स्टॉकहोम। यूरोप में बदलते सुरक्षा माहौल के बीच फ्रांस और स्वीडन के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा मिली है। स्वीडन ने फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप से चार आधुनिक फ्रिगेट खरीदने के लिए आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 31 अगस्त 2026 को स्टॉकहोम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन की मौजूदगी में हुआ। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस समझौते को यूरोपीय रक्षा क्षमता और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
4.3 अरब यूरो का बड़ा रक्षा समझौता
फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, चार फ्रिगेट की खरीद से जुड़ा समझौता करीब 4.3 अरब यूरो का है। इन जहाजों का निर्माण फ्रांस की प्रमुख रक्षा एवं जहाज निर्माण कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा किया जाएगा। पहली फ्रिगेट की डिलीवरी वर्ष 2030 में किए जाने की योजना है, जबकि बाकी तीन जहाजों की आपूर्ति इसके बाद चरणबद्ध तरीके से होगी।
स्वीडन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन जहाजों को स्वीडिश नौसेना के लिए ‘लुलेओ क्लास’ के रूप में शामिल किया जाएगा। इनका डिजाइन फ्रांस की FDI यानी Frégate de Défense et d’Intervention श्रेणी पर आधारित होगा। स्वीडन ने इन जहाजों को अपनी भविष्य की नौसैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चुना है।
स्वीडन की समुद्री सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
स्वीडन सरकार का कहना है कि नई फ्रिगेट उसकी समुद्री सुरक्षा और वायु रक्षा क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेंगी। स्वीडन के रक्षा मंत्री पाल योनसन के अनुसार, चारों जहाजों के शामिल होने से देश की मौजूदा वायु रक्षा क्षमता लगभग तीन गुना हो सकती है। सरकार ने इसे देश की सुरक्षा और नाटो की सामूहिक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण निवेश बताया है।
इन जहाजों का इस्तेमाल स्वीडन के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की निगरानी और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल के लिए किया जाएगा। स्वीडिश अधिकारियों के अनुसार, नई फ्रिगेट स्वीडन की नौसेना को पहले की तुलना में अधिक व्यापक समुद्री जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम बनाएंगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली सुरक्षा प्राथमिकताएं
स्वीडन की रक्षा नीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसी बदलते माहौल में स्वीडन ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया।
इसके अलावा, स्वीडन ने 2024 में नाटो की सदस्यता ग्रहण की। नाटो में शामिल होने के बाद देश की सुरक्षा जिम्मेदारियां केवल अपने राष्ट्रीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गठबंधन की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था में योगदान भी महत्वपूर्ण हो गया है। स्वीडिश सशस्त्र बलों ने भी कहा है कि नई फ्रिगेट नाटो में शामिल होने के बाद नौसेना की बदलती भूमिका के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
बाल्टिक सागर पर विशेष ध्यान
स्वीडन के लिए बाल्टिक सागर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां समुद्री परिवहन, व्यापार और यूरोपीय देशों की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं। नई फ्रिगेट स्वीडन की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगी।
स्वीडिश सरकार के अनुसार, इन जहाजों का एक प्रमुख उद्देश्य समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर समुद्री क्षेत्र में नियंत्रण एवं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। इससे स्वीडन अपने सहयोगी देशों के साथ समुद्री अभियानों में भी बेहतर योगदान दे सकेगा।
फ्रांस और स्वीडन के रिश्तों में नया अध्याय
यह समझौता केवल जहाजों की खरीद तक सीमित नहीं है। मैक्रों की स्वीडन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक व्यापक ढांचा समझौता भी किया। इसका उद्देश्य रक्षा नीति, संचालन क्षमता, सैन्य सामग्री और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाना है।
फ्रांस और स्वीडन के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग पहले से मौजूद है, लेकिन नई डील इसे और व्यापक बना सकती है। दोनों देश यूरोप की सुरक्षा में अपनी भूमिका बढ़ाने और सहयोगी देशों के साथ समन्वय मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
मैक्रों ने जताया स्वीडन का आभार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया पोस्ट में स्वीडन के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फ्रांसीसी रक्षा उद्योग की तकनीकी क्षमता पर भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने इसे ऐसे दो देशों के बीच सहयोग बताया जिनकी यूरोपीय सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर सोच काफी हद तक समान है।
मैक्रों ने यह भी जोर दिया कि यूरोप को अपनी सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, फ्रांस और स्वीडन के बीच बढ़ता सहयोग यूरोप की सामूहिक रक्षा क्षमता को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने में योगदान दे सकता है।
फ्रांस के रक्षा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण सौदा
स्वीडन का यह फैसला फ्रांस के रक्षा और जहाज निर्माण उद्योग के लिए भी अहम माना जा रहा है। नेवल ग्रुप को चार फ्रिगेट का बड़ा ऑर्डर मिला है, जिससे फ्रांसीसी रक्षा उद्योग की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत होने की संभावना है।
फ्रांस लंबे समय से यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए यूरोपीय उद्योगों पर अधिक निर्भरता बढ़ाने की वकालत करता रहा है। स्वीडन के साथ हुआ यह समझौता इस सोच को आगे बढ़ाने वाला उदाहरण माना जा रहा है।
स्वीडन की नौसेना के लिए दीर्घकालिक निवेश
नई फ्रिगेट की खरीद स्वीडन की नौसैनिक शक्ति में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखी जा रही है। स्वीडिश अधिकारियों के अनुसार, जहाजों के निर्माण के साथ-साथ स्वीडिश सैन्य कर्मियों का प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा। इससे केवल नए प्लेटफॉर्म ही नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन और विशेषज्ञता भी विकसित होगी।
पहली फ्रिगेट की डिलीवरी 2030 में प्रस्तावित है। इसके बाद बाकी तीन जहाज क्रमशः स्वीडन को मिलेंगे। इस तरह आने वाले वर्षों में स्वीडन की नौसैनिक क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यूरोप में बढ़ता रक्षा सहयोग
फ्रांस-स्वीडन समझौता ऐसे समय हुआ है जब यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और यूरोप के आसपास बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच कई देश रक्षा बजट और सैन्य क्षमताओं में निवेश बढ़ा रहे हैं।
स्वीडन और फ्रांस का यह समझौता यूरोप के भीतर रक्षा उद्योग, तकनीक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा सकता है। दोनों देशों के लिए यह समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ यूरोपीय और नाटो सहयोग को मजबूत करने का माध्यम भी है।
निष्कर्ष
स्वीडन द्वारा फ्रांस से चार फ्रिगेट खरीदने का समझौता दोनों देशों के रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव है। करीब 4.3 अरब यूरो की इस डील से स्वीडन को आने वाले वर्षों में अपनी समुद्री और वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पहली फ्रिगेट 2030 में मिलने की योजना है। साथ ही, दोनों देशों के बीच हुए व्यापक रक्षा सहयोग समझौते से भविष्य में तकनीक, औद्योगिक साझेदारी और सुरक्षा नीति के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है।
