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नेपाल में भोतेकोशी बाढ़ का कहर: 475 शव बरामद, राहत और बचाव अभियान जारी

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भोतेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव के बाद कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 475 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लगातार बदलती परिस्थितियों को देखते हुए राहत कार्यों में लगे जवानों और आम नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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475 शव मिलने से बढ़ी चिंता

भोतेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद कई स्थानों पर पानी का बहाव इतना तेज रहा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बाढ़ के कारण सड़कें, संपर्क मार्ग और अन्य जरूरी ढांचे प्रभावित हुए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं।

नेपाल पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अब तक 475 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है, क्योंकि कई इलाकों में राहत दलों की पहुंच अभी पूरी तरह संभव नहीं हो पाई है।

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और लोगों की तलाश करने का काम लगातार किया जा रहा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री और बचाव दलों को पहुंचाना है।

सैकड़ों पर्यटक और यात्री लापता

नेपाल पर्यटन बोर्ड की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 667 पर्यटक और यात्री लापता बताए गए थे। इनमें नेपाल के 127 निवासी भी शामिल हैं। इस आंकड़े ने राहत एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।

नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में यात्रा करते हैं। बाढ़ के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित होने से यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन लापता लोगों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर खोज अभियान चला रहा है।

राहत एजेंसियां स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों की जानकारी जुटा रही हैं। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लापता लोगों से संपर्क करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

1,545 लोग घायल और बचाए गए

नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ के दौरान 1,545 लोगों को घायल अवस्था में बचाया गया। घायलों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

बाढ़ जैसी आपदा के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है, जिनके घर पानी की चपेट में आ जाते हैं या जो सड़क संपर्क टूटने के कारण दूसरे इलाकों में फंस जाते हैं। ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पुलिस, सेना और अन्य बचाव दलों को लगाया गया है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की जान बचाना और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

त्रिशूली क्षेत्र में भी बढ़ा खतरा

भोतेकोशी बाढ़ के बीच नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की सूचना सामने आई। नदी के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

नेपाल पुलिस ने लोगों से नदी और जलस्रोतों के आसपास नहीं जाने की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।

इसी वजह से राहत एवं बचाव अभियान में लगे वाहनों तथा कर्मचारियों को भी कुछ क्षेत्रों से वापस बुलाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक परिस्थितियां सुरक्षित नहीं होतीं, तब तक निर्माण और सड़क मरम्मत जैसे कामों को रोकना जरूरी है।

तिब्बत की ओर से पानी आने की चेतावनी

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए नेपाल पुलिस ने तिब्बत की ओर स्थित जल संरचना से पानी छोड़े जाने या बांध से संबंधित खतरे को लेकर भी चेतावनी जारी की। पुलिस ने सुरक्षा कर्मियों, राहत कर्मचारियों और आम लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की।

ऐसे हालात में नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने को कहा है।

भूकंप के बाद भी बढ़ी सतर्कता

इसी दौरान चीन के सिचुआन प्रांत में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किए जाने की खबर भी सामने आई। भूकंप का केंद्र लोंगचांग शहर के आसपास बताया गया। इसके बाद नेपाल के कुछ हिस्सों में भी संभावित जल प्रवाह को लेकर प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती।

पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप, भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं। इसलिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी अतिरिक्त खतरे की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।

सभी निर्माण और सड़क कार्य रोके गए

नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल सामान्य गतिविधियों को सीमित कर दिया गया है। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण जैसे काम भी रोक दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पानी का स्तर दोबारा बढ़ने की आशंका के कारण बचाव कर्मियों को भी जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने को कहा गया है।

इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की गति पर असर पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का मानना है कि बचाव दलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

सेना और पुलिस ने बढ़ाया बचाव अभियान

नेपाल सेना और पुलिस की टीमें आपदा के बाद से लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की तलाश करने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

मलबे और खराब सड़क परिस्थितियों के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की टीमें उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से अभियान जारी रखे हुए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खतरे वाले इलाकों में वापस जाने की कोशिश न करें और बचाव दलों के निर्देशों का पालन करें।

आगे भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं हालात

भोतेकोशी बाढ़ ने नेपाल के सामने एक बड़ी मानवीय और प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर दी है। सैकड़ों लोगों की मौत, बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने और कई यात्रियों के लापता होने से राहत अभियान का दायरा काफी बढ़ गया है।

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लापता लोगों की तलाश, घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है। साथ ही नदियों के जलस्तर और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी पर लगातार नजर रखी जा रही है।

भोतेकोशी की यह त्रासदी एक बार फिर बताती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ कितनी तेजी से बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती है। आने वाले समय में राहत एवं पुनर्वास के साथ-साथ ऐसे इलाकों में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित निकासी व्यवस्था को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण होगा।

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