सोनम वांगचुक का अनशन 15वें दिन में, बिगड़ती सेहत के बीच 20 जुलाई के संसद मार्च का आह्वान

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय से भोजन का त्याग करने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका वजन करीब 7.8 किलोग्राम घट चुका है, जबकि उनका रक्तचाप भी सामान्य स्तर से नीचे आकर लगभग 104/66 mm Hg दर्ज किया गया है। चिकित्सकीय चिंताओं के बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
अनशन लगातार जारी
सोनम वांगचुक ने 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू किया था। समय बीतने के साथ उनकी शारीरिक कमजोरी बढ़ती गई है, फिर भी उन्होंने अपने आंदोलन को जारी रखा है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार उपवास के कारण उनके स्वास्थ्य पर स्पष्ट असर दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार उनका वजन लगभग 7.8 किलोग्राम कम हो चुका है और रक्तचाप 104/66 mm Hg तक पहुंच गया है। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक अनशन की स्थिति शरीर के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और परीक्षा से जुड़े आत्महत्या मामलों में प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है।
कई नेताओं और सामाजिक हस्तियों का समर्थन
आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। वहीं, केरल के पूर्व मंत्री के.के. शैलजा, के.एन. बालगोपाल और पी. राजीव भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। अभिनेता प्रकाश राज ने भी आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई।
20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी
सोनम वांगचुक ने देशभर के नागरिकों, छात्रों और युवाओं से 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात संसद तक पहुंचाना हर नागरिक का अधिकार है और जनभागीदारी से ही जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
लोगों के नाम संदेश
अपने संबोधन में सोनम वांगचुक ने कहा कि वे स्वयं को कोई महान नेता या नायक नहीं मानते। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी और में नायक तलाशने के बजाय अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति स्वयं जागरूक बनें तथा समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए आगे आएं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक का अनशन अब केवल एक व्यक्ति का विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों की सुरक्षा और जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का विषय बनता जा रहा है। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत चिंता का कारण बनी हुई है, जबकि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर अब देशभर की नजरें टिकी हैं।