सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा (नसरुल्लागंज) में बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन सामने आया है। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सड़क पर उतरकर किराया कम करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि रोजाना बस से स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थानों तक पहुंचने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए बढ़ा हुआ किराया परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।
बस किराया बढ़ने से छात्र परेशान
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिदिन भेरूंदा और अन्य स्थानों पर पढ़ाई के लिए बसों से यात्रा करते हैं। ऐसे में किराए में वृद्धि का सीधा असर उनके दैनिक खर्च पर पड़ रहा है।
छात्रों का कहना है कि कई परिवार सीमित आय में बच्चों की शिक्षा का खर्च संभालते हैं। यदि आने-जाने का खर्च लगातार बढ़ता रहा, तो कुछ परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
सड़कों पर निकली छात्रों की रैली
बस किराया बढ़ोतरी के विरोध में विद्यार्थियों ने इलाके में रैली निकाली और बाद में बस स्टैंड पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने लगातार बस किराया कम करने की मांग को लेकर नारे लगाए।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। आईटीआई के छात्रों की भागीदारी भी बताई गई है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और बस संचालकों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने किराए में तत्काल राहत देने की मांग करते हुए संकेत दिया कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
विद्यार्थियों का कहना है कि परिवहन उनके लिए कोई विलासिता नहीं बल्कि शिक्षा तक पहुंचने की जरूरी सुविधा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए सार्वजनिक बस ही स्कूल और कॉलेज पहुंचने का प्रमुख साधन है।
शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में प्रदर्शन
भेरूंदा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा सीट से जुड़ा रहा है। इसी वजह से यहां हुआ छात्र आंदोलन राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।
इससे पहले विदिशा क्षेत्र में भी छात्रों द्वारा बस किराया बढ़ोतरी को लेकर विरोध किए जाने की बात सामने आई थी। वहां प्रशासन की ओर से छात्रों को राहत देते हुए उनके लिए प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी रोकने का निर्णय लिया गया था।
स्थानीय विधायक से नहीं मिल सका जवाब
मामले को लेकर स्थानीय विधायक का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक या उनके प्रतिनिधि की ओर से फोन कॉल का जवाब नहीं दिया गया।
ऐसे में छात्रों की मांग पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
ग्रामीण छात्रों के लिए बड़ी चुनौती
छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि वे आसपास के गांवों से प्रतिदिन लंबी दूरी तय करके शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। किराया बढ़ने से महीने के कुल यात्रा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
छात्रों का तर्क है कि यदि परिवहन महंगा होता गया, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
जनता के समर्थन का दावा
प्रदर्शन के दौरान छात्रों की मांग को स्थानीय लोगों का समर्थन मिलने की बात भी सामने आई। लोगों का कहना है कि विद्यार्थियों के लिए बस किराए में विशेष राहत देने से उनकी शिक्षा जारी रखने में मदद मिल सकती है।
प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन छात्रों की शिकायत पर क्या कदम उठाता है और क्या किराया बढ़ोतरी को लेकर कोई राहत दी जाती है।
प्रशासन के फैसले पर नजर
फिलहाल भेरूंदा में छात्रों का विरोध सार्वजनिक परिवहन की कीमत और शिक्षा की पहुंच के बीच संबंध को सामने ला रहा है। विद्यार्थियों की मांग है कि सरकार और प्रशासन उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बस किराए में राहत प्रदान करें।
अब सभी की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। यदि प्रशासन छात्रों के साथ बातचीत कर कोई समाधान निकालता है, तो लंबे समय से चल रही परेशानी को कम किया जा सकता है। वहीं, मांग पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में छात्र आंदोलन के आगे बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
