रूस-यूक्रेन युद्ध: डोनबास पर कब्ज़े की समयसीमा को लेकर ज़ेलेंस्की का बड़ा दावा, रूस की रणनीति पर उठाए सवाल

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने डोनबास क्षेत्र को लेकर रूस की सैन्य रणनीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने डोनेत्स्क (डोनबास) क्षेत्र पर पूर्ण कब्ज़ा करने के लिए कई बार अलग-अलग समयसीमाएं तय कीं, लेकिन हर बार उसे असफलता का सामना करना पड़ा।
ज़ेलेंस्की का दावा: 15 बार बदली गई समयसीमा
ज़ेलेंस्की के अनुसार, रूस ने अब तक डोनेत्स्क क्षेत्र पर कब्ज़ा करने के लिए लगभग 15 अलग-अलग “डेडलाइन” तय की हैं। उनका कहना है कि रूस का राजनीतिक नेतृत्व अब भी डोनबास को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन लगातार बदलती समयसीमाएं इस बात का संकेत हैं कि उसके सैन्य अभियान को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही।
2022 से 2026 तक लगातार बदलते लक्ष्य
ज़ेलेंस्की ने कहा कि वर्ष 2022 में रूस ने मार्च, मई, जून, सितंबर और दिसंबर तक डोनबास पर कब्ज़ा करने के लक्ष्य निर्धारित किए थे। इसके बाद 2023 और 2024 में भी नई-नई समयसीमाएं तय की गईं।
उनके अनुसार, 2025 में भी रूस ने कई अंतिम तिथियां घोषित कीं, लेकिन कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। वहीं 2026 में भी पहले मार्च, फिर सितंबर और अब दिसंबर के अंत तक का नया लक्ष्य सामने आया है।
रूस की रणनीति पर सवाल
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि रूस अपने सैन्य अभियान को समाप्त नहीं करता, तो उसे आगे भी अपनी समयसीमाएं बदलनी पड़ेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस लगातार बड़े पैमाने पर सैनिकों को युद्ध में झोंक रहा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने घोषित सैन्य उद्देश्यों को हासिल नहीं कर पा रहा।
युद्ध अभी भी जारी
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान पूर्वी यूक्रेन का डोनबास क्षेत्र युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। दोनों पक्ष यहां लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं और स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बरकरार
इस लंबे संघर्ष ने न केवल दोनों देशों को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और खाद्य संकट जैसी चुनौतियों को भी बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है, हालांकि अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष
ज़ेलेंस्की का यह बयान रूस की सैन्य रणनीति और डोनबास अभियान पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और आकलन प्रस्तुत करते हैं। स्वतंत्र रूप से इन सभी दावों की पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती। ऐसे में युद्ध की वास्तविक स्थिति का आकलन विश्वसनीय और स्वतंत्र स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
