
पुणे: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पुणे में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान छात्रों, महिलाओं और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में व्यापक नाराजगी है और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिशों का विरोध किया जाएगा।
खेड़ा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में छात्राओं से शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार जैसे मुद्दों पर संवाद किया जाना है। कार्यक्रम को पुलिस की अनुमति मिली है, हालांकि इसके साथ कई शर्तें भी लगाई गई हैं।
गर्ल्स हॉस्टल में प्रवेश का आरोप
प्रेस ब्रीफिंग में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि पुणे के COEP विश्वविद्यालय स्थित एक छात्रावास में रात के समय ABVP से जुड़े कुछ लोग कथित तौर पर पहुंचे। उनके मुताबिक, वहां मौजूद छात्राओं पर दबाव बनाया गया और उनसे माफी मांगते हुए वीडियो रिकॉर्ड कराने की कोशिश की गई।
खेड़ा ने इस घटनाक्रम को छात्राओं को डराने-धमकाने की कोशिश बताया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की स्वतंत्र पुष्टि या विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के आधार पर उपलब्ध नहीं है।
छात्रवृत्ति को लेकर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों के पास छात्रवृत्ति से जुड़े वास्तविक सवाल हैं। उनका दावा था कि कुछ छात्र अपनी छात्रवृत्ति की राशि से संबंधित मुद्दे राहुल गांधी के सामने रखना चाहते थे।
खेड़ा के मुताबिक, छात्रों को अपनी समस्याएं उठाने और सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने वाले युवाओं को डराने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
NSUI कार्यकर्ताओं से मारपीट का आरोप
खेड़ा ने दावा किया कि छात्रों की सहायता के लिए NSUI के कुछ स्वयंसेवक मौके पर पहुंचे थे, लेकिन वहां कथित तौर पर बड़ी संख्या में ABVP कार्यकर्ताओं के साथ उनकी झड़प हुई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। खेड़ा ने प्रशासन से राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की अपील की।
60 कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर FIR का दावा
प्रेस ब्रीफिंग में खेड़ा ने दावा किया कि घटना के बाद करीब 60 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई। उन्होंने इन मुकदमों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि FIR या किसी प्रकार का दबाव कांग्रेस के छात्र मुद्दों को उठाने के अभियान को रोक नहीं सकता।
हालांकि, FIR की संख्या और आरोपों से संबंधित आधिकारिक पुलिस विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
‘छात्रों की गूंज’ को लेकर सियासत तेज
पुणे में राहुल गांधी का कार्यक्रम छात्रों, विशेष रूप से छात्राओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने 30 शर्तों के साथ अनुमति दी है। इनमें आपत्तिजनक बैनर या तस्वीरों पर रोक, धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसी शर्तें शामिल हैं।
इससे पहले पुणे पुलिस ने 18 अगस्त से 31 अगस्त तक शहर में कुछ प्रकार के सार्वजनिक जमावड़े और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया था। पुलिस ने इसके पीछे आगामी त्योहारों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को वजह बताया था, जबकि पवन खेड़ा ने इसे राहुल गांधी के कार्यक्रम को बाधित करने की कोशिश बताया था।
महिलाओं की आवाज और सुरक्षा का मुद्दा
खेड़ा ने प्रेस ब्रीफिंग में महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब महिलाएं सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दों पर आवाज उठाती हैं तो उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग, चरित्र पर सवाल और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
सरकार पर मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
पवन खेड़ा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह भ्रष्टाचार, युवाओं से जुड़े सवाल, रोजगार और अन्य गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों को सामने लाती है। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कांग्रेस के पुराने नेताओं और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई।
युवाओं को लेकर खेड़ा का दावा
खेड़ा ने कहा कि आज का युवा आसानी से डरने या बहकने वाला नहीं है। उनके अनुसार, देश का युवा अपनी शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े सवालों के जवाब चाहता है।
उन्होंने कहा कि जब किसी देश के युवा बड़ी संख्या में नाराज होते हैं तो यह राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि FIR, विरोध या दबाव के बावजूद कांग्रेस छात्रों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सवाल पूछने और लोकतांत्रिक तरीके से असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।
पुणे में होने वाला ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इसी अभियान का हिस्सा है। कांग्रेस ने इससे पहले कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी छात्रों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
इस पूरे मामले में लगाए गए राजनीतिक और संगठनात्मक आरोपों पर संबंधित पक्षों तथा पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल पुणे में छात्र मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव और बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
