रविकांत पाण्डेय
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली
दिनांक 11 सितंबर 2026
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के भदोखर थाना क्षेत्र में सामने आए शिवम यादव हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है। मामले में पुलिस ने मृतक के भतीजे सुभाष और उसके कथित साथी उपेन्द्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए गमछे को भी बरामद करने की बात कही है।
यह कार्रवाई भदोखर थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से की। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने मामले को पारिवारिक विवाद और कथित बदनामी से जोड़ दिया है। हालांकि, हत्या के पीछे बताए जा रहे कारणों और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
सई नदी के पास मिला था हत्या का सुराग
मामला भदोखर थाना क्षेत्र के कोरचंदामऊ-लोधवारी पुल के आसपास का है, जहां सई नदी के क्षेत्र में शिवम यादव की हत्या किए जाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, घटना को अंजाम देने के बाद शव को नदी में फेंक दिया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस पर जल्द से जल्द हत्यारों तक पहुंचने का दबाव था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने जांच के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया। भदोखर पुलिस के साथ एसओजी और सर्विलांस टीम ने भी जांच में सहयोग किया। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों को खंगाला।
चाचा-भतीजे के रिश्ते ने मामले को बनाया पेचीदा
पुलिस की पूछताछ के आधार पर इस हत्याकांड में मृतक शिवम यादव और गिरफ्तार आरोपी सुभाष के बीच चाचा-भतीजे का रिश्ता सामने आया है। पुलिस का कहना है कि पारिवारिक स्तर पर पहले से चल रही परिस्थितियों और कथित संबंधों को लेकर सुभाष नाराज था।
पुलिस के मुताबिक, सुभाष को आशंका थी कि शिवम के उसकी भाभी के साथ अनुचित संबंध थे। इसी बात को लेकर वह कथित तौर पर मानसिक तनाव और आक्रोश में था। पुलिस का दावा है कि सामाजिक बदनामी की आशंका और पारिवारिक विवाद ने उसके भीतर नाराजगी को बढ़ाया।
हालांकि, किसी व्यक्ति के निजी संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच में सामने आए इन दावों की सच्चाई का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
गड़े धन का लालच देकर बुलाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, सुभाष ने कथित तौर पर अपने साथी उपेन्द्र को योजना में शामिल किया। दोनों ने शिवम को ऐसी जगह बुलाने की योजना बनाई, जहां वारदात को अंजाम देना उनके लिए आसान हो सके।
जांच में पुलिस को पता चला कि 5 सितंबर की रात शिवम को कथित रूप से गड़े हुए धन के बारे में जानकारी देने का लालच देकर सई नदी के पास बुलाया गया था। स्थान के रूप में कोरचंदामऊ-लोधवारी पुल के आसपास का इलाका बताया गया है।
पुलिस का कहना है कि शिवम जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो दोनों आरोपियों ने कथित रूप से उस पर हमला किया और गमछे की मदद से उसकी जान ले ली। इसके बाद शव को सई नदी में फेंक दिए जाने का आरोप है। घटना के पीछे पहले से बनाई गई योजना होने की बात भी पुलिस ने कही है।
गमछे की बरामदगी का दावा
पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपियों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर हत्या में इस्तेमाल किए गए गमछे को बरामद किया गया।
किसी भी आपराधिक मामले में बरामद वस्तुओं की भूमिका जांच और फोरेंसिक परीक्षण के जरिए निर्धारित की जाती है। ऐसे में बरामद गमछे का घटना से संबंध भी जांच के साक्ष्यों और वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर स्पष्ट होगा।
तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया गया। सर्विलांस टीम ने उपलब्ध डिजिटल और तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया। इसके अलावा पुलिस टीम ने स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद आरोपियों की तलाश तेज की गई। इसी क्रम में दोनों संदिग्धों को कोरचंदामऊ के पास एक बाग के किनारे से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुभाष और उपेन्द्र के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ के बाद हत्या की कथित साजिश, घटनास्थल और वारदात के बाद उठाए गए कदमों को लेकर जानकारी जुटाई गई।
पुलिस की संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
इस पूरे मामले में भदोखर थाना पुलिस के साथ एसओजी और सर्विलांस टीम की भूमिका रही। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में टीमों ने अलग-अलग स्तर पर जांच की। एक ओर घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र से जानकारी जुटाई गई, वहीं दूसरी ओर तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों की जांच की गई।
पुलिस का दावा है कि जांच में मिले सुरागों को आपस में जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई शुरू की।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
गिरफ्तारी और पूछताछ की कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। पुलिस के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अब मामले में आगे की जांच के दौरान पुलिस कथित साजिश, हत्या की परिस्थितियों, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और बरामद वस्तुओं की भूमिका की पड़ताल करेगी। साथ ही, मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांचा जाएगा।
पारिवारिक विवाद से हत्या तक पहुंचा मामला
शिवम यादव हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पारिवारिक विवाद और सामाजिक दबाव किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं। पुलिस के अनुसार, इस मामले में कथित पारिवारिक नाराजगी और बदनामी की आशंका ने हत्या की साजिश को जन्म दिया।
हालांकि, पुलिस की कहानी और आरोपों का अंतिम परीक्षण अदालत में होगा। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को अभी आरोपी के रूप में ही देखा जाएगा और उनकी दोषसिद्धि न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
फिलहाल रायबरेली पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे और दो आरोपियों की गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। पुलिस द्वारा बरामद किए गए कथित हत्या के हथियार, तकनीकी साक्ष्य और अन्य जांच सामग्री आगे की कानूनी कार्रवाई में अहम भूमिका निभा सकती है। मामले की पूरी तस्वीर न्यायिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
