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मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का बड़ा खुलासा, कई जिलों तक फैला नेटवर्क; विदेश यात्राओं से जुड़े तार

भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट तैयार कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में सामने आया है कि एक संगठित गिरोह कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और गलत पते के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर रहा था। जांच में ऐसे पासपोर्ट भी सामने आए हैं, जिनका इस्तेमाल विदेश यात्रा के लिए किया गया।

प्रारंभिक जांच के मुताबिक इस नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश के कई जिलों से जुड़े हुए हैं। इनमें ग्वालियर जिले का डबरा और राजधानी भोपाल प्रमुख रूप से सामने आए हैं। STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर पासपोर्ट जारी होने तक की प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर मदद मिली।

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एक पते से जुड़े मिले 14 पासपोर्ट

जांच के दौरान STF को डबरा क्षेत्र में एक ऐसा पता मिला, जिससे कथित तौर पर 14 अलग-अलग पासपोर्ट जुड़े हुए थे। खास बात यह रही कि इन पासपोर्ट से संबंधित जानकारी में एक ही फोन नंबर का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है।

जांच एजेंसियों के लिए यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अलग-अलग व्यक्तियों के पासपोर्ट में एक ही पते और संपर्क नंबर का बार-बार सामने आना सामान्य प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। STF अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पते का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और वहां से जुड़े लोगों की वास्तविक पहचान क्या है।

भोपाल के मठ के पते से जुड़े 40 पासपोर्ट

जांच में इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य भोपाल से सामने आया। STF के अनुसार करीब 40 पासपोर्ट ऐसे पाए गए, जिनका संबंध एक मठ के पते से बताया जा रहा है। एक ही स्थान के पते पर इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट का जुड़ना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

अधिकारियों की नजर अब इस बात पर है कि इन पासपोर्ट में दर्ज व्यक्तियों का वास्तव में उस पते से कोई संबंध था या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि संबंधित दस्तावेजों में पते और पहचान से जुड़ी जानकारी किस तरह सत्यापित हुई।

कई देशों की यात्रा से जुड़े दस्तावेज

STF की जांच में सामने आए फर्जी पासपोर्टों का इस्तेमाल केवल घरेलू स्तर पर नहीं हुआ, बल्कि इनके जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्राएं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच में थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों से जुड़े यात्रा रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है।

इस तथ्य ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन पासपोर्ट धारकों की वास्तविक पहचान क्या थी, वे किन उद्देश्यों से विदेश गए और विदेश यात्रा के दौरान उन्होंने किन गतिविधियों को अंजाम दिया।

हालांकि जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। इसलिए सामने आए तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या उद्देश्य के बारे में अंतिम दावा जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।

महाराष्ट्र से दो संदिग्ध गिरफ्तार

फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही है। STF ने नेटवर्क से जुड़े दो लोगों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। इन गिरफ्तारियों के बाद एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के माध्यम से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

STF अलग-अलग राज्यों में मौजूद संभावित सहयोगियों और संदिग्धों की तलाश भी कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क एक से अधिक स्थानों से संचालित हो सकता है और इसमें अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।

चार जिलों तक फैले नेटवर्क की जांच

जांच के दौरान यह संकेत मिला है कि फर्जी पासपोर्ट से जुड़ा पूरा नेटवर्क मध्य प्रदेश के कम से कम चार जिलों में सक्रिय रहा हो सकता है। डबरा और भोपाल के अलावा अन्य स्थानों से मिले सुरागों को भी जोड़ा जा रहा है।

जांच एजेंसी अब दस्तावेजों, पते, मोबाइल नंबरों और पासपोर्ट संबंधी रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर रही है। इसका उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी पहचान या दस्तावेजों के माध्यम से पासपोर्ट हासिल करने में भूमिका निभाई।

बायोमेट्रिक सत्यापन पर भी उठे सवाल

फर्जी पासपोर्ट मामले का सबसे गंभीर पहलू पासपोर्ट जारी करने की सुरक्षा प्रक्रिया से जुड़ा है। पासपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में STF यह जांच रही है कि कथित फर्जी दस्तावेज इन प्रक्रियाओं को पार करके पासपोर्ट तक कैसे पहुंचे।

जांच एजेंसी विशेष रूप से बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पर ध्यान दे रही है। सवाल यह है कि यदि दस्तावेज जाली थे, तो उनकी पहचान समय रहते क्यों नहीं हो सकी।

STF इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं किसी स्तर पर नियमों को दरकिनार करने में अंदरूनी मदद तो नहीं मिली। हालांकि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यह जांच का विषय है और इसके परिणाम के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

STF DIG राहुल कुमार लोढ़ा ने दी जांच की जानकारी

STF के DIG राहुल कुमार लोढ़ा के अनुसार जांच अभी जारी है। एजेंसी आरोपियों की पृष्ठभूमि, उनके मूल स्थान और नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही है। जांच का एक अहम उद्देश्य यह पता लगाना है कि संदिग्ध लोग मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं और उन्होंने कथित तौर पर फर्जी पहचान का सहारा क्यों लिया।

इसके साथ ही STF यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों के लिए पासपोर्ट तैयार करवाए और अब तक कितने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मामला

फर्जी पासपोर्ट का मामला केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं माना जा सकता। जब किसी फर्जी पहचान के जरिए कोई व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करता है तो मामला देश की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान सत्यापन से भी जुड़ जाता है।

इसी वजह से STF की जांच में पासपोर्ट जारी होने की पूरी प्रक्रिया के साथ-साथ विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों का नेटवर्क विदेश में किसी व्यक्ति या समूह से जुड़ा था या नहीं।

जांच के आगे बढ़ने के साथ खुलेंगे कई राज

फिलहाल STF गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अलग-अलग राज्यों में संभावित आरोपियों की तलाश भी जारी है। आने वाले दिनों में जांच के विस्तार के साथ नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और इसमें शामिल लोगों की संख्या के बारे में अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही पते और फोन नंबर से इतने पासपोर्ट कैसे जुड़े और कथित फर्जी दस्तावेजों के बावजूद सत्यापन की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।

फिलहाल STF पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का ध्यान नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने की व्यवस्था का पता लगाने और यह समझने पर है कि इस कथित रैकेट ने पासपोर्ट प्रणाली में मौजूद किन कमियों का फायदा उठाया। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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