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MPSC भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का आरोप, ड्रग इंस्पेक्टर और ग्रुप-B परीक्षा रद्द

मुंबई: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया एक कथित प्रश्नपत्र लीक मामले के कारण विवादों में आ गई है। आयोग ने ड्रग इंस्पेक्टर और ग्रुप-B भर्ती से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम के बाद हजारों अभ्यर्थियों को अब दोबारा परीक्षा की तारीख का इंतजार है।

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परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर पेपर पहुंचने का दावा

जानकारी के अनुसार, संबंधित परीक्षा 22 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी। आरोप है कि परीक्षा से करीब दो दिन पहले, यानी 20 मार्च को प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया था।

प्रश्नपत्र के कथित रूप से परीक्षा से पहले उपलब्ध होने की जानकारी सामने आने के बाद अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी बढ़ी। छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और परीक्षा दोबारा कराने की मांग की।

शिकायतों के बाद पुलिस में मामला

मामले को लेकर छात्रों और राजनीतिक नेताओं की ओर से शिकायतें सामने आने के बाद MPSC ने 27 जुलाई 2026 को मुंबई पुलिस के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की। सामने आई जानकारी के मुताबिक, जांच में ऐसे संकेत मिले कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच मिल गई थी। यदि यह तथ्य जांच में पूरी तरह साबित होता है, तो इससे संबंधित उम्मीदवारों को अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में अनुचित लाभ मिला होगा।

परीक्षा रद्द होने से छात्रों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

परीक्षा रद्द किए जाने को उन अभ्यर्थियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जो लंबे समय से निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे थे। हालांकि, दूसरी ओर हजारों छात्रों को अपनी तैयारी फिर से करनी होगी और नई परीक्षा की तारीख का इंतजार करना पड़ेगा।

कई उम्मीदवारों के लिए यह केवल परीक्षा दोबारा देने का मामला नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में समय और मेहनत दोबारा लगाने की चुनौती भी है।

दोबारा परीक्षा के लिए नहीं देना होगा शुल्क

अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए MPSC ने स्पष्ट किया है कि पुनः आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को दोबारा पंजीकरण कराने या अतिरिक्त परीक्षा शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी

इस फैसले से उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने पहले ही आवेदन प्रक्रिया पूरी कर शुल्क जमा किया था।

करीब 90 प्रश्न लीक होने का दावा

छात्र प्रतिनिधियों की ओर से मामले की गहराई से जांच की मांग की गई है। एक दावा यह भी सामने आया है कि 200 में से करीब 90 प्रश्न कथित तौर पर परीक्षा से पहले लीक हो गए थे।

छात्र संगठनों ने मामले की फॉरेंसिक जांच कराने और कथित पेपर लीक से जुड़े कोचिंग सेंटरों, बिचौलियों तथा अन्य संभावित नेटवर्क की भूमिका की जांच करने की मांग की है।

हालांकि, प्रश्नपत्र के कितने प्रश्न वास्तव में लीक हुए और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

राजनीतिक मुद्दा भी बना मामला

MPSC परीक्षा विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। विपक्षी नेताओं और अन्य राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सरकार तथा संबंधित संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के संघर्ष और विरोध का उल्लेख करते हुए इसे अभ्यर्थियों की जीत के रूप में पेश किया है।

वहीं, भर्ती प्रक्रिया में किसी विशेष व्यक्ति या समूह को फायदा पहुंचाने जैसे राजनीतिक आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संभव होगी।

सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक की बड़ी चिंता

MPSC विवाद ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में हजारों उम्मीदवार समान परिस्थितियों में परीक्षा देते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिल जाता है, तो पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

छात्रों और विशेषज्ञों की ओर से परीक्षा सामग्री की छपाई, सुरक्षित भंडारण, परिवहन और डिजिटल माध्यमों से उसकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग उठ रही है।

नई परीक्षा की तारीख का इंतजार

अब अभ्यर्थियों की निगाहें MPSC की अगली आधिकारिक अधिसूचना पर हैं। आयोग द्वारा पुनः आयोजित परीक्षा की तारीख, प्रक्रिया और अन्य आवश्यक जानकारी जारी किए जाने की उम्मीद है।

नई परीक्षा से पहले कथित पेपर लीक की जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि अभ्यर्थी चाहते हैं कि अगली परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण में आयोजित हो।

निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया बहाल करना चुनौती

परीक्षा रद्द करना तत्काल विवाद का समाधान हो सकता है, लेकिन अभ्यर्थियों का विश्वास वापस हासिल करना इससे बड़ी चुनौती है। इसके लिए जांच में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी।

हजारों उम्मीदवारों के लिए अब उम्मीद यही है कि अगली परीक्षा बिना किसी अनियमितता के आयोजित हो और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। MPSC की आगामी अधिसूचना इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम होगी।

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