छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों पर कार्रवाई करते हुए दुर्ग पुलिस ने 26 म्यूल बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा लोगों से ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। जांच में सामने आया कि आरोपी अपने बैंक खातों को ठग गिरोहों के लिए उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें कमीशन या आर्थिक लाभ मिलता था।
💻 साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे थे म्यूल अकाउंट
साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे खातों का उपयोग ठग अपनी असली पहचान छिपाने और ठगी की रकम को कई खातों में घुमाने के लिए करते हैं।
दुर्ग पुलिस की जांच में पता चला कि गिरफ्तार किए गए 26 लोगों के बैंक खाते साइबर अपराधों से जुड़े लेन-देन में इस्तेमाल किए गए थे। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को आगे भेजा जाता था, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
🔍 पुलिस ने तकनीकी जांच से खोला नेटवर्क
साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी जानकारी का विश्लेषण कर संदिग्ध खातों की पहचान की गई।
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे कई बैंक खातों का पता चला, जिनमें संदिग्ध गतिविधियां दर्ज थीं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खाताधारकों को हिरासत में लिया।
👮 26 आरोपियों पर शिकंजा
दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कौन-कौन से साइबर अपराधी सक्रिय हैं।
पूछताछ में आरोपियों से साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के तरीकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।
📱 कैसे काम करता है साइबर ठगी का नेटवर्क?
साइबर ठग अक्सर लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपना शिकार बनाते हैं। इसके बाद ठगी की रकम को सीधे अपने खाते में लेने के बजाय कई म्यूल खातों में भेजते हैं।
इस प्रक्रिया में:
- फर्जी नौकरी, निवेश या ऑनलाइन स्कीम के नाम पर ठगी की जाती है।
- रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर की जाती है।
- इसके बाद पैसे को कई खातों में घुमाकर असली ठिकाने तक पहुंचाया जाता है।
- जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश की जाती है।
⚠️ बैंक खाता किराए पर देना पड़ सकता है भारी
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंकिंग जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें।
कई बार लोग बिना जानकारी के अपना खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन बाद में वे भी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं।
🛡️ साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिस की मुहिम
दुर्ग पुलिस साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चला रही है। डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि हुई है, ऐसे में पुलिस तकनीकी निगरानी और जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दे रही है।
📢 जनता के लिए जरूरी सावधानियां
✅ अनजान लोगों को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति न दें।
✅ OTP, ATM PIN और बैंक जानकारी किसी से साझा न करें।
✅ संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर और निवेश योजनाओं से बचें।
✅ साइबर ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
✅ किसी भी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी बैंक और पुलिस को दें।
📝 निष्कर्ष
दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। 26 म्यूल बैंक खाताधारकों की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि साइबर ठगी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस अब तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी का प्रभावी इस्तेमाल कर रही है।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को सतर्क रहना होगा, क्योंकि छोटी सी लापरवाही उन्हें साइबर ठगी का शिकार बना सकती है।

