जून 12, 2026

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का पश्चिमी देशों को करारा जवाब: “भारत को नैतिकता का पाठ न पढ़ाएं”

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नई दिल्ली, 12 जून 2026। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी देशों की आलोचनाओं का तीखा जवाब देते हुए भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों का मजबूती से बचाव किया। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर उठाए गए सवालों के जवाब में जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है और किसी भी देश को भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का अधिकार नहीं है।

रूस से तेल खरीदने पर उठे सवाल

रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर कई पश्चिमी देशों और विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं। उनका तर्क रहा है कि रूस से ऊर्जा खरीदना अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अर्थव्यवस्था को समर्थन देना है। हालांकि भारत लगातार यह कहता आया है कि उसकी पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

फिनलैंड में आयोजित कार्यक्रम में जब जयशंकर से इस विषय पर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

यूरोपीय देशों पर सीधा निशाना

जयशंकर ने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों ने अतीत में ऐसे देशों को हथियार बेचे हैं जिनका उपयोग भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने संकेत दिया कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हुई, तब वही देश नैतिकता की बात करने से पीछे हट गए थे।

उन्होंने कहा कि जो देश स्वयं अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हैं, वे भारत को यह नहीं बता सकते कि उसे किस देश से व्यापार करना चाहिए और किससे नहीं। उनका यह बयान पश्चिमी देशों की उस आलोचना के जवाब के रूप में देखा जा रहा है जिसमें भारत की रूस नीति पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति

विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत की विदेश नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं बल्कि देश के राष्ट्रीय हितों, आर्थिक आवश्यकताओं और रणनीतिक प्राथमिकताओं से संचालित होती है। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने में विश्वास करता है और किसी भी वैश्विक मुद्दे पर उसका दृष्टिकोण स्वतंत्र और व्यावहारिक होता है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि आज की दुनिया बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां प्रत्येक देश को अपने हितों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है। भारत भी इसी सिद्धांत का पालन करता है।

ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। ऐसे में सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने से भारत को आर्थिक लाभ मिला है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।

जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत अपने नागरिकों के हितों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव से ऊपर रखेगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता आत्मविश्वास

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्वतंत्र और संतुलित रुख अपनाया है। चाहे रूस-यूक्रेन संघर्ष का मामला हो या वैश्विक व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे, भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लिए हैं।

निष्कर्ष

फिनलैंड में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश देता है। रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेगा। उनका यह वक्तव्य न केवल भारत की कूटनीतिक सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि देश आज वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास और मजबूती के साथ अपनी बात रख रहा है।

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