ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रमुखों की बैठक लखनऊ में शुरू: वैश्विक आंकड़ों के सहयोग और नवाचार की दिशा में भारत की बड़ी पहल
नई दिल्ली/लखनऊ:भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (National Statistical Offices-NSOs)…

नई दिल्ली/लखनऊ:
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (National Statistical Offices-NSOs) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक 3 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुरू हुई। यह सम्मेलन केवल आंकड़ों और सांख्यिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण, डिजिटल नवाचार, सतत विकास और डेटा आधारित शासन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस आयोजन में ब्रिक्स देशों के सांख्यिकी प्रमुखों के साथ-साथ नीति निर्माता, शिक्षाविद, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
भारत की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण आयोजन
ब्रिक्स समूह विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा हाल के वर्षों में शामिल नए सदस्य देश भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक सदस्य देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास है।
लखनऊ में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच विश्वसनीय, पारदर्शी और आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली विकसित करना है, ताकि नीति निर्माण अधिक प्रभावी और सटीक बन सके।
क्यों महत्वपूर्ण हैं राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय?
किसी भी देश की आर्थिक, सामाजिक और विकास संबंधी योजनाओं की सफलता विश्वसनीय आंकड़ों पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जनसंख्या, रोजगार, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, महंगाई, गरीबी और आर्थिक विकास जैसे अनेक क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े एकत्रित और विश्लेषित करते हैं।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकारें योजनाएं बनाती हैं, बजट तैयार करती हैं और विकास की दिशा तय करती हैं। इसलिए आधुनिक समय में सांख्यिकी केवल संख्याओं का संग्रह नहीं, बल्कि सुशासन की आधारशिला बन चुकी है।
डेटा आधारित शासन पर विशेष जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि डिजिटल युग में डेटा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा, मशीन लर्निंग, सैटेलाइट डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने सांख्यिकी के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं।
प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार साझा किया कि नई तकनीकों का उपयोग कर सांख्यिकीय आंकड़ों को अधिक सटीक, तेज और विश्वसनीय कैसे बनाया जा सकता है।
सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी में सांख्यिकी की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) हासिल करने में सांख्यिकीय आंकड़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास जैसे लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन विश्वसनीय आंकड़ों के बिना संभव नहीं है।
इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने एसडीजी संकेतकों के बेहतर संग्रह और विश्लेषण के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
350 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी
सम्मेलन में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इससे स्पष्ट होता है कि आधुनिक सांख्यिकी केवल सरकारी कार्य नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की साझी जिम्मेदारी बन चुकी है।
विशेषज्ञों ने डेटा गुणवत्ता, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता संरक्षण, डिजिटल सर्वेक्षण और नवीन तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
डिजिटल परिवर्तन पर जोर
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से शासन प्रणाली में व्यापक परिवर्तन किए हैं। डिजिटल जनगणना, ऑनलाइन डेटा संग्रह, ई-गवर्नेंस और रियल टाइम डाटा मॉनिटरिंग जैसी पहलें भारत को आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।
बैठक में भारत ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से आंकड़ों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार किया जा सकता है।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग होगा मजबूत
ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। ऐसे में यदि सदस्य देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग मजबूत होता है तो व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे।
इस बैठक के माध्यम से सदस्य देशों ने डेटा साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने और भविष्य में संयुक्त शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जी-20, वैश्विक दक्षिण शिखर सम्मेलन और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका से वैश्विक नेतृत्व की नई पहचान बनाई है। अब ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान आयोजित यह सम्मेलन भी भारत की उसी भूमिका को आगे बढ़ाता है।
लखनऊ में आयोजित यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत केवल आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि डेटा, डिजिटल शासन और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी वैश्विक सहयोग का नेतृत्व कर रहा है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था डेटा आधारित होगी। विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण आंकड़े निवेश, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास की नीतियों को अधिक प्रभावी बनाएंगे। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास को नई गति दे सकता है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन सदस्य देशों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
लखनऊ में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक केवल एक औपचारिक सम्मेलन नहीं, बल्कि डेटा आधारित वैश्विक शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 350 से अधिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार और विश्वसनीय आंकड़ों के माध्यम से बेहतर नीति निर्माण का जो लक्ष्य इस बैठक में सामने रखा गया है, वह आने वाले समय में सदस्य देशों के साथ-साथ वैश्विक विकास के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन सांख्यिकीय सहयोग, ज्ञान साझेदारी और सतत विकास की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।