
चित्रकूट। ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के कई हिस्सों में नियमित सफाई नहीं होने के कारण सड़क किनारे झाड़ियां और घास बढ़ गई हैं। सार्वजनिक स्थानों, गलियों और संपर्क मार्गों की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में सफाई की कमी से समस्या और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग गांव का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करे और सफाई व्यवस्था को नियमित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र अथवा प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नियमित सफाई नहीं होने का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में सफाई कर्मी की तैनाती होने के बावजूद कई स्थानों पर अपेक्षित सफाई दिखाई नहीं देती। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि उन्होंने लंबे समय से सफाई कर्मी को नियमित रूप से काम करते हुए नहीं देखा है। कुछ लोगों ने तो कई वर्षों के दौरान कर्मचारी के गांव में बेहद कम आने की बात कही है।
इन दावों की पुष्टि के लिए सफाई कर्मी की उपस्थिति पंजिका, कार्य आवंटन, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि रिकॉर्ड में नियमित उपस्थिति दर्ज है, तो उसका मिलान मौके पर दिखाई देने वाली सफाई व्यवस्था से किया जा सकता है।
सड़कों के किनारे बढ़ रही झाड़ियों से परेशानी
गांव के कई संपर्क मार्गों और रास्तों के किनारे झाड़ियों तथा घास के बढ़ने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर वनस्पति इतनी बढ़ गई है कि रास्ते का किनारा प्रभावित हो रहा है। इससे पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होने की बात कही जा रही है।
बरसात के मौसम में ऐसी झाड़ियों के कारण रास्तों के आसपास पानी रुकने और कीड़े-मकौड़ों की समस्या बढ़ने की आशंका भी ग्रामीणों ने जताई है। ग्रामीण चाहते हैं कि पंचायत स्तर पर अभियान चलाकर रास्तों के किनारे उगी अनावश्यक झाड़ियों को हटाया जाए।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
सफाई व्यवस्था के साथ-साथ कुछ ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान मैना देवी हैं और उनके पुत्र हनुमान की पंचायत के कार्यों में सक्रिय भूमिका होने की बात कही जा रही है।
कुछ ग्रामीणों ने सफाई कर्मी की नियुक्ति को लेकर रिश्तेदारी संबंधी सवाल भी उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी व्यक्ति या कर्मचारी के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित विभाग से नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेज और सेवा रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति नियमानुसार हुई है तो उसे भी निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। वहीं, यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
उपस्थिति और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से सफाई कर्मी की उपस्थिति और कार्य से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारी की उपस्थिति तथा उसके द्वारा किए गए कार्य का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए।
जांच के दौरान उपस्थिति रजिस्टर, भुगतान विवरण, निरीक्षण रिपोर्ट और पंचायत से संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद इन दस्तावेजों की तुलना गांव की मौजूदा स्थिति से करने पर वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
ग्रामीण पूरन सिंह ने जताई नाराजगी
गांव निवासी पूरन सिंह राजपूत ने सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए ग्रामीणों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार गांव में नियमित साफ-सफाई नहीं होने से आम लोगों को परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में सफाई की व्यवस्था केवल औपचारिक अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका मानना है कि नियमित सफाई, कूड़ा निस्तारण और झाड़ियों की कटाई के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
शिवराम ने भुगतान संबंधी शिकायत उठाई
स्थानीय बुजुर्ग शिवराम ने सफाई कार्य से संबंधित भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। उनके अनुसार उनसे कथित तौर पर सफाई का काम कराया गया, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया गया।
यह शिकायत भी फिलहाल जांच का विषय है। यदि कार्य वास्तव में कराया गया था तो उससे संबंधित भुगतान रजिस्टर, पंचायत के अभिलेख, कार्य से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति का पक्ष और पंचायत प्रशासन का जवाब लेना भी जरूरी है, ताकि रिपोर्ट में सभी पक्षों को उचित स्थान मिल सके।
बरसात में बढ़ सकती है चुनौती
सुरौंधा में सफाई व्यवस्था का मुद्दा बरसात के कारण और महत्वपूर्ण हो गया है। बारिश के दौरान यदि नालियों और जल निकासी वाले स्थानों की सफाई पर्याप्त नहीं होती है तो पानी जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों के आसपास जमा कचरा, बढ़ी हुई झाड़ियां और अव्यवस्थित जल निकासी गांव की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए उनका सुझाव है कि पंचायत स्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए।
नालियों की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की देखरेख, रास्तों के किनारे की झाड़ियों की कटाई और कचरे के उचित निस्तारण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
स्थलीय निरीक्षण से सामने आ सकती है सच्चाई
ग्रामीणों की शिकायतों की वास्तविकता जानने के लिए अधिकारियों का मौके पर पहुंचना महत्वपूर्ण हो सकता है। स्थलीय निरीक्षण के दौरान गांव की गलियों, संपर्क मार्गों, नालियों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य प्रमुख स्थानों की स्थिति देखी जा सकती है।
इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा अलग-अलग ग्रामीणों से बातचीत कर शिकायतों को दर्ज किया जा सकता है। पंचायत के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करने से किसी भी संभावित लापरवाही या रिकॉर्ड संबंधी विसंगति का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष जांच
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी न माना जाए। उनका कहना है कि यदि सफाई व्यवस्था ठीक है तो निरीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि कहीं कमी है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी नियमित सफाई की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाएं। उनका कहना है कि गांव में स्वच्छता केवल सरकारी योजना का हिस्सा नहीं बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है।
पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। सफाई कर्मियों की उपस्थिति, कार्य की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण की स्पष्ट व्यवस्था होने से ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
यदि पंचायत में नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था हो, तो छोटी समस्याएं बड़ी शिकायतों में बदलने से पहले ही दूर की जा सकती हैं। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
निष्कर्ष
ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की शिकायतों ने स्थानीय प्रशासन के सामने जांच और जवाबदेही का मुद्दा खड़ा किया है। सफाई कर्मी की कथित अनुपस्थिति, सड़कों के किनारे बढ़ी झाड़ियां, भुगतान संबंधी शिकायत और पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है। प्रशासन यदि मौके का निरीक्षण कर पंचायत के अभिलेखों की समीक्षा करता है और ग्रामीणों की शिकायतों को दर्ज करता है, तो समस्या के मूल कारणों का पता लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों की अपेक्षा है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 10 अगस्त 2026
