16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक: 21 देशों ने स्वस्थ भविष्य के लिए साझा संकल्प लिया, भारत ने रखा समग्र स्वास्थ्य का मॉडल
### **Expert Take**
16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां केवल अस्पतालों और उपचार तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि **रोकथाम, वेलनेस, डिजिटल हेल्थ और वैश्विक सहयोग** पर आधारित होंगी। भारत द्वारा योग, चेयर योग और वेलनेस गतिविधियों को बैठक का हिस्सा बनाना यह दर्शाता है कि देश स्वास्थ्य को समग्र दृष्टिकोण से देखता है। यदि इस बैठक में तय प्राथमिकताओं को सदस्य देश प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो इससे स्वास्थ्य प्रणालियां अधिक **लचीली (Resilient), समावेशी (Equitable) और टिकाऊ (Sustainable)** बन सकती हैं, जो भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

प्रस्तावना
वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में 16वीं ब्रिक्स (BRICS) स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। इस बैठक में 21 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और 9 प्रमुख स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए स्वस्थ भविष्य के लिए साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की। भारत ने इस अवसर पर स्वास्थ्य को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित न मानकर, समग्र शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण के रूप में प्रस्तुत किया।
बैठक की सबसे विशेष बात यह रही कि यहां औपचारिक बैठकों के साथ-साथ योग सत्र, चेयर योग (Chair Yoga) और सुखना झील पर मॉर्निंग वॉकाथॉन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिससे भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और “वेलनेस” की अवधारणा को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
21 देशों की भागीदारी, स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा
16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में केवल ब्रिक्स सदस्य देशों ही नहीं, बल्कि आधिकारिक साझेदार देशों (Official Partner Countries) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। कुल 21 देशों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि आज स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग से ही संभव है।
इस मंच ने विभिन्न देशों को अपने अनुभव साझा करने, नई रणनीतियों पर चर्चा करने और भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर प्रदान किया।
9 प्राथमिक एजेंडों पर व्यापक चर्चा
बैठक के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 9 महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
- मजबूत और लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों (Resilient Health Systems) का निर्माण
- सभी नागरिकों के लिए समान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता
- टिकाऊ (Sustainable) स्वास्थ्य ढांचे का विकास
- महामारी और आपातकालीन स्वास्थ्य संकटों से निपटने की तैयारी
- डिजिटल हेल्थ और तकनीक का उपयोग
- प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना
- पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का समावेश
- स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
- अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग को मजबूत करना
इन विषयों पर हुई चर्चा का उद्देश्य भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और समावेशी बनाना था।
भारत ने प्रस्तुत किया समग्र स्वास्थ्य का दृष्टिकोण
भारत ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि स्वस्थ समाज केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से नहीं बनता, बल्कि रोकथाम, संतुलित जीवनशैली, योग, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक भागीदारी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
भारत की स्वास्थ्य नीति “इलाज से पहले बचाव” (Preventive Healthcare) पर विशेष बल देती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए बैठक में योग और वेलनेस गतिविधियों को भी शामिल किया गया।
योग बना बैठक की विशेष पहचान
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सबसे आकर्षक विशेषताओं में योग आधारित गतिविधियां रहीं।
बैठक के दौरान—
- मंत्रिस्तरीय विचार-विमर्श से पहले सामूहिक योग सत्र आयोजित किए गए।
- लंबी बैठकों के बीच प्रतिभागियों के लिए चेयर योग कराया गया।
- प्रतिनिधियों ने सुखना झील पर आयोजित मॉर्निंग वॉकाथॉन में भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।
इन गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और दवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव भी बेहतर स्वास्थ्य की नींव बन सकते हैं।
वेलनेस को नीति निर्माण से जोड़ा गया
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बैठकों में केवल औपचारिक चर्चाएं होती हैं, लेकिन इस सम्मेलन में स्वास्थ्य को व्यवहारिक रूप से अपनाने का प्रयास भी दिखाई दिया।
योग, ध्यान और शारीरिक सक्रियता को बैठक का हिस्सा बनाकर यह संदेश दिया गया कि नीति निर्माता स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव लाना आसान होगा।
लचीली और समान स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर
कोविड-19 महामारी के अनुभव ने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होती है।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि—
- प्रत्येक देश को स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए बेहतर तैयारी करनी चाहिए।
- स्वास्थ्य सेवाएं शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचनी चाहिए।
- दवाओं, टीकों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता मजबूत की जानी चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से स्वास्थ्य चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजा जाना चाहिए।
डिजिटल हेल्थ और नवाचार पर विशेष फोकस
बैठक में डिजिटल तकनीकों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विशेष रूप से—
- टेलीमेडिसिन
- डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वास्थ्य सेवाएं
- डेटा साझाकरण
- स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियां
जैसे विषयों को भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
पारंपरिक चिकित्सा को मिला वैश्विक मंच
भारत ने आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
विश्व स्तर पर अब लोग प्राकृतिक और समग्र उपचार पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में भारत ने वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के पूरक के रूप में प्रस्तुत किया।
वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
21 देशों की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य अब किसी एक देश का विषय नहीं रह गया है।
महामारी, जलवायु परिवर्तन, नई बीमारियां, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) और मानसिक स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब देश मिलकर कार्य करें।
ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की यह बैठक भविष्य में साझा अनुसंधान, ज्ञान विनिमय और क्षमता निर्माण के नए अवसर भी तैयार करेगी।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
भारत लगातार वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
- डिजिटल हेल्थ मिशन
- आयुष आधारित स्वास्थ्य मॉडल
- योग का वैश्विक प्रसार
- सस्ती दवाओं की उपलब्धता
- वैक्सीन उत्पादन क्षमता
जैसी पहलों ने भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग का एक महत्वपूर्ण साझेदार बना दिया है।
निष्कर्ष
16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि स्वस्थ, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही। 21 देशों की भागीदारी, 9 प्राथमिक एजेंडों पर गंभीर विचार-विमर्श और योग तथा वेलनेस को नीति निर्माण का हिस्सा बनाना इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।
भारत ने इस मंच के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा, डिजिटल नवाचार और पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान का संतुलित समन्वय ही भविष्य की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला बन सकता है। यदि वैश्विक सहयोग इसी भावना के साथ आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में अधिक सुरक्षित, सुलभ और स्वस्थ विश्व की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव होगी।