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करीकॉट न्याय पंचायत के जंगल गुलरिया समेत 12 गांवों पर बाढ़ का खतरा, तेजी से बढ़ रहा जलस्तर

कमलेश कुमार बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

दिनांक 16 अगस्त 2026

करीकॉट न्याय पंचायत क्षेत्र के जंगल गुलरिया, संपत पुरवा और आसपास के गांवों में लगातार बढ़ रहे पानी के जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ने के कारण सुजौली, धनियावेली, मुझवा, तिलवा, रामपुर, रेतिया समेत करीब एक दर्जन गांवों में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक यदि जलस्तर बढ़ने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो कई गांवों के निचले इलाकों में पानी पहुंच सकता है।

तेजी से बढ़ रहा जलस्तर, ग्रामीणों में दहशत

करिकॉट न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में इन दिनों पानी का बढ़ता स्तर लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। जंगल गुलरिया और संपत पुरवा सहित आसपास के गांवों में नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी लगातार बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए ग्रामीण अपने घरों, पशुओं और जरूरी सामान को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में पानी का दबाव बढ़ा है। खेतों और निचले स्थानों में पानी जमा होने के कारण आवागमन भी प्रभावित होने लगा है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर जलस्तर में और बढ़ोतरी हुई तो खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं और गांवों तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी पानी आ सकता है।

करीब 12 गांवों पर मंडरा रहा संकट

बताया जा रहा है कि करीकॉट न्याय पंचायत के जंगल गुलरिया और संपत पुरवा के अलावा सुजौली, धनियावेली, मुझवा, तिलवा, रामपुर, रेतिया समेत कम से कम 12 गांव जलस्तर बढ़ने से प्रभावित होने की आशंका के दायरे में हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

ग्रामीण इलाकों में कई परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में जलस्तर बढ़ने से केवल मकानों पर ही खतरा नहीं है, बल्कि पशुओं के चारे, कृषि उपकरण और फसलों के नुकसान की भी आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की मांग की है।

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निचले इलाकों में बढ़ी परेशानी

पानी बढ़ने का सबसे अधिक असर निचले क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। गांवों के आसपास स्थित खेतों और खाली स्थानों में पानी जमा होने लगा है। कई जगह रास्तों के किनारे भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। यदि बारिश या जलप्रवाह में और वृद्धि होती है तो ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति अचानक गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए प्रशासन को जलस्तर की नियमित निगरानी के साथ-साथ प्रभावित गांवों में पहले से बचाव की तैयारी करनी चाहिए।

ग्रामीणों की प्रशासन से गुहार

जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सतर्कता बरतने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित गांवों में जिम्मेदार अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की टीम भेजकर मौके की स्थिति का जायजा लिया जाना चाहिए।

ग्रामीणों की मांग है कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए। इसके अलावा पशुओं के लिए चारा, पीने के पानी और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

आवागमन को लेकर भी चिंता

बाढ़ का पानी बढ़ने की स्थिति में गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इससे ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए ऐसी स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को उन रास्तों की पहचान करनी चाहिए जो जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले प्रभावित होते हैं। वैकल्पिक रास्तों की जानकारी ग्रामीणों को पहले से उपलब्ध कराई जाए, ताकि आपात स्थिति में लोगों को परेशानी न हो।

फसलों और पशुधन पर भी खतरा

करिकॉट न्याय पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीणों की आजीविका खेती और पशुपालन से जुड़ी हुई है। खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, लंबे समय तक जलभराव रहने पर पशुओं के लिए चारे की समस्या भी पैदा हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि और राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजना चाहिए। यदि फसल को नुकसान होता है तो प्रभावित किसानों का सर्वे कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

लगातार निगरानी की जरूरत

वर्तमान परिस्थितियों में सबसे जरूरी है कि जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। पानी बढ़ने की रफ्तार, मौसम की स्थिति और स्थानीय जलस्रोतों के प्रवाह को देखते हुए प्रशासन को समय रहते आवश्यक कदम उठाने होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि संकट बढ़ने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय पहले से तैयारी करना अधिक प्रभावी होगा। गांवों में संभावित सुरक्षित स्थानों की पहचान, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था तैयार रखने से किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीणों में भय, लेकिन प्रशासन से उम्मीद

करिकॉट न्याय पंचायत के जंगल गुलरिया, संपत पुरवा सहित करीब एक दर्जन गांवों में जलस्तर बढ़ने की खबर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि पानी किस गति से आगे बढ़ता है और आने वाले समय में जलस्तर में कितनी वृद्धि होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते स्थिति का संज्ञान लेकर निगरानी और बचाव की व्यवस्था मजबूत करता है तो संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ग्रामीण भी एक-दूसरे को सतर्क कर रहे हैं और जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल करिकॉट न्याय पंचायत क्षेत्र के जंगल गुलरिया, संपत पुरवा, सुजौली, धनियावेली, मुझवा, तिलवा, रामपुर, रेतिया समेत करीब 12 गांवों में जलस्तर बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाएगा और किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाएगी।

नोट: यह रिपोर्ट आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई स्थानीय जानकारी पर आधारित है। जलस्तर, प्रभावित गांवों की संख्या और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध होने पर उन्हें अलग से जोड़ा जा सकता है।

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