जुलाई 14, 2026

उत्तर प्रदेश में ₹12.18 करोड़ के साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 17 आरोपी गिरफ्तार, 14 एफआईआर दर्ज

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए करीब ₹12.18 करोड़ की ऑनलाइन ठगी से जुड़े संगठित गिरोह का पर्दाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके खिलाफ 14 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

डिजिटल माध्यम से बनाई ठगी की बड़ी साजिश

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। वे फर्जी पहचान, नकली निवेश योजनाओं, ऑनलाइन भुगतान के झांसे और अन्य डिजिटल तरीकों से लोगों से धन हड़पने का काम करते थे। ठगी की रकम को कई बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इधर-उधर भेजकर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था।

17 आरोपियों की गिरफ्तारी, नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की और 17 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। पुलिस डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच कर रही है।

14 एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ रही कार्रवाई

गिरोह के खिलाफ दर्ज 14 मामलों में साइबर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और वित्तीय अपराध से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और गिरोह की पूरी संरचना का खुलासा किया जाएगा।

साइबर अपराध पर सख्त कार्रवाई का संदेश

उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को देने की अपील की है।

नागरिकों के लिए जरूरी सावधानियां

  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन भुगतान न करें।
  • ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या कार्ड विवरण किसी के साथ साझा न करें।
  • निवेश, लॉटरी या नौकरी के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध लिंक से बचें।
  • केवल आधिकारिक वेबसाइट और विश्वसनीय मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
  • साइबर ठगी का संदेह होने पर तुरंत संबंधित पुलिस या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

निष्कर्ष

₹12.18 करोड़ की कथित साइबर ठगी से जुड़े इस गिरोह का खुलासा यह दर्शाता है कि डिजिटल अपराध लगातार अधिक संगठित होते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस कार्रवाई और नागरिकों की जागरूकता दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाकर और सतर्क रहकर ही साइबर अपराधों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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