NEET-UG पेपर लीक मामला: अदालत ने तीन आरोपियों से पूछताछ की CBI को दी अनुमति

नई दिल्ली: देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी CBI को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से न्यायिक हिरासत के दौरान पूछताछ करने की अनुमति प्रदान की है। अदालत के इस फैसले को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अदालत ने दी पूछताछ की मंजूरी
राउज एवेन्यू कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश ने CBI की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें एजेंसी ने आरोपियों मनीषा वाघमारे, शुभम खैरनार और धनंजय लोखंडे से जेल में पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने CBI को निर्धारित अवधि के दौरान इन तीनों आरोपियों से पूछताछ की अनुमति दी है, ताकि मामले से जुड़े नए तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत भी बढ़ा दी। जिन लोगों की हिरासत बढ़ाई गई है, उनमें मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, डॉ. मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद कुमार, मनीषा वाघमारे और मनीषा हवालदार शामिल हैं। सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया।
CBI ने बताए नए तथ्य
CBI की ओर से अदालत में बताया गया कि जांच के दौरान कुछ गवाहों के बयान सामने आए हैं, जिनसे नए तथ्यों की जानकारी मिली है। एजेंसी का कहना है कि इन बयानों की सत्यता की पुष्टि के लिए तीन आरोपियों से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत से अनुमति मांगी गई थी।
कैसे सामने आया कथित पेपर लीक नेटवर्क?
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में कई लोगों की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र अवैध तरीके से कुछ लोगों तक पहुंचाया गया और इसके बदले बड़ी रकम का लेन-देन हुआ। CBI का दावा है कि आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ आरोपियों ने प्रश्नपत्र हासिल करने और उसे आगे पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था। इस नेटवर्क के माध्यम से परीक्षा की गोपनीयता भंग करने की कोशिश की गई।
मई में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर मई महीने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया। इसके बाद CBI ने जांच अपने हाथ में लेकर कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियां कीं।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
NEET-UG जैसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लाखों छात्र हर वर्ष इस परीक्षा में शामिल होते हैं और ऐसे मामलों से उनकी मेहनत तथा भविष्य प्रभावित होता है।
आगे क्या?
अब CBI अदालत की अनुमति के तहत आरोपियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ से पेपर लीक नेटवर्क की पूरी संरचना और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
