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🇮🇱🇺🇸 गाजा पर ट्रंप की शांति योजना को नेतन्याहू ने ठुकराया, बोले- ‘हमास के पूरी तरह निहत्था होने तक इजरायली सेना नहीं हटेगी’

गाजा युद्ध को खत्म करने की अमेरिकी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 सूत्रीय गाजा शांति योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक हमास का वास्तविक और पूर्ण निरस्त्रीकरण नहीं होता, तब तक गाजा से इजरायली सेना की वापसी नहीं होगी। इस रुख ने अमेरिका और उसके करीबी सहयोगी इजरायल के बीच मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है।

🔥 नेतन्याहू का दो टूक संदेश

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अपने बयान में अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इजरायल की सेना तब तक गाजा से पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता।

नेतन्याहू के अनुसार, उनके लिए ‘निरस्त्रीकरण’ का मतलब केवल कुछ हथियारों को जमा कराना नहीं है। वह हमास के भारी हथियारों, हल्के हथियारों और अन्य सैन्य क्षमताओं के वास्तविक रूप से खत्म किए जाने की मांग कर रहे हैं।

यही शर्त अब गाजा में किसी भी बड़े राजनीतिक या सैन्य समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन गई है।

🇺🇸 ट्रंप की 15 सूत्रीय योजना क्या चाहती है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से समर्थित 15 सूत्रीय योजना का उद्देश्य गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना है। प्रस्ताव में हमास के हथियारों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और इसके बदले इजरायली सेना की गाजा के कुछ हिस्सों से क्रमिक वापसी की व्यवस्था का विचार शामिल है।

योजना के पीछे व्यापक उद्देश्य गाजा में युद्ध समाप्त करना, सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना और भविष्य के प्रशासन के लिए नया ढांचा तैयार करना है।

लेकिन इजरायल और हमास इस प्रक्रिया के क्रम पर ही अलग-अलग रास्ते पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। इजरायल पहले हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण चाहता है, जबकि हमास की ओर से पहले इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने और वापसी की मांग की जा रही है।

⚔️ सबसे बड़ी अड़चन बना ‘पहले कौन कदम उठाए?’

गाजा शांति प्रक्रिया में सबसे कठिन सवाल यही है कि पहले कौन अपनी सैन्य स्थिति बदले।

इजरायल का कहना है कि यदि उसकी सेना पहले पीछे हटती है और हमास के पास हथियार बने रहते हैं, तो भविष्य में इजरायल के खिलाफ नए हमले का खतरा बरकरार रह सकता है।

दूसरी ओर, हमास का रुख है कि इजरायल को पहले सैन्य अभियान रोकना और पीछे हटना चाहिए। इसके बाद हथियारों को लेकर आगे की व्यवस्था पर बातचीत हो सकती है। यही मतभेद अमेरिकी योजना को जमीन पर लागू करने की राह में गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है।

🕊️ हमास ने योजना पर क्या कहा?

हमास की ओर से संकेत दिया गया है कि वह प्रस्तावित रोडमैप के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन वह इजरायल से सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग कर रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, हमास हथियारों को अमेरिका के समर्थन वाली एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखने जैसी व्यवस्था पर विचार कर सकता है, लेकिन पूर्ण और तत्काल निरस्त्रीकरण को लेकर उसकी स्थिति अलग है।

इसका अर्थ यह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों पर गहरी खाई बनी हुई है।

🇮🇱 इजरायल के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

नेतन्याहू सरकार लगातार यह तर्क देती रही है कि गाजा से इजरायली सेना की वापसी तभी संभव है जब वहां से इजरायल के खिलाफ सैन्य खतरा समाप्त हो।

इजरायली नेतृत्व के लिए हमास का हथियारबंद ढांचा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न है। इसी वजह से नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रस्ताव के उन हिस्सों को स्वीकार करने से इनकार किया है जिन्हें वह इजरायल की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं मानते।

रॉयटर्स के अनुसार, नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि कुछ विचार इजरायल को स्वीकार्य हैं, जबकि कुछ प्रस्तावित व्यवस्थाओं को वह स्वीकार नहीं कर सकते।

🤝 अमेरिका-इजरायल संबंधों में बढ़ सकता है तनाव

अमेरिका और इजरायल लंबे समय से करीबी रणनीतिक साझेदार रहे हैं। लेकिन गाजा को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आना ट्रंप प्रशासन के लिए भी चुनौती है।

अमेरिका एक ऐसे समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है जिससे युद्ध समाप्त हो, गाजा में स्थिरता आए और आगे पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके लिए इजरायली सेना की क्रमिक वापसी और हमास के निरस्त्रीकरण को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

नेतन्याहू का ताजा रुख बताता है कि इजरायल इस प्रक्रिया में अपनी सुरक्षा संबंधी शर्तों को किसी भी कीमत पर कमजोर करने के लिए तैयार नहीं है।

🏚️ गाजा के लोगों के लिए चिंता और बढ़ी

राजनीतिक और सैन्य गतिरोध का सबसे गंभीर असर गाजा की आम आबादी पर पड़ सकता है। लंबे संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हैं और क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा हुआ है।

यदि शांति योजना आगे नहीं बढ़ती, तो पुनर्निर्माण, राहत और स्थायी राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े प्रयास भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका दोनों पक्षों के बीच मौजूद सबसे बड़े मतभेद को दूर कराने में सफल हो पाता है।

🌍 मध्य पूर्व में बढ़ सकती है अस्थिरता

गाजा का संकट केवल इजरायल और फिलिस्तीन तक सीमित नहीं है। यह पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है।

गाजा में युद्ध या शांति प्रक्रिया में रुकावट का असर क्षेत्रीय शक्तियों, अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। पहले से तनावपूर्ण मध्य पूर्व में किसी भी नए सैन्य टकराव का खतरा व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर सकता है।

इसी वजह से ट्रंप की योजना को लेकर दुनिया की निगाहें वाशिंगटन, यरुशलम और गाजा—तीनों पर टिकी हैं।

🚨 नेतन्याहू के रुख से शांति प्रक्रिया को झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति की योजना को लेकर पहले सकारात्मक संकेतों के बावजूद इजरायल की ओर से इसका स्पष्ट विरोध सामने आना महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके नेतृत्व में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को लेकर भी गंभीर आपत्ति बनी हुई है। इससे गाजा के युद्ध के बाद की राजनीतिक व्यवस्था पर बहस और जटिल हो सकती है।

एक तरफ अमेरिका युद्ध खत्म करने और नई व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं इजरायल सुरक्षा और हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त बना रहा है।

🔎 अब आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या अमेरिका इजरायल और हमास के बीच समझौते का कोई नया रास्ता निकाल पाएगा।

यदि हमास पूर्ण निरस्त्रीकरण पर सहमत नहीं होता और इजरायल सेना की वापसी से पहले हथियारों का पूरी तरह खत्म होना अनिवार्य रखता है, तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत लंबी खिंच सकती है।

इसके विपरीत, यदि मध्यस्थ दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य चरणबद्ध व्यवस्था तैयार कर लेते हैं, तो युद्ध समाप्त करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

अमेरिकी प्रयासों की सफलता काफी हद तक इसी बात पर निर्भर करेगी कि निरस्त्रीकरण और सैन्य वापसी को किस क्रम और किन अंतरराष्ट्रीय गारंटियों के साथ लागू किया जाता है।

🕊️ दुनिया की निगाहें अब अगले कदम पर

गाजा को लेकर ट्रंप की 15 सूत्रीय योजना को नेतन्याहू द्वारा खारिज किया जाना मध्य पूर्व की कूटनीति में एक अहम मोड़ है। इजरायल का कहना है कि हमास के वास्तविक निरस्त्रीकरण के बिना सेना की वापसी संभव नहीं है, जबकि हमास पहले इजरायली सैन्य कार्रवाई और वापसी पर जोर दे रहा है।

अब शांति की राह केवल किसी एक प्रस्ताव की स्वीकृति से नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सबसे कठिन सवाल—‘पहले कौन पीछे हटे और सुरक्षा की गारंटी कौन देगा’—का समाधान मिलने से खुलेगी। आने वाले दिनों में अमेरिका की मध्यस्थता, इजरायल का रुख और हमास की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि गाजा में शांति की कोशिश आगे बढ़ती है या एक बार फिर राजनीतिक गतिरोध में फंस जाती है।

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