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कौशांबी के प्राथमिक विद्यालय इटाला में शिक्षा पर विशेष फोकस: नामांकन बढ़ाने, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन की अनूठी पहल

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दिनेश द्विवेदी कौशाम्बी

संवाददाता हिट एंड हॉट न्यूज़

कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जनपद के कौशांबी विकासखंड अंतर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय इटाला इन दिनों शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और नामांकन बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के कारण चर्चा में है। विद्यालय प्रशासन केवल कक्षाओं तक सीमित रहकर शिक्षा देने का कार्य नहीं कर रहा, बल्कि गांव के अभिभावकों से लगातार संवाद स्थापित कर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित भी कर रहा है। यही कारण है कि विद्यालय में शिक्षा का सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है और ग्रामीण भी शिक्षकों की इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए नियमित उपस्थिति, अनुशासन, पोषण और अभिभावकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ विद्यालय में विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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नामांकन बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान

प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय में बच्चों का नामांकन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए समय-समय पर गांव में संपर्क अभियान चलाया जाता है। शिक्षक स्वयं अभिभावकों से मिलकर उन्हें शिक्षा का महत्व बताते हैं और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने का अनुरोध करते हैं।

विद्यालय प्रशासन का मानना है कि जब तक अभिभावक शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना कठिन होगा। इसलिए शिक्षक केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि घर-घर जाकर भी संवाद स्थापित करते हैं। इस पहल का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है।

अभिभावकों से लगातार बनाए रखा जाता है संपर्क

विद्यालय में अभिभावकों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन, उपस्थिति और सीखने की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की जाती है।

शिक्षकों का कहना है कि जब अभिभावक विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़ते हैं तो बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे पढ़ाई में अधिक रुचि लेने लगते हैं। यही कारण है कि विद्यालय लगातार अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर कार्य कर रहा है।

बच्चों की उपस्थिति में लगातार सुधार

विद्यालय में वर्तमान समय में लगभग 90 विद्यार्थियों का नामांकन है। निरीक्षण के दौरान करीब 70 विद्यार्थी उपस्थित मिले। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि शेष विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

शिक्षक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के घर जाकर उनके अभिभावकों से संपर्क करते हैं और नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करते हैं। इस व्यवस्था से उपस्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान

विद्यालय में सभी शिक्षक निर्धारित समय पर उपस्थित रहकर बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाते हैं। कक्षाओं में पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षण कार्य कराया जाता है और बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है।

शिक्षकों द्वारा बच्चों को सरल और रोचक तरीके से पढ़ाया जाता है ताकि वे विषयों को आसानी से समझ सकें। कमजोर विद्यार्थियों पर अलग से ध्यान देकर उन्हें अतिरिक्त सहयोग भी दिया जाता है।

मीनू के अनुसार दिया जा रहा मध्यान्ह भोजन

विद्यालय में सरकार द्वारा निर्धारित मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना का पालन पूरी गंभीरता से किया जा रहा है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि बच्चों को प्रतिदिन निर्धारित मीनू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

मध्यान्ह भोजन का उद्देश्य केवल बच्चों की भूख मिटाना नहीं, बल्कि उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर स्वस्थ रखना भी है। विद्यालय प्रशासन इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि भोजन समय पर तैयार हो तथा उसकी गुणवत्ता बनी रहे।

विद्यालय का अनुशासित वातावरण

विद्यालय परिसर में साफ-सफाई, अनुशासन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चे समय पर विद्यालय पहुंचते हैं और प्रार्थना सभा के बाद अपनी-अपनी कक्षाओं में जाकर नियमित रूप से अध्ययन करते हैं।

विद्यालय के समस्त शिक्षक अपने-अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करते हुए बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगे हुए हैं।

शिक्षकों की मेहनत ला रही सकारात्मक परिणाम

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी विद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षकों द्वारा समय-समय पर अभिभावकों से संपर्क करने और बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। इससे गांव में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है।

ग्रामीणों ने की पहल की सराहना

विद्यालय में चल रहे शैक्षणिक प्रयासों और अनुशासित व्यवस्था की ग्रामीणों ने खुलकर प्रशंसा की है। उनका कहना है कि जब शिक्षक पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं तो उसका सीधा लाभ बच्चों को मिलता है।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विद्यालय इसी प्रकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, बच्चों की उपस्थिति सुधारने और नामांकन में वृद्धि के लिए कार्य करता रहेगा।

शिक्षा से बदलेगा गांव का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी समाज के विकास की नींव होती है। यदि बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें और अभिभावक भी विद्यालय से जुड़े रहें, तो भविष्य में बेहतर परिणाम सामने आते हैं।

प्राथमिक विद्यालय इटाला में चल रहे प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा सकते हैं। विद्यालय प्रशासन, शिक्षक और अभिभावकों के सामूहिक सहयोग से बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा रहा है।

निष्कर्ष

कौशांबी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय इटाला में शिक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयास यह दर्शाते हैं कि यदि विद्यालय प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक मिलकर कार्य करें तो सरकारी विद्यालयों में भी उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जा सकता है। नामांकन बढ़ाने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, मीनू के अनुसार मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन पर विशेष ध्यान देने जैसी पहलें निश्चित रूप से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं। ग्रामीणों द्वारा शिक्षकों की सराहना इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय की मेहनत समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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