भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह (EWG) बैठक का आगाज़: भविष्य के रोजगार, कौशल और श्रमिक कल्याण पर वैश्विक सहमति की दिशा में अहम कदम

नई दिल्ली:
भारत की अध्यक्षता में आयोजित तीसरी ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह (BRICS Employment Working Group – EWG) बैठक ने रोजगार और श्रम क्षेत्र से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को नई गति दी है। इस बैठक में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी परिवर्तन और रोजगार के नए स्वरूपों पर व्यापक विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसा साझा दृष्टिकोण तैयार करना है, जिससे सदस्य देशों में रोजगार के अवसर बढ़ें, श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा मिले और कौशल विकास को नई दिशा मिल सके।
भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप रोजगार रणनीति
तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन और हरित अर्थव्यवस्था ने रोजगार के स्वरूप में बड़ा बदलाव ला दिया है। इसी परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि युवाओं, महिलाओं और नए कार्यबल को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए।
भारत ने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक प्रगति तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब उसके लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध हो।
कौशल विकास बनेगा विकास का प्रमुख आधार
बैठक में इस बात पर व्यापक चर्चा हो रही है कि बदलते उद्योगों की मांग के अनुरूप श्रमिकों को नए कौशल कैसे प्रदान किए जाएँ। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं, हरित प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचार आधारित क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएँ तेजी से बढ़ेंगी।
ऐसे में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि निरंतर कौशल उन्नयन (Reskilling) और नए कौशल अर्जित करने (Upskilling) की व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। सदस्य देश इस दिशा में अपने सफल अनुभवों और नीतिगत पहलों को साझा कर रहे हैं।
गिग और प्लेटफ़ॉर्म आधारित श्रमिकों पर विशेष चर्चा
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार के साथ गिग और फ्रीलांस कार्यबल की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस नई कार्य व्यवस्था ने रोजगार के अवसर तो बढ़ाए हैं, लेकिन सामाजिक सुरक्षा, बीमा, पेंशन और श्रमिक अधिकारों जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
बैठक में इस विषय पर विशेष मंथन किया जा रहा है कि ऐसे श्रमिकों को अधिक सुरक्षित और स्थिर कार्य वातावरण कैसे उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का समान रूप से लाभ प्राप्त कर सकें।
सामाजिक सुरक्षा और समावेशी श्रम बाजार पर जोर
ब्रिक्स देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार केवल विकास दर नहीं, बल्कि सुरक्षित, न्यायसंगत और समावेशी श्रम बाजार भी है। इसी उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार, सुरक्षित कार्यस्थलों, समान अवसर, लैंगिक समानता और श्रमिक अधिकारों को सुदृढ़ बनाने पर विचार किया जा रहा है।
महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ाने, दिव्यांगजनों के लिए रोजगार अवसर विकसित करने तथा युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार से जोड़ने जैसे विषय भी बैठक के प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं।
वैश्विक सहयोग को मिलेगा नया आयाम
ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह की यह बैठक सदस्य देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और सर्वोत्तम नीतियों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बन रही है। साझा रणनीतियों के माध्यम से श्रम बाजार को अधिक लचीला, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के अनुरूप बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक इस बात का भी संकेत है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक रोजगार नीतियों के निर्माण में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
निष्कर्ष
तीसरी ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह (EWG) बैठक केवल एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि भविष्य के रोजगार, कौशल विकास और श्रमिक कल्याण के लिए साझा वैश्विक दृष्टि तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह संवाद न केवल ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में समावेशी, टिकाऊ और रोजगार-केंद्रित विकास के नए रास्ते भी खोलेगा।