नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। श्रीलंका नौसेना के कमांडर वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो 26 से 29 अगस्त 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। नौसेना प्रमुख के रूप में पदभार संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना तथा दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर और संस्थागत संबंधों को नई गति देना है।
साउथ ब्लॉक में हुआ औपचारिक स्वागत
भारत यात्रा के दौरान वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो का 27 अगस्त को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया गया। यह समारोह दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की गंभीरता और आपसी सम्मान को दर्शाता है। आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करना किसी विदेशी सैन्य अधिकारी की भारत यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इससे शहीद सैनिकों के प्रति सम्मान के साथ-साथ दोनों देशों के बीच साझा सुरक्षा हितों की भावना भी सामने आती है।
भारतीय नौसेना प्रमुख से हुई अहम बातचीत
यात्रा के दौरान श्रीलंका के नौसेना प्रमुख ने भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की। दोनों अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इनमें संयुक्त गतिविधियां, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे।
भारत और श्रीलंका दोनों हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल समुद्री क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, पेशेवर प्रशिक्षण और आपसी अनुभव साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर जोर
वाइस एडमिरल फर्नांडो के भारत दौरे का एक प्रमुख पहलू रक्षा सहयोग के नए अवसर तलाशना भी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वह भारत के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा भारतीय रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग और समन्वय की संभावनाओं को समझना है।
रक्षा क्षेत्र में बातचीत केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, क्षमता विकास और संस्थागत संपर्क जैसे कई पहलुओं को भी शामिल करती है। भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से रक्षा एवं समुद्री क्षेत्र में संपर्क रहा है। ऐसे में यह यात्रा मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही है।
कोच्चि भी जाएंगे श्रीलंका के नौसेना प्रमुख
भारत यात्रा के दौरान वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो के कोच्चि जाने का भी कार्यक्रम है। वहां वह भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों और दक्षिणी नौसेना कमान का दौरा करेंगे। इस कार्यक्रम का विशेष ध्यान प्रशिक्षण संबंधों और दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान को मजबूत करने पर रहेगा।
कोच्चि भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल है। यहां प्रशिक्षण और समुद्री गतिविधियों से जुड़े कई प्रमुख संस्थान हैं। ऐसे में श्रीलंका के नौसेना प्रमुख का दौरा दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच अनुभव साझा करने और प्रशिक्षण सहयोग को समझने का अवसर देगा।
हिंद महासागर में बढ़ते सहयोग का संकेत
भारत और श्रीलंका भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं और दोनों की समुद्री स्थिति हिंद महासागर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इस कारण दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग का विशेष महत्व है। हिंद महासागर में सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय विकास के लिए जरूरी है।
श्रीलंका की नौसेना के साथ भारत की साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है। दोनों देशों की नौसेनाएं विभिन्न स्तरों पर संपर्क और पेशेवर आदान-प्रदान करती रही हैं। द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास SLINEX भी दोनों देशों के समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके अलावा प्रशिक्षण, हाइड्रोग्राफी और अन्य समुद्री गतिविधियों में भी सहयोग होता रहा है।
संबंधों को नई गति देने की कोशिश
वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। समुद्री यातायात, व्यापारिक मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों के बीच भारत और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
यह दौरा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच नियमित संवाद को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासकर प्रशिक्षण, संयुक्त गतिविधियों, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर संपर्क भविष्य के सहयोग की आधारशिला बन सकता है।
आपसी विश्वास को मजबूत करने का अवसर
किसी देश के नौसेना प्रमुख की आधिकारिक यात्रा केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होती। ऐसी यात्राओं के माध्यम से दोनों पक्ष अपनी प्राथमिकताओं को साझा करते हैं, सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करते हैं और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं। डेमियन फर्नांडो की मौजूदा यात्रा को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक एवं बहुआयामी संबंध हैं। समुद्री क्षेत्र इन संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में शीर्ष नौसैनिक अधिकारियों के बीच सीधा संवाद सहयोग को व्यावहारिक स्तर पर आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण संदेश
भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत नौसैनिक संबंध केवल दोनों देशों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता से भी जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण और पेशेवर सहयोग बढ़ने से समुद्री चुनौतियों से निपटने की सामूहिक क्षमता मजबूत हो सकती है।
वाइस एडमिरल डेमियन फर्नांडो की 26 से 29 अगस्त तक की भारत यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है। साउथ ब्लॉक में गार्ड ऑफ ऑनर, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि, भारतीय नौसेना प्रमुख के साथ बातचीत और कोच्चि में नौसैनिक प्रशिक्षण संस्थानों के दौरे जैसे कार्यक्रम इस यात्रा की व्यापकता को दर्शाते हैं।
कुल मिलाकर, श्रीलंका के नौसेना प्रमुख की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद समुद्री साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर है। संयुक्त गतिविधियों, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा पर बढ़ता संवाद आने वाले समय में भारत-श्रीलंका नौसैनिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। साथ ही, यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
