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मोहनी की गौशाला में व्यवस्थाओं पर सवाल, चारा-पानी और सरकारी खर्च की जांच की मांग

रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 16 सितंबर 2026

मऊ, चित्रकूट। ग्राम पंचायत मोहनी की गौशाला में गोवंश की देखभाल और उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौशाला में निराश्रित पशुओं को आश्रय देने की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन उनकी संख्या के अनुपात में चारा, पानी, साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं पर्याप्त हैं या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने के साथ-साथ गौशाला से जुड़े सरकारी खर्च और पंचायत के अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक, निराश्रित गोवंश को खुले में भटकने से बचाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत स्तर पर गौशालाओं का संचालन किया जाता है। इन स्थानों पर पशुओं के भोजन, पेयजल, आश्रय, साफ-सफाई और आवश्यक देखभाल की व्यवस्था की जानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद यदि मौके पर मूलभूत सुविधाओं में कमी मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पशुओं के चारे को लेकर उठे सवाल

मोहनी के ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में मौजूद गोवंश के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि पशुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन आवश्यक भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गौशाला में आने वाले चारे का रिकॉर्ड और उसके वितरण का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुओं के लिए केवल सूखा भूसा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त व्यवस्था का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मौसम और पशुओं की जरूरत के अनुसार भोजन की गुणवत्ता तथा पर्याप्तता पर भी ध्यान देना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकारी निरीक्षण के दौरान उपलब्ध चारे का भौतिक सत्यापन करें और रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा से उसका मिलान कराएं।

पेयजल व्यवस्था की भी जांच की मांग

गौशाला में पशुओं के लिए पर्याप्त और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में गोवंश होने की स्थिति में नियमित पेयजल व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निरीक्षण के दौरान पानी के स्रोत, पशुओं के लिए रखे जाने वाले पानी के पात्र और उसकी नियमित उपलब्धता की स्थिति देखी जाए। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए, ताकि गौशाला में रहने वाले पशुओं को परेशानी न हो।

साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी ध्यान देने की मांग

ग्रामीणों ने गौशाला परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पशुओं के रहने वाले स्थान पर नियमित सफाई, जल निकासी और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना जरूरी है। गंदगी या जलभराव की स्थिति होने पर पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि बीमार या कमजोर पशुओं की पहचान और उनके उपचार की व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि पशु चिकित्सकों के निरीक्षण, दवाओं की उपलब्धता और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड भी जांचे जाएं।

सरकारी बजट के इस्तेमाल पर ग्रामीणों की नजर

गौशाला को लेकर उठ रहे सवालों का एक प्रमुख पहलू सरकारी धनराशि के उपयोग से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौशाला के संचालन के लिए सरकारी स्तर से धन उपलब्ध कराया जाता है तो उसका प्रभाव पशुओं की सुविधाओं में दिखाई देना चाहिए।

ग्रामीणों ने गौशाला से जुड़े खर्च का विवरण सामने रखने की मांग की है। उनका कहना है कि चारा, पानी, मजदूरी, दवाइयों, रखरखाव, मरम्मत और अन्य आवश्यक मदों में कितना पैसा खर्च हुआ, इसकी जानकारी संबंधित रिकॉर्ड से मिल सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जानने के लिए भुगतान संबंधी दस्तावेज, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

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ग्राम पंचायत के विकास कार्यों पर भी सवाल

मोहनी ग्राम पंचायत में गौशाला के अलावा अन्य विकास कार्यों को लेकर भी कुछ ग्रामीणों ने पारदर्शिता की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पंचायत को अलग-अलग योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित कार्यों में होना चाहिए और कार्यों की जानकारी ग्रामीणों तक भी पहुंचनी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य सार्वजनिक कार्यों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कागजी रिकॉर्ड के साथ वास्तविक स्थल पर जाकर कार्यों की स्थिति देखना अधिक प्रभावी जांच का हिस्सा हो सकता है।

ग्राम प्रधान के कार्यकाल को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत मोहनी की वर्तमान ग्राम प्रधान चुन्नी देवी और उनके पति छक्की लाल से जुड़े पंचायत संचालन को लेकर भी कुछ आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। संबंधित अभिलेखों और कार्यों का सत्यापन ही यह स्पष्ट कर सकता है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

अचानक निरीक्षण कराने की मांग

ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग है कि प्रशासनिक अधिकारी बिना पूर्व सूचना के गौशाला का निरीक्षण करें। उनका कहना है कि ऐसे निरीक्षण में मौके पर मौजूद गोवंश की वास्तविक संख्या दर्ज की जाए और उसे सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाए।

इसके अलावा चारे का स्टॉक, पानी की व्यवस्था, सफाई, पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति, आश्रय की स्थिति तथा कर्मचारियों की मौजूदगी की भी जांच की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि मौके की स्थिति और सरकारी अभिलेखों का मिलान करने से कई सवालों का जवाब मिल सकता है।

रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट हो सकती है स्थिति

गौशाला से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पशुओं की संख्या का रजिस्टर, चारे की खरीद और वितरण का विवरण, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, दवाओं की खरीद, श्रमिकों के भुगतान तथा रखरखाव से संबंधित खर्च की जांच की जा सकती है।

यदि दस्तावेज और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। दूसरी ओर यदि जांच में सभी व्यवस्थाएं और खर्च नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं तो ग्रामीणों की आशंकाएं भी दूर हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने पारदर्शी जांच की मांग दोहराई

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि गौशाला में रखे गए पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित कराना है। वे चाहते हैं कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराए और यदि कोई कमी सामने आए तो उसे दूर कराया जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। इससे पंचायत प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

मोहनी ग्राम पंचायत की गौशाला को लेकर सामने आए आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं। चारा, पानी, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों का वास्तविक उत्तर आधिकारिक निरीक्षण तथा रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा।

प्रशासन यदि गौशाला का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ वित्तीय और प्रशासनिक अभिलेखों का परीक्षण करता है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। जांच के दौरान यदि कमियां मिलती हैं तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं और यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो ग्रामीणों के बीच बनी शंकाओं का समाधान भी हो सकता है।

फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि गौशाला में मौजूद गोवंश को पर्याप्त भोजन और स्वच्छ पानी मिले, परिसर की नियमित सफाई हो, बीमार पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए तथा पंचायत से संबंधित सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और प्रस्तावित जांच पर हैं, जिसके बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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