
कमलेश कुमार बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
दिनांक 15 अगस्त 2026
कारीकोट न्याय पंचायत के उच्च प्राथमिक विद्यालय धर्मपुर रेतिया में स्वतंत्रता दिवस पर बाढ़ की चुनौती के बीच हुआ ध्वजारोहण, बच्चों और गुरुजनों ने विपरीत परिस्थितियों में भी कायम रखा राष्ट्रप्रेम का उत्साह
कारीकोट न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय धर्मपुर रेतिया में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन इस बार सामान्य परिस्थितियों से अलग और भावनात्मक रूप से बेहद खास रहा। विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी पहुंच जाने के बावजूद बच्चों और शिक्षकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। पानी के बीच खड़े होकर विद्यार्थियों और विद्यालय के गुरुजनों ने तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराया और देशभक्ति की भावना को जीवंत कर दिया।
बाढ़ ने बदले हालात, लेकिन नहीं बदला हौसला
बरसात के मौसम में कई ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। कारीकोट न्याय पंचायत का धर्मपुर रेतिया भी ऐसी ही परिस्थितियों से प्रभावित रहा। विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करना आसान नहीं था।
इसके बावजूद विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। राष्ट्रीय पर्व के महत्व को समझते हुए सभी ने तय किया कि पानी चाहे जितना हो, तिरंगे का सम्मान और स्वतंत्रता दिवस का उत्साह कम नहीं होने दिया जाएगा।
विद्यालय परिसर में जब बच्चे और गुरुजन पानी के बीच खड़े होकर ध्वजारोहण में शामिल हुए तो यह दृश्य अपने आप में देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बन गया। सामान्य तौर पर जहां राष्ट्रीय पर्व के आयोजन के लिए साफ-सुथरे परिसर और मंच की व्यवस्था की जाती है, वहीं यहां प्रकृति की चुनौती के बीच राष्ट्रध्वज को सम्मान देने का संकल्प दिखाई दिया।
पानी के बीच तिरंगे को सलामी
स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष, बलिदान और लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करने का अवसर भी है। धर्मपुर रेतिया स्कूल में भी इसी भावना के साथ ध्वजारोहण किया गया।
बाढ़ के पानी में खड़े बच्चों के चेहरे पर उत्साह साफ नजर आया। उनके साथ विद्यालय के गुरुजन भी इस राष्ट्रीय पर्व का हिस्सा बने। पानी ने भले ही विद्यालय की दिनचर्या और आयोजन की व्यवस्थाओं को प्रभावित किया हो, लेकिन बच्चों के भीतर देश के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को प्रभावित नहीं कर सका।
यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि देशभक्ति किसी सुविधा या अनुकूल परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। जब मन में राष्ट्र के प्रति सम्मान हो तो कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया जा सकता है।
बच्चों के लिए बना यादगार अनुभव
विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए यह स्वतंत्रता दिवस निश्चित रूप से लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन सकता है। किताबों में बच्चे अक्सर स्वतंत्रता दिवस, तिरंगे और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन जब वे स्वयं किसी चुनौती के बीच राष्ट्रीय पर्व का हिस्सा बनते हैं तो उस अनुभव का प्रभाव अलग होता है।
बाढ़ के पानी में खड़े होकर ध्वजारोहण में भाग लेना बच्चों के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उनके भीतर हिम्मत, अनुशासन, सामूहिकता और देश के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों को मजबूत करने वाला अवसर भी बना।
शिक्षकों ने भी बच्चों के साथ खड़े होकर यह संदेश दिया कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं होता। विद्यालय विद्यार्थियों को परिस्थितियों से जूझना, जिम्मेदारी निभाना और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना भी सिखाता है।
गुरुजनों की भूमिका भी रही महत्वपूर्ण
किसी भी विद्यालय में राष्ट्रीय पर्व के आयोजन को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। धर्मपुर रेतिया स्कूल में बाढ़ के बीच ध्वजारोहण का निर्णय और उसमें बच्चों के साथ गुरुजनों की मौजूदगी इस बात को दर्शाती है कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए केवल विषय पढ़ाने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि उनके मार्गदर्शक भी होते हैं।
बच्चों के साथ पानी में खड़े होकर राष्ट्रीय पर्व मनाना उनके लिए प्रेरणादायक संदेश रहा। इससे विद्यार्थियों को यह सीख मिलती है कि कठिनाई आने पर जिम्मेदारियों से पीछे हटने के बजाय परिस्थितियों का सामना करने की भावना विकसित करनी चाहिए।
हालांकि बाढ़ जैसी स्थिति में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना भी जरूरी है। ऐसे आयोजनों में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ही कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीण विद्यालयों की जमीनी तस्वीर
धर्मपुर रेतिया विद्यालय का यह दृश्य ग्रामीण भारत के उन विद्यालयों की जमीनी परिस्थितियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है, जहां प्राकृतिक परिस्थितियां कई बार शिक्षा और विद्यालयी गतिविधियों के सामने चुनौती खड़ी कर देती हैं।
बारिश, जलभराव और बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में विद्यालयों तक सुरक्षित पहुंच, परिसर से पानी की निकासी और विद्यार्थियों की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
इसके बावजूद शिक्षा के प्रति बच्चों और शिक्षकों का उत्साह यह बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय समाज के लिए कितने महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक मूल्यों का निर्माण भी होता है।
देशभक्ति का अर्थ केवल नारों तक सीमित नहीं
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति की भावना अलग-अलग रूपों में सामने आती है। कहीं बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, कहीं स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जाता है और कहीं तिरंगे को सलामी देकर राष्ट्र के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
धर्मपुर रेतिया स्कूल में बाढ़ के पानी के बीच ध्वजारोहण की तस्वीर इस भावना को एक अलग रूप में सामने लाती है। यहां देशभक्ति केवल भाषण या नारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बनाए रखने के प्रयास के रूप में दिखाई दी।
यह संदेश विशेष रूप से बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है कि देश के प्रति सम्मान केवल विशेष अवसरों पर व्यक्त करने की भावना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान के रूप में भी सामने आना चाहिए।
प्रकृति की चुनौती के बीच उम्मीद का संदेश
बाढ़ लोगों के जीवन में कठिनाइयां लेकर आती है। घरों, खेतों, सड़कों और विद्यालयों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में लोगों को प्रशासनिक सहायता और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता होती है।
धर्मपुर रेतिया विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन इस चुनौतीपूर्ण माहौल में सकारात्मकता का संदेश देता है। बच्चों के चेहरों पर दिखाई देने वाला उत्साह यह बताता है कि कठिन परिस्थितियां मनोबल को कमजोर जरूर कर सकती हैं, लेकिन सामूहिक इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से उम्मीद को बनाए रखा जा सकता है।
विद्यालय के बच्चों और गुरुजनों की यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्र की उस जीवटता को सामने लाती है, जिसमें लोग परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।
निष्कर्ष
कारीकोट न्याय पंचायत के उच्च प्राथमिक विद्यालय धर्मपुर रेतिया में बाढ़ के पानी के बीच हुआ ध्वजारोहण इस स्वतंत्रता दिवस पर एक यादगार दृश्य बन गया। बाढ़ ने विद्यालय परिसर की परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण जरूर बनाया, लेकिन बच्चों और गुरुजनों के भीतर मौजूद राष्ट्रप्रेम, उत्साह और तिरंगे के प्रति सम्मान को कम नहीं कर सका।
इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि देशभक्ति केवल सुविधाओं के बीच दिखाई देने वाली भावना नहीं है। जब कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया जाता है, तो वह अपने आप में प्रेरणादायक बन जाता है।
धर्मपुर रेतिया स्कूल के बच्चों और शिक्षकों का यह उत्साह ग्रामीण भारत की उस तस्वीर को सामने लाता है, जहां सीमित संसाधनों और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की लौ जलती रहती है। बाढ़ का पानी विद्यालय परिसर में जरूर पहुंचा, लेकिन उसने बच्चों के दिलों में बसे तिरंगे के सम्मान और देशभक्ति के जज्बे को नहीं डुबो सका।
