जून 18, 2026

एम्बेसडर होटल संपत्ति विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में मामले ने फिर पकड़ी रफ्तार

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दिल्ली के चर्चित एम्बेसडर होटल से जुड़े लंबे समय से चल रहे संपत्ति विवाद में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर विचार करने की सहमति देते हुए मामले की आगे की सुनवाई तय कर दी है। यह विवाद सुजान सिंह पार्क स्थित एम्बेसडर होटल के उत्तरी ब्लॉक से संबंधित है, जिस पर स्वामित्व और कब्जे को लेकर कानूनी संघर्ष जारी है।

हाईकोर्ट की प्रारंभिक कार्रवाई

अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट तथा जिला अदालत से संबंधित रिकॉर्ड तलब करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने मामले को नियमित रोस्टर बेंच के समक्ष 23 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है, जहां विवाद के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी और सुधीर नंद्राजोग ने पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय सरकारी अधिवक्ता आशीष के. दीक्षित तथा अन्य सरकारी वकीलों ने किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

कंपनी का कहना है कि उसे केंद्र सरकार द्वारा 11 जून 2026 को जारी किए गए नोटिस के कारण संपत्ति से बेदखल किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। यह नोटिस पब्लिक प्रिमाइसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत जारी किया गया था।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि उक्त नोटिस में 9 जून 2026 को पारित अपीलीय अदालत के आदेश का उल्लेख किया गया है, जिससे यह आशंका पैदा होती है कि बेदखली की प्रक्रिया उस आदेश से प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने इसी आधार पर न्यायालय से हस्तक्षेप और राहत की मांग की।

केंद्र सरकार का रुख

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बेदखली प्रक्रिया किसी भी न्यायिक आदेश पर निर्भर नहीं है और यह स्वतंत्र कानूनी प्रक्रिया के तहत संचालित की जाएगी। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि प्रशासनिक कार्रवाई और अपीलीय अदालत के आदेश के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को अपने आदेश का हिस्सा बनाते हुए दर्ज किया और कहा कि सरकार भविष्य की कार्यवाही में इस कथन से बंधी रहेगी।

अंतरिम राहत पर अदालत का फैसला

कंपनी ने तत्काल संरक्षण की मांग करते हुए अपीलीय अदालत के आदेश पर रोक लगाने की अपील की थी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय का मत था कि जब केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया है कि बेदखली की प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से संचालित होगी, तब इस चरण पर किसी अतिरिक्त रोक की आवश्यकता नहीं दिखाई देती।

आगे क्या?

एम्बेसडर होटल से जुड़ा यह विवाद केवल एक संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि राजधानी के एक प्रतिष्ठित संस्थान से संबंधित कानूनी संघर्ष भी है, जो कई वर्षों से विभिन्न अदालतों में विचाराधीन रहा है। अब सभी की निगाहें 23 जुलाई 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हाईकोर्ट यह तय करेगा कि कंपनी के दावों में कितना कानूनी आधार है और उसे किसी प्रकार की राहत मिल सकती है या नहीं।

निष्कर्ष

दिल्ली हाईकोर्ट की ताजा कार्यवाही ने इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद को फिर से केंद्र में ला दिया है। फिलहाल अदालत ने कोई अंतरिम संरक्षण नहीं दिया है, लेकिन मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए रिकॉर्ड तलब करना यह संकेत देता है कि आगामी सुनवाई में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर विचार किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल संबंधित पक्षों के लिए बल्कि संपत्ति कानून और सरकारी बेदखली प्रक्रियाओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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