Site icon हिट एंड हॉट न्यूज़

🇮🇳 बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा को नई ताकत, सरकार ने मजबूत की कल्याण-स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था

AI generated photo

भारत तेजी से बदलती जनसंख्या संरचना के दौर से गुजर रहा है। देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में बुजुर्ग आबादी का हिस्सा और बड़ा होने वाला है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन को लेकर कई योजनाओं और पहलों को मजबूत किया है। अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) इसी व्यापक प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य केवल बुजुर्गों को सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सक्रिय जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

👴 बढ़ती बुजुर्ग आबादी ने बढ़ाई जिम्मेदारी

भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ने और जन्मदर में बदलाव के कारण वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उपलब्ध सरकारी अनुमानों के अनुसार 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी 2011 में करीब 10 करोड़ थी, जो 2036 तक बढ़कर लगभग 23 करोड़ हो सकती है। इस दौरान कुल आबादी में वरिष्ठ नागरिकों की हिस्सेदारी भी करीब 8.4 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

यह बदलाव केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं है। इसके साथ स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, आवास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन और देखभाल जैसी चुनौतियां भी बढ़ेंगी। इसलिए बुजुर्गों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था आने वाले भारत की बड़ी जरूरत बन चुकी है।

🏠 अटल वयो अभ्युदय योजना बनी बड़ा सहारा

सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराती है। इसके तहत जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल, मनोरंजन और सक्रिय जीवन से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

योजना के इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर सीनियर सिटिजन्स (IPSrC) के तहत पात्र संस्थाओं को वरिष्ठ नागरिक गृह, निरंतर देखभाल गृह, मोबाइल मेडिकेयर यूनिट और फिजियोथेरेपी क्लीनिक चलाने के लिए सहायता दी जाती है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिक गृहों में बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण देखभाल के लिए न्यूनतम मानक भी निर्धारित किए हैं।

PIB के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 से अब तक IPSrC के माध्यम से 6.98 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि योजना का दायरा केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़ी संख्या में बुजुर्गों तक सहायता पहुंच रही है।

🏥 बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष जोर

उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाइयों, फिजियोथेरेपी और विशेष चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ती है। सरकार की स्वास्थ्य संबंधी पहलों का उद्देश्य बुजुर्गों को उनकी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना है।

नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थकेयर ऑफ द एल्डरली (NPHCE) के तहत बुजुर्गों के लिए सामुदायिक स्तर से लेकर अस्पतालों और विशेष जेरियाट्रिक सेवाओं तक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को समय पर उपचार, देखभाल और आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना है।

इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें जटिल हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है।

🦽 राष्ट्रीय वयोश्री योजना से बढ़ी आत्मनिर्भरता

वरिष्ठ नागरिकों के लिए केवल इलाज ही पर्याप्त नहीं है। उम्र से जुड़ी शारीरिक परेशानियों के कारण कई बुजुर्गों को चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामों में सहायक उपकरणों की जरूरत पड़ती है।

इसी दिशा में राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) के तहत उम्र संबंधी दिव्यांगता से प्रभावित और निर्धारित आय सीमा वाले वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त भौतिक सहायक उपकरण और assisted-living devices उपलब्ध कराए जाते हैं।

PIB के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 से अब तक 7,68,749 वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना से लाभ मिला है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों की गतिशीलता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

☎️ Elderline 14567: मदद के लिए एक फोन कॉल

बुजुर्गों की सुरक्षा और सहायता के लिए Elderline National Helpline 14567 भी महत्वपूर्ण पहल है। यह हेल्पलाइन रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होती है।

PIB के अनुसार 1 अक्टूबर 2021 से शुरू होने के बाद इस हेल्पलाइन ने 8,41,734 वरिष्ठ नागरिकों को सेवाएं दी हैं। यह सेवा 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में उपलब्ध है और जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग तथा जरूरत पड़ने पर फील्ड इंटरवेंशन जैसी सहायता प्रदान करती है।

बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, उपेक्षा या किसी संकट की स्थिति में ऐसी व्यवस्था उनके लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।

🧑‍⚕️ प्रशिक्षित देखभाल कर्मियों की तैयारी

बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ प्रशिक्षित केयरगिवर्स की मांग भी बढ़ेगी। सरकार इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए PM-SPECIAL के तहत बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार कर रही है।

PIB के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में पहल शुरू होने के बाद से 38,893 जेरियाट्रिक केयरगिवर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे भविष्य में घर और assisted living व्यवस्था में बुजुर्गों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

💡 तकनीक और नवाचार को भी मिल रहा बढ़ावा

वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतें बदल रही हैं और तकनीक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की Seniorcare Ageing Growth Engine (SAGE) पहल के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने वाले पात्र स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

PIB के अनुसार इस पहल के तहत अब तक 9 स्टार्टअप्स को समर्थन दिया गया है। इसका उद्देश्य हेल्थकेयर, assisted living और age-friendly technology के क्षेत्र में नए समाधान विकसित करना है।

🤝 सिर्फ योजना नहीं, सम्मान भी जरूरी

वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण केवल आर्थिक सहायता या स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। बुजुर्गों को सम्मान, भावनात्मक सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव और निर्णय लेने में भागीदारी भी चाहिए।

संयुक्त परिवारों में बदलाव, शहरीकरण और रोजगार के कारण कई युवा अपने माता-पिता से दूर रहते हैं। ऐसे में बुजुर्गों के अकेलेपन और भावनात्मक जरूरतों पर भी ध्यान देना जरूरी हो जाता है। AVYAY का व्यापक उद्देश्य सक्रिय और उत्पादक वृद्धावस्था तथा पीढ़ियों के बीच मजबूत संबंधों को बढ़ावा देना भी है।

📌 आगे की चुनौती और बड़ी जिम्मेदारी

भारत की बुजुर्ग आबादी आने वाले वर्षों में और बढ़ने वाली है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों और अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों तक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और देखभाल सेवाओं की पहुंच विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी।

साथ ही परिवार, समाज, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था—सभी को मिलकर बुजुर्गों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना होगा। सरकारी योजनाएं तभी पूरी तरह सफल होंगी, जब उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक समय पर पहुंचे।

🇮🇳 निष्कर्ष

वरिष्ठ नागरिक किसी भी समाज की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि उसकी जीवित विरासत और अनुभव की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। सरकार द्वारा कल्याण, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, सहायक उपकरण, हेल्पलाइन, प्रशिक्षित केयरगिवर्स और तकनीकी नवाचार पर दिया जा रहा जोर इस बदलते जनसांख्यिकीय दौर में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत में बुजुर्गों की संख्या बढ़ना निश्चित है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि उम्र बढ़ने के साथ उनका सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा कम हो। सही नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और संवेदनशील सामाजिक सोच के साथ भारत ऐसा भविष्य बना सकता है, जहां बुजुर्ग केवल सहायता पाने वाले नागरिक नहीं, बल्कि सम्मान के साथ सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन जीने वाले समाज के महत्वपूर्ण स्तंभ हों।

Exit mobile version