुरू होता है। लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस, वेरिफिकेशन शुल्क, जीएसटी, प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्ज के नाम पर रकम जमा करने को कहा जाता है।

साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर शुरुआत में छोटी रकम की मांग करते हैं। व्यक्ति के भरोसे में आने के बाद अलग-अलग कारण बताकर भुगतान की मांग बढ़ाई जा सकती है। इंदौर में सामने आए मामले में भी इसी तरह की शिकायतें पुलिस तक पहुंची हैं।

आर्थिक मदद की उम्मीद में जमा कराई रकम

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाउंडेशन की ओर से आर्थिक सहायता या लोन उपलब्ध कराया जाएगा। इसी भरोसे में कुछ लोगों ने आरोपियों द्वारा बताए गए माध्यम से रकम जमा कराई।

मगर भुगतान के बाद वादा की गई सहायता नहीं मिलने पर लोगों को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं से हजारों रुपये की रकम जमा कराने की बात भी सामने आई है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ठगों ने किसी सामान्य कंपनी या संस्था के बजाय एक चर्चित सार्वजनिक व्यक्ति के नाम और कथित सामाजिक संस्था की पहचान का इस्तेमाल करने की कोशिश की।

करीब आधा दर्जन शिकायतों के बाद पुलिस सक्रिय

मामले में शिकायतों की संख्या बढ़ने के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटा रही है, जिनसे लोगों को फोन किए गए थे।

इसके साथ ही उन बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनके जरिए रकम लेने की कोशिश की गई। पुलिस भेजे गए लिंक और उनसे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित साइबर गिरोह है या अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय अपराधी एक जैसे तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दूसरे राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं तार

मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के नाम और कथित फाउंडेशन का इस्तेमाल होने के कारण जांच का दायरा इंदौर से बाहर भी जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर पुलिस तमिलनाडु पुलिस के संपर्क में है और संबंधित जानकारी साझा की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरीके से दूसरे शहरों या राज्यों में भी लोगों से संपर्क किया गया है। यदि ऐसे और मामले सामने आते हैं तो यह किसी बड़े साइबर नेटवर्क की ओर संकेत कर सकता है।

पुलिस ने लोगों को किया सतर्क

इंदौर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर केवल किसी बड़े नाम या संस्था का उल्लेख सुनकर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति लोन, आर्थिक सहायता या किसी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पहले पैसे मांगता है तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

अनजान मोबाइल नंबर से आए लिंक को खोलने से भी बचना चाहिए। बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए।

साइबर अपराध में ठग अक्सर लोगों को जल्दी निर्णय लेने के लिए दबाव डालते हैं। ऐसे में यदि किसी ऑफर में तुरंत फीस जमा करने, लिंक खोलने या व्यक्तिगत जानकारी देने की शर्त रखी जाए तो सावधानी बरतना जरूरी है।

नाम बड़ा हो तो भी जांच जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि साइबर ठग किस तरह चर्चित चेहरों और संस्थाओं की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। किसी मुख्यमंत्री, अभिनेता, संस्था या बड़े संगठन का नाम इस्तेमाल किए जाने मात्र से किसी फोन कॉल या ऑनलाइन प्रस्ताव को वास्तविक नहीं माना जा सकता।

इंदौर में सामने आया मामला इसी बात की ओर संकेत करता है कि डिजिटल दुनिया में भरोसे के नाम पर भी ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए किसी भी आर्थिक सहायता या लोन के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस साइबर ठगी के पीछे सक्रिय लोगों और उनके नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

निष्कर्ष

इंदौर में मुख्यमंत्री विजय के नाम और कथित फाउंडेशन का इस्तेमाल कर आर्थिक मदद तथा लोन का लालच देने का मामला साइबर अपराध के बदलते तरीकों की एक गंभीर मिसाल है। करीब आधा दर्जन शिकायतों के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या पहले भुगतान मांगने वाले आर्थिक प्रस्ताव पर बिना पुष्टि भरोसा न करें।

साइबर ठगी से बचाव में सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित साइबर अपराध व्यवस्था को देना भी जरूरी है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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