उत्तराखंड में 85 लाख रुपये की साइबर ठगी, महाराष्ट्र के सांगली से 45 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

0

देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग के जरिए अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर एक व्यक्ति से कथित तौर पर 85 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के सांगली जिले से 45 वर्षीय आरोपी यासीन यूसुफ को गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी को साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ठगी का तरीका ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग से जुड़ा हुआ था। पीड़ित को कमोडिटी ट्रेडिंग में बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया गया। अधिक कमाई की उम्मीद में उसने कथित तौर पर अलग-अलग चरणों में बड़ी रकम निवेश कर दी। बाद में जब निवेश की गई धनराशि और मुनाफे को वापस लेने की कोशिश की गई तो परेशानी सामने आने लगी। इसी के बाद पूरे मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची।

इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर धोखाधड़ी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले में पैसों के लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।

ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का दिया गया लालच

साइबर ठगी के इस मामले में ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग को माध्यम बनाया गया था। आरोप है कि पीड़ित को निवेश पर आकर्षक रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया गया। डिजिटल माध्यम से होने वाले कारोबार की जानकारी और अधिक कमाई की संभावनाओं का हवाला देकर उसे निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

ऑनलाइन निवेश के क्षेत्र में कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के दावे अक्सर लोगों को आकर्षित करते हैं। साइबर अपराधी इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इस मामले में भी ट्रेडिंग के नाम पर बड़ी रकम का लेन-देन हुआ और कुल धोखाधड़ी की राशि लगभग 84.70 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान पता चला कि सितंबर 2024 में शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी से संबंधित बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते में 29 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे। यह खाता कथित साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किए गए शुरुआती बैंक खातों में शामिल था।

दो मुकदमों में वांछित था आरोपी

एसटीएफ की जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। गिरफ्तार आरोपी यासीन यूसुफ मनेर देहरादून के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य मामले में भी वांछित था।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ वर्ष 2024 में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें एक मामला मुकदमा संख्या 75/2024 और दूसरा मुकदमा संख्या 71/2024 बताया गया है।

पहले मामले की विवेचना के दौरान आरोपी का नाम सामने आया था। बैंक खातों में हुए लेन-देन की जांच और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर पुलिस ने उसकी भूमिका की पड़ताल शुरू की। इसी दौरान दूसरे मुकदमे से भी उसका संबंध सामने आया।

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी तक पहुंचना और वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी को समझना था। साइबर अपराधों में कई बार ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित होती है। ऐसे में पुलिस को प्रत्येक लेन-देन और संबंधित खाताधारकों की भूमिका की जांच करनी पड़ती है।

नोटिस मिलने के बाद भी पूछताछ में नहीं हुआ शामिल

एसटीएफ के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस भेजकर पूछताछ और विवेचना में शामिल होने के लिए कहा गया था।

हालांकि, पुलिस का कहना है कि नोटिस की जानकारी मिलने के बावजूद आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ। वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पुलिस के सामने उपस्थित भी नहीं हुआ।

इसके बाद एसटीएफ ने उसकी तलाश तेज कर दी। जांच में मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस टीम महाराष्ट्र के सांगली जिले तक पहुंची। वहां स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद आरोपी की तलाश की गई।

उत्तराखंड और महाराष्ट्र पुलिस के बीच समन्वय के बाद एसटीएफ की टीम ने 26 अक्टूबर 2026 को सांगली में कार्रवाई करते हुए यासीन यूसुफ मनेर को गिरफ्तार कर लिया।

महाराष्ट्र तक पहुंची उत्तराखंड एसटीएफ की टीम

इस गिरफ्तारी को अंजाम देने के लिए उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर टीम ने महाराष्ट्र में अभियान चलाया। टीम ने स्थानीय पुलिस की सहायता से आरोपी का पता लगाया और उसे गिरफ्तार किया।

इस कार्रवाई में निरीक्षक विजय भारती, उपनिरीक्षक रमन बिष्ट और अपर उपनिरीक्षक गोपाल बिष्ट शामिल रहे।

पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड भी बरामद किया है। जांच एजेंसियों के लिए ये उपकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से डिजिटल गतिविधियों और मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है।

एसटीएफ अब इस मामले से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में भेजी गई और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

84.70 लाख रुपये की ठगी में बैंक खातों की भूमिका अहम

इस मामले में बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता की ओर से 29.50 लाख रुपये आरोपी से संबंधित बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रथम स्तर के खाते में भेजे गए थे।

साइबर अपराध की जांच में बैंक खातों की भूमिका समझना जरूरी होता है। कई मामलों में पीड़ित से प्राप्त धनराशि सीधे किसी एक व्यक्ति के खाते में नहीं रहती, बल्कि अलग-अलग खातों में स्थानांतरित हो जाती है।

इसी वजह से जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, लेन-देन के विवरण और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करती हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ठगी की रकम कहां से होकर गुजरी और किन लोगों ने इसमें कथित रूप से सहयोग किया।

हालांकि, इस मामले में पूरी धनराशि की बरामदगी या अन्य संभावित आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध

डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के विकल्प भी बढ़े हैं। लोग घर बैठे मोबाइल फोन या कंप्यूटर के माध्यम से विभिन्न प्रकार के वित्तीय उत्पादों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इसी सुविधा का दुरुपयोग करने वाले साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

कई बार धोखाधड़ी करने वाले लोग खुद को निवेश सलाहकार, ट्रेडिंग विशेषज्ञ या वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संपर्क करते हैं। इसके बाद वे आकर्षक मुनाफे के दावे करके लोगों को निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं।

कुछ मामलों में शुरुआत में निवेश पर लाभ दिखाकर भरोसा बनाया जाता है। इसके बाद अधिक रकम लगाने के लिए कहा जाता है। जब व्यक्ति अपनी जमा राशि वापस लेने का प्रयास करता है तो उसे अलग-अलग बहाने बताए जा सकते हैं।

देहरादून का यह मामला भी ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग के नाम पर हुई बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है। यह घटना बताती है कि निवेश से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना कितना आवश्यक है।

एसटीएफ ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

उत्तराखंड एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और संदिग्ध निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की अपील की है।

उन्होंने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है।

साइबर ठगी होने पर यहां करें शिकायत

राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन

1930

ऑनलाइन शिकायत पोर्टलराष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल

वित्तीय धोखाधड़ी का पता चलने पर तुरंत शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

जांच के बाद सामने आएंगे ठगी नेटवर्क के अन्य चेहरे

देहरादून में 84.70 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में महाराष्ट्र के सांगली से आरोपी की गिरफ्तारी उत्तराखंड एसटीएफ के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ और बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच के माध्यम से मामले की अन्य कड़ियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर भी है कि कथित ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों का संचालन कौन कर रहा था और धनराशि को आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया।

फिलहाल इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों से इस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: उत्तराखंड में सामने आया यह मामला ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है। अधिक मुनाफे के लालच में बिना सत्यापन निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी ऑनलाइन निवेश प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना जरूरी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें