नई दिल्ली: कोरोना महामारी के दौरान आजीविका प्रभावित होने से सबसे अधिक परेशानी का सामना करने वाले छोटे कारोबारियों और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले विक्रेताओं को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना ने देश के शहरी स्ट्रीट वेंडर्स के लिए वित्तीय सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम तैयार किया है। सरकार की ओर से जारी ताजा जानकारी के अनुसार, 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
इस योजना के तहत अब तक 1.15 करोड़ से अधिक बिना किसी गारंटी वाले ऋण वितरित किए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹18,475 करोड़ से अधिक है। योजना का उद्देश्य केवल छोटे कारोबारियों को तत्काल कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने व्यवसाय को दोबारा खड़ा करने, बढ़ाने और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद करना भी है।
1 जून 2020 को शुरू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की शुरुआत 1 जून 2020 को की गई थी। उस समय देश कोरोना महामारी के गंभीर आर्थिक प्रभाव से गुजर रहा था। लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों के कारण सड़क किनारे सामान बेचने वाले, ठेले लगाने वाले, रेहड़ी-पटरी कारोबारी और अन्य छोटे विक्रेताओं की रोजमर्रा की आय पर बड़ा असर पड़ा था।
ऐसे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना काम दोबारा शुरू करने के लिए पूंजी जुटाने की थी। बहुत से स्ट्रीट वेंडर्स के पास बैंक से ऋण लेने के लिए संपार्श्विक या बड़ी संपत्ति जैसी गारंटी उपलब्ध नहीं होती थी।
इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए PM SVANidhi को शुरू किया गया। इसका मूल उद्देश्य पात्र शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को बिना संपार्श्विक के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था, ताकि वे अपनी रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकें।
76.95 लाख विक्रेताओं तक पहुंचा लाभ
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स योजना का लाभ उठा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि योजना ने शहरी क्षेत्रों में छोटे कारोबारियों के एक बड़े वर्ग तक अपनी पहुंच बनाई है।
स्ट्रीट वेंडिंग भारत के शहरी आर्थिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फल-सब्जी बेचने वाले, चाय-नाश्ता विक्रेता, छोटे खाद्य कारोबारी, कपड़े या घरेलू सामान बेचने वाले और विभिन्न प्रकार की स्थानीय सेवाएं देने वाले अनेक लोग अपने परिवार की आय के लिए इसी तरह के छोटे कारोबार पर निर्भर रहते हैं।
इन कारोबारों में अपेक्षाकृत कम पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन रोजाना की खरीद-बिक्री के लिए कार्यशील पूंजी लगातार आवश्यक रहती है। ऐसे में छोटे ऋण कारोबार को चालू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
1.15 करोड़ से अधिक बिना गारंटी ऋण
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका बिना संपार्श्विक ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान है। सरकारी जानकारी के अनुसार अब तक 1.15 करोड़ से अधिक ऋण वितरित किए जा चुके हैं।
इन ऋणों की कुल राशि ₹18,475 करोड़ से अधिक बताई गई है। इससे पता चलता है कि योजना के माध्यम से छोटे कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर संस्थागत वित्त पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ना छोटे कारोबारियों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण हो सकता है। औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने पर कारोबारियों को भविष्य में अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने का अनुभव और अवसर मिलता है।
कार्यशील पूंजी की जरूरत क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी भी छोटे कारोबार को चलाने के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। स्ट्रीट वेंडर्स को प्रतिदिन या नियमित रूप से सामान खरीदना, परिवहन का खर्च उठाना और अपने व्यवसाय से जुड़ी दूसरी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करना पड़ता है।
उदाहरण के तौर पर फल-सब्जी बेचने वाले विक्रेता को रोजाना नया माल खरीदना पड़ सकता है। इसी तरह चाय-नाश्ते का कारोबार करने वाले व्यक्ति को खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान की खरीद करनी होती है।
यदि कारोबार में पूंजी की कमी हो जाए तो विक्रेता की बिक्री क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए छोटे और समय पर उपलब्ध ऋण से कारोबारी अपनी गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम हो सकते हैं।
योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
PM SVANidhi को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका व्यापक प्रभाव शहरी अर्थव्यवस्था और छोटे कारोबारियों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।
स्ट्रीट वेंडर्स स्थानीय बाजार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे उपभोक्ताओं को कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं और सेवाएं अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध कराते हैं। इनके कारोबार से सीधे तौर पर परिवारों की आय जुड़ी होती है।
जब किसी छोटे विक्रेता का कारोबार चलता है तो उसका आर्थिक लाभ उसके परिवार के साथ-साथ स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला तक भी पहुंचता है। वह जिन उत्पादों को खरीदता है, उनके आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन सेवाओं और अन्य छोटे कारोबारियों के लिए भी मांग पैदा होती है।
इस लिहाज से छोटे कारोबारियों को पूंजी उपलब्ध कराने का प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक हो सकता है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
योजना के नाम में ही आत्मनिर्भर निधि की अवधारणा शामिल है। इसका उद्देश्य छोटे विक्रेताओं को ऐसी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जिससे वे किसी बड़ी पूंजी या संपत्ति के बिना अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकें।
स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कारोबार ही उनकी आय का प्रमुख माध्यम होता है। इसलिए उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रयासों को मजबूत कर सकता है।
हालांकि, ऋण प्राप्त करने के बाद उसका उचित इस्तेमाल और समय पर भुगतान भी महत्वपूर्ण होता है। इससे लाभार्थियों के लिए भविष्य में औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच के अवसर बेहतर हो सकते हैं।
डिजिटल और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव
आधुनिक समय में छोटे कारोबारियों का डिजिटल भुगतान और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ना भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने पर कारोबारियों के लेनदेन अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज हो सकते हैं।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्राहकों को भुगतान के अधिक विकल्प मिलते हैं और छोटे कारोबारियों को नकद पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इस तरह PM SVANidhi जैसी पहल को व्यापक वित्तीय समावेशन की दिशा में भी देखा जा सकता है, जहां छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
आगे की चुनौती
योजना के आंकड़े बड़े पैमाने पर पहुंच और ऋण वितरण को दर्शाते हैं, लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी बनी रहती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि पात्र स्ट्रीट वेंडर्स तक योजना की जानकारी और सुविधा लगातार पहुंचती रहे।
इसके अलावा ऋण का उपयोग कारोबार की वास्तविक जरूरतों के लिए हो, लाभार्थियों को वित्तीय प्रबंधन की जानकारी मिले और वे समय पर ऋण चुकाने में सक्षम हों, यह भी महत्वपूर्ण है।
सरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद छोटे कारोबारियों तक पहुंचे और आवेदन तथा ऋण प्रक्रिया उनके लिए सरल बनी रहे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय मंच तैयार किया है। 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख विक्रेताओं को लाभ और 1.15 करोड़ से अधिक बिना गारंटी ऋणों का वितरण इस योजना के बड़े स्तर पर क्रियान्वयन को दर्शाता है। कुल ₹18,475 करोड़ से अधिक की ऋण राशि छोटे कारोबारियों की आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने में इस्तेमाल हुई है।
इस योजना का महत्व केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें अपने व्यवसाय को बनाए रखने के लिए पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में योजना की सफलता इस बात से भी तय होगी कि लाभार्थियों को ऋण के साथ वित्तीय जागरूकता, डिजिटल लेनदेन और कारोबार को मजबूत करने के लिए आवश्यक सहयोग कितनी प्रभावी तरीके से मिलता है।
