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“भारत की ‘गोल्डन गर्ल’ मीराबाई चानू ने रचा इतिहास! ग्लासगो CWG 2026 में जीता तीसरा लगातार स्वर्ण, राष्ट्रगान के दौरान छलक पड़े आँसू”

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AI Generated Photo

भारतीय खेल इतिहास में 26 जुलाई 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं की 48 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर न केवल नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया, बल्कि लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली वेटलिफ्टर भी बन गईं।

मीराबाई चानू की इस शानदार उपलब्धि ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों का खाता भी खोल दिया है। उनकी जीत के साथ पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई और राष्ट्रगान के दौरान मंच पर उनकी भावुक तस्वीर करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बन गई।


🏅 लगातार तीसरी बार जीता कॉमनवेल्थ गोल्ड

मीराबाई चानू ने इससे पहले गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। अब ग्लासगो 2026 में जीत के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्णिम हैट्रिक पूरी कर ली है।

यह उपलब्धि भारतीय वेटलिफ्टिंग के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है। लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतना उनकी असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और वर्षों की कठिन मेहनत का प्रमाण है।


💪 रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन से जीता स्वर्ण

ग्लासगो में आयोजित मुकाबले में मीराबाई चानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन नए गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम किए—

उनका प्रदर्शन शुरुआत से ही दबदबे वाला रहा और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।


🥇 कॉमनवेल्थ गेम्स में चार पदकों की मालिक बनीं चानू

मीराबाई चानू का कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। अब तक उन्होंने चार पदक अपने नाम किए हैं—

इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।


😢 राष्ट्रगान के दौरान भावुक हुईं मीराबाई

स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब पुरस्कार मंच पर भारतीय राष्ट्रगान बजा, तो मीराबाई चानू की आंखें नम हो गईं। वर्षों की मेहनत, चोटों से संघर्ष, कठिन प्रशिक्षण और सख्त अनुशासन की यादें उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थीं।

उनकी भावुक तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और खेल प्रेमी उन्हें भारतीय खेलों की “गोल्डन गर्ल” कहकर सम्मानित कर रहे हैं।


⚠️ आसान नहीं था यह सफर

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स का यह स्वर्ण पदक मीराबाई के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। उन्होंने चोटों से उबरते हुए अपनी फिटनेस बनाए रखी और वजन वर्ग के अनुसार खुद को तैयार करने के लिए लंबे समय तक कठोर डाइट और प्रशिक्षण का पालन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत केवल शारीरिक क्षमता नहीं, बल्कि उनकी मानसिक मजबूती और अदम्य इच्छाशक्ति का भी परिणाम है।


🇮🇳 देशभर से मिली बधाइयाँ

मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई नेताओं ने भी उनकी मेहनत, समर्पण और संघर्ष की सराहना की है।


📌 निष्कर्ष

मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जुनून, अनुशासन और निरंतर प्रयास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका तीसरा लगातार स्वर्ण पदक न केवल भारत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उनकी यह ऐतिहासिक जीत भारतीय खेलों के स्वर्णिम भविष्य की एक शानदार झलक प्रस्तुत करती है।

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