
ताड़ी। ग्राम सभा ताड़ी में सरकारी जमीन और आम रास्ते पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, गांव के रहने वाले दुर्गा प्रसाद ने आरोप लगाया है कि दबंग व्यक्ति द्वारा उनकी जमीन के साथ-साथ सरकारी चकमार्ग पर भी कब्जा कर रास्ते को बाधित कर दिया गया है। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। वहीं, ग्राम सभा के पूर्व प्रधान मुन्ने लाल त्रिपाठी ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि विवाद का मुख्य केंद्र वह जमीन और रास्ता है, जिसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों द्वारा आवागमन के लिए किया जाता है। शिकायतकर्ता दुर्गा प्रसाद का आरोप है कि मुन्ना निषाद नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर उनकी जमीन पर कब्जा करने के साथ सरकारी चकमार्ग को भी बंद कर दिया है। इससे आवागमन को लेकर परेशानी पैदा हो रही है और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
मामले को लेकर ताड़ी ग्राम सभा के पूर्व प्रधान मुन्ने लाल त्रिपाठी ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इस मामले की शिकायत स्थानीय विधायक, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और संबंधित लेखपाल से की जा चुकी है। शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई का आश्वासन भी दिए जाने की बात कही गई, लेकिन आरोप है कि अब तक मौके से कथित कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पूर्व प्रधान का कहना है कि यदि सरकारी जमीन या सार्वजनिक रास्ते पर वास्तव में अतिक्रमण हुआ है तो राजस्व विभाग को मौके की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके बाद नियमों के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को रास्ते से आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। जमीन की वास्तविक स्थिति और चकमार्ग की सीमा का निर्धारण संबंधित राजस्व अभिलेखों और मौके की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गरीब होने का फायदा उठाने का आरोप
पूर्व प्रधान मुन्ने लाल त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर है और इसी वजह से वह कथित दबंगई का सामना करने की स्थिति में नहीं है। उनका कहना है कि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति की शिकायत को गंभीरता से सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई में देरी होने से ग्रामीणों में गलत संदेश जाता है। यदि किसी व्यक्ति की निजी जमीन या सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद है तो उसका समाधान कानून और राजस्व प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
पूर्व प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान ग्राम प्रधान के संरक्षण के कारण कथित कब्जाधारी के हौसले बुलंद हैं। हालांकि, यह आरोप भी संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी जमीन और चकमार्ग की स्थिति जांचने की मांग
गांवों में चकमार्ग और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीन ग्रामीण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। खेतों तक पहुंच, लोगों के आवागमन और कृषि कार्यों के लिए ऐसे रास्तों का उपयोग किया जाता है। यदि किसी सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण होने की शिकायत आती है तो राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर उसकी स्थिति की जांच की जाती है।
ताड़ी ग्राम सभा के इस मामले में भी ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन राजस्व अभिलेखों की जांच कराने के साथ मौके का स्थलीय निरीक्षण करे। इससे यह पता चल सकेगा कि विवादित भूमि का वास्तविक स्वरूप क्या है और जिस रास्ते को चकमार्ग बताया जा रहा है, वह राजस्व रिकॉर्ड में किस श्रेणी में दर्ज है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में सरकारी जमीन या सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि मामला निजी भूमि के स्वामित्व से जुड़ा है तो दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच कर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार विवाद का समाधान कराया जाना चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
मामले को लेकर स्थानीय लोगों की निगाह अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायत दर्ज करने या आश्वासन देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जमीन और रास्ते की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए मौके पर जांच जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी राजस्व टीम के साथ स्थल का निरीक्षण करें और दोनों पक्षों को सुनने के बाद निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करें। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सार्वजनिक रास्ते को अवरोधमुक्त कराने के साथ सरकारी जमीन को भी कब्जामुक्त कराया जाए।
वहीं, यदि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए जाते हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि गांव में किसी प्रकार का भ्रम या विवाद आगे न बढ़े।
ग्रामीणों ने जल्द समाधान की मांग की
ताड़ी ग्राम सभा में कथित अवैध कब्जे का मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सार्वजनिक रास्ते किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं होते। इनका उपयोग सभी ग्रामीणों के लिए होता है। ऐसे में रास्ते पर किसी भी प्रकार का अवरोध लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद के रूप में देखने के बजाय राजस्व रिकॉर्ड और कानून के आधार पर निपटाया जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और विवाद को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकेगा।
पूर्व प्रधान मुन्ने लाल त्रिपाठी ने भी प्रशासन से मामले में शीघ्र संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर जमीन और चकमार्ग की स्थिति की जांच करनी चाहिए तथा यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच से निकलेगा समाधान
ताड़ी ग्राम सभा का यह मामला फिलहाल आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है। एक पक्ष की ओर से अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासनिक और राजस्व जांच आवश्यक है। जमीन से जुड़े मामलों में दस्तावेज, खतौनी, नक्शा और मौके की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में पूरे मामले का निष्पक्ष समाधान तभी संभव है, जब संबंधित विभाग सभी पक्षों को सुनकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर निर्णय ले। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा और यदि सार्वजनिक रास्ते या सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे कानून के अनुसार हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ताड़ी ग्राम सभा के ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह संबंधित अधिकारियों की जांच और रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 16 अगस्त 2026
